Tuesday, December 4, 2012

धनुषकोडि - यहां है विभीषण का मंदिर


रावण के भाई विभीषण का मंदिर रामेश्वरम शहर से 15 किलोमीटर दूर निर्जन में समुद्र के किनारे है। जब हमलोग यहां पहुंचे तो दोपहर में यहां गर्मी तेज लग रही थी। कहते हैं राम से विभीषण ने लंका विजय के बाद प्रार्थना की थी कि भविष्य में कोई दुश्मन लंका पर चढ़ाई  न कर दे इसलिए लंका आने के लिए आपने जो ये सागर पर पुल बनाया था, उस पुल को अपने ही हाथों से तोड़ दें। तब राम ने विदेश नीति में मित्रता के धर्म का पालन किया। कहते हैं कि उनके आदेश पर लक्ष्मण ने धनुष से वाण चलाकर उस ऐतिहासिक पुल तोड़ दिया था। इसलिए रामेश्वरम से 20 किलोमीटर आगे धनुषकोडि नामक जगह है। कहा जाता है कि यहां से श्रीलंका 35 किलोमीटर है। कभी धनुषकोडि तक रेलवे लाइन आती थी। तब धनुषकोडि तक आने वाले सैलानी रेल से यहां तक आते थे। लेकिन 1965 में आए तूफान में वह रेल लाइन बर्बाद हो गई।


इस तूफान में हजारों लोगों की जानें गई थीं। हालांकि धनुषकोडि में अभी भी रेलवे लाइन के अवशेष हैं। अब एक बार फिर इस लाइन के बनाए जाने की चर्चा हो रही है। अभी भी धनुषकोडि जाने वाले सैलानी शाम ढलने से पहले वहां से लौट आते हैं। धनुषकोडि में रात में रुकने का रिवाज नहीं है। समंदर की तेज लहरें भी वहां आती हैं।

देखिए तैरते पत्थर - रामेश्वर में लक्ष्मण कुंड, सीताकुंड जैसे कुछ और मंदिर हैं। एक साधु बाबा के मंदिर में तैरते हुए पत्थर देखे जा सकते हैं। इस तरह के तैरते हुए पत्थर धनुषकोडि के मंदिर में भी हैं। कहा जाता है इन्ही पत्थरों को समंदर में तैराकर रामायण काल के महान इंजीनियर नल और नील बंधुओं ने भारत से श्रीलंका तक पुल बनाया होगा। ये पुल कुछ वैसा ही रहा होगा जैसा आज के जमाने में नदियों पर पीपों को जोड़कर पांटून का पुल या पीपा पुल बनाया जाता है।
-    --- विद्युत प्रकाश मौर्य
)  ( RAMESHWARAM, TAMILNADU, DHANUSHKODI, VIBHISHAN TEMPLE )      

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