Saturday, November 17, 2012

कन्याकुमारी की थाली- फुल टाइट भोजन – जमकर खाओ

घूमते घूमते भूख लग जाए तो खाने का स्वाद और बढ़ जाता है। अगर आपको भर पेट खाने को मिले तो कहना ही क्या। दक्षिण भारत के अधिकतर शहरों में थाली में भरपेट खाने का चलन है। जब भी यहां आप थाली मिल्स की बात करते हैं तो इसका मतलब भरपेट होता है। हालांकि भरपेट का मतलब भरपेट चावल से है। कन्याकुमारी और रामेश्वर इसके अपवाद हैं। कन्याकुमारी में जब हमने दोपहर के खाने के लिए जगह ढूंढनी शुरू की तो जा पहुंचे राजस्थान भोजनालय। 

राजस्थान भोजनालय ने बताया 70 रुपये की थाली। हमने पूछा की थाली में क्या होगा। चपाती फुलका, चावल, दाल, रसम, सांभर, दो सब्जियां, दही, पापड़, अचार सलाद। सब कुछ। और क्या चाहिए। दही और अचार तो दक्षिण भारत की थाली में अनिवार्य तौर पर नजर आते ही हैं। इन सब कुछ के बाद वेटर ने बताया कि ये सब कुछ फुल टाइट है। ( हो सकता उसका आशय फुल डाइट से हो)  मतलब चाहे जितना खाओ। हमने आर्डर दे दिया। जब खाना आया तो चपाती देखकर दिल खुश हो गया। खालिश गेहूं की चपाती, घी चुपड़ी हुई। चाहे जितनी भी चपाती खाओ। दक्षिण भारत के शहरों में अक्सर चपाती नहीं मिलती। मिलती भी है तो कई बार चावल के आटे की बनी हुई। लेकिन कन्याकुमारी और रामेश्वर में उत्तर भारतीय, मारवाड़ी भोजनालय हैं जहां आप छक कर अपने यहां के खाने का मजा ले सकते हैं।
कन्याकुमारी में राजस्थान भोजनालय के अलावा लक्ष्मी भोजनालय में एक जैसा मीनू है।
वहीं रामेश्वरम में अग्रसेन भवन, गुजराती भोजनालय के अलावा कई उत्तर भारतीय भोजनालय हैं जहां आपको उत्तर भारतीय चपाती और पराठे मिल जाएंगे। रामेश्वरम के अग्रसेन भवन में हमें सुबह के नास्ते में तिकाने पराठे मिले। आलू की सब्जी के साथ। रसोइए भी थे अपने झारखंड प्रांत के सिमडेगा के रहने वाले। ठीक वैसे ही पराठे जैसी मेरी मां बचपन में हमें बना कर परोसती थीं। बचपन की याद आई। मजा आ गया।
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-----विद्युत प्रकाश ( KANYAKUMARI, TAMAILNADU, VEG FOOD, RAJSTHANI THALI  )

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