Monday, November 5, 2012

एर्नाकुलम से तिरुवनंतपुरम की ओर

तिरुवनंतपुरम या त्रिवेंद्रम केरल की राजधानी है। कोचीन से त्रिवेंद्रम तीन से चार घंटे का रास्ता है। कोचीन से त्रिवेंद्रम जाने के दो रास्ते हैं एक कोट्टयम होकर और दूसरा अलेप्पी होकर। अलेप्पी होकर जाने वाला रास्ता समुद्र तट के साथ का ट्रैक है जबकि कोट्टयम का रास्ता थोड़ा अंदर से और लंबा भी है। हमारी ट्रेन कोट्टयम होकर जाने वाली थी। यह रास्ता समुद्र तट से थोड़ा दूर दूर होकर चलता है। 

हमारा कोचीन से त्रिवेंद्रम की ओर जाने का सफर रेल से शुरू हुआ। वैसे बसें भी विकल्प हैं। लेकिन दक्षिण भारत में रेल में अपेक्षाकृत भीड़ कम होती है। सुबह छह बजे से रात नौ बजे तक किसी भी एक्सप्रेस ट्रेन में स्लीपर क्लास का टिकट लेकर स्लीपर कोच में भी छोटी दूरी का सफर किया जा सकता है। इसलिए हमारा दक्षिण में इस तरह का सफर हमेशा आरामदायक रहा। 
 त्रिवेंद्रम शहर का ऐतिहासिक ईस्ट गेट। 

दिन में स्लीपर क्लास का टिकट-  दिन के सफर के लिए हमने काउंटर से स्लिपर क्लास का टिकट खरीदा और जाकर एक आरक्षित डिब्बे में बैठ गए। यहां से हमारी ट्रेन थी केरला एक्सप्रेस जो 9.45 बजे एर्नाकुलम साउथ (ERS) से खुलती है दोपहर 2.35 बजे त्रिवेंद्रम ( TVC) पहुंचती है। हालांकि ट्रेन दिल्ली से आ रही है, पर भीड़ काफी कम हो गई है। 
केरल की राजधानी त्रिवेंद्रम पहुंचे तो हमारा बारिश वहां भी स्वागत कर रही थी। लेकिन त्रिवेंद्रम रेलवे स्टेशन पर इंतजार करने अच्छी व्यवस्था थी। स्टेशन पर अच्छी कैंटीन भी है। जहां बाजार से भी कम दरों पर भोजन उपलब्ध है।

त्रिवेंद्रम का ईस्ट फोर्ट शहर के मध्य में स्थित है। इस कलात्मक गेट को 1891 मे त्रिवेंद्रम के राजा ने बनवाया। यह किले का पूर्वी प्रवेश द्वार है। अब यह त्रिवेंद्रम शहर के बीचों बीच स्थित है। यहां से शहर के हर हिस्से के लिए बसें मिलती हैं।

वैसे कोचीन केरल का सबसे बड़ा शहर है। यहां से कई आसपास के जगह जाने के लिए रास्ते बनते हैं। केरल के सबसे खूबसूरत लोकेशन में एक मुन्नार जाने के लिए यहां से टैक्सी या बस ली जा सकती है। मुन्नार की दूरी 140 किलोमीटर के आसपास है। वहीं कोचीन से ही लक्षद्वीप जाने के लिए जहाज जाते हैं। लक्षद्वीप यहां से 22 से 30 घंटे का रास्ता है। लक्षद्वीप जाने के लिए एक हफ्ते का समय निकाल कर चलना चाहिए। 


 त्रिवेंद्रम में रहने के लिए सबसे सस्ते और अच्छे होटल्स स्टेशन के बाहर निकलने पर बाईं तरफ थोडी दूर चलने पर सामने जाने वाली सड़क जिसे मंजलीकुलम रोड कहते हैं। वहां मंजलीकुलम में कई मध्यम दर्जे के होटल और लॉज हैं। यहां हमारा ठिकाना बना प्रवीण टूरिस्ट होम। सड़क पर शांति है और रेलवे स्टेशन से वाकिंग डिस्टेंस पर भी है। इसलिए रहने के लिए उपयुक्त जगह है। पद्मनाभ स्वामी का मंदिर भी यहां से महज एक किलोमीटर है। 
- विद्युत प्रकाश 




( PRAVEEN TOURIST HOME, MANJALIKULAM ROAD, TVC ) 

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