Thursday, November 29, 2012

मदुरै का गांधी म्यूजियम


दक्षिण भारत के कई शहरों में गांधी जी की स्मृतियां हैं। त्रिवेंद्रम को गांधी जी ने सदाबहार शहर कहा था। तो कन्याकुमारी में बापू की स्मृति में गांधी मंडप बना है। वहीं तमिलनाडु के मदुरै शहर में गांधी संग्रहालय है। मदुरै पहुंचने पर हमारी इच्छा गांधी म्यूजियम जाने की हुई। हम लोग रेलवे स्टेशन के पास न्यू रूबी लॉज में ठहरे थे। मैं और बेटे अनादि चल पड़े गांधी म्यूजिम। स्टेशन के पास वाले बस स्टैंड से लोकल बस ली। बस वैगेई नदी को पार कर तामुकम पहुंची। कंडक्टर महोदय ने बताया यहां आप उतर जाएं सामने गांधी म्यूजिम है।
 बस स्टाप के पास बीएसएनएल का बडा दफ्तर था। आधा किलोमीटर पैदल चलने के रास्ते में मदुरै की बड़ी रंगशाला मिली। यहां अक्सर नाटक होते हैं। सफेद रंग की विशाल बिल्डिंग में है गांधी म्यूजिम। ये संग्रहालय तिरुमल नायक वंश के ऐतिहासिक महल में बना है। कोई प्रवेश टिकट नहीं। दो मंजिले म्यूजिम में गांधी जी के जीवन की कहानी के साथ साथ देश की आजादी की कहानी बताई गई है। कुछ श्वेत श्याम कुछ रंगीन चित्र। पर क्या खास है संग्रहालय में।

खून के छींटे वाले गमछे को देखें - उपरी मंजिल पर हमें देखने को मिला बापू के इस्तेमाल किए गमछे का एक टुकड़ा। यह वही गमछा है जिसे बापू ने आखिरी वक्त में अपने शरीर पर डाल रखा था। बापू को 30 जनवरी 1948 को गोली लगने के बाद खून के छींटे के निशान इस गमछे पर हैं। बापू के मदुरै में रहने वाले सहयोगी इस गमछे को लेकर आए मदुरै के संग्रहालय में। म्यूजिम के बाहर एक पुस्तक बिक्रय केंद्र भी है। पड़ोस में एक राज्य सरकार का पुरात्तव विभाग का भी संग्रहालय है। एक विशाल डायनासोर की प्रतिमा भी है।

अनूठा बाल उद्यान - 
मदुरै के इस बापू के संग्रहालय को देखने तमिलनाडु में आसपास से स्कूली बच्चे बड़ी संख्या में आते हैं। संग्रहालय के ठीक सामने बच्चों के लिए बहुत बड़ा एम्यूजमेंट पार्क है। इस पार्क में एक से बढ़कर एक खेलकूद के सामान और झूले आदि हैं। इन सब झूलों के रेट भी बड़े मुनासिब हैं। सबसे अच्छी बात है कि इन शानदार झूलों के लिए कोई प्रवेश टिकट नहीं है। यानी मुफ्त में जमकर मौज मस्ती करो। अनादि तो घंटे एक झूले से दूसरे झूले पर मौज मस्ती करते रहे।

-    ---- विद्युत प्रकाश 

((GANDHI, MADURAI, TAMILNADU ) 

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