Wednesday, December 19, 2012

मदुमलाई - यहां छुट्टियां मनाने आते हैं गजराज


नीलगिरी की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच है मदुमलाई टाइगर रिजर्व। दक्षिण भारत के एक मात्र हिल स्टेशन उटी से जब आप मैसूर का सफर शुरू करते हैं तो आपकी यात्रा का बड़ा हिस्सा मदुमलाई टाइगर रिजर्व से होकर गुजरता है। मदुमलाई की सीमा समाप्त होने के साथ ही कनार्टक शुरू हो जाता है और शुरू हो जाती है बांदीपुर टाइगर रिजर्व की सीमा।
बांदीपुर को यूनेस्को हेरीटेज का दर्जा प्राप्त है, जबकि मदुमलाई को ये दर्जा दिए जाने की कवायद चल रही है। 321 वर्ग किलोमीटर में फैले इस जंगल में हरियाली के साथ हिरण, हाथी और दूसरे जानवरों को विहार करते देखा जा सकता है। हालांकि इंतजामात के लिहाज से देखें तो मदुमलाई की हालात बांदीपुर से काफी अच्छी है। ऊटी घूमने जाने वाले सैलानी मदुमलाई की सैर की योजना भी बना सकते हैं। इसके लिए मदुमलाई सफाई का पैकेज लिया जा सकता है। 
मदुमलाई के जंगल। 

मदुमलाई में बाघ कितने हैं इसके बारे में सही सही अंदाजा तो नहीं है लेकिन मदुमलाई हाथियों की ऐशगाह है। यहां बड़ी संख्य़ा में हाथी हैं। इतना ही नहीं तमिलनाडु के तमाम मंदिरों में सेवा करने वाले हाथियों को छुट्टियां बीताने के लिए मदुमलाई अभ्यारण्य में भेजा जाता है। कई तमिलनाडु के मंदिरों में आप हाथियों से लोगों को आशीर्वाद प्राप्त करते देख सकते हैं। ऐसा करना शुभ माना जाता है। इन हाथियों को लोगों को आशीर्वाद देने का प्रशिक्षण दिया जाता है। हालांकि ये हाथी उन्ही लोगों को आशीर्वाद देते हैं जिनसे उनको दक्षिणा प्राप्त होता है। 
अगर शहर के कोलाहाल से दूर कुछ दिन प्रकृति के सानिध्य में गुजारना चाहते हैं तो इसके लिए मदुमलाई अच्छा विकल्प हो सकता है। यहां पहुंचने के लिए आप कनार्टक की ओर से मैसूर से पहुंचने का रास्ता अपना सकते हैं या फिर कोयंबटूर रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट से ऊटी होते हुए भी मदुमलाई पहुंचा जा सकता है। आप मदुमलाई में रूकने के बाद वहीं से जंगल में सफारी की योजना बना सकते हैं। 
vidyutp@gmail.com

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