Friday, October 26, 2012

पनवेल से चिपलूण - संतरे के संग-संग सफर के रंग

मंगला लक्षदीप एक्सप्रेस इगतपुरी से घाट सेक्शन पार करने के बाद अब मुंबई के बाहरी इलाके का रेलवे स्टेशन पनवेल में रुकी है। पनवेल मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनल से 40 किलोमीटर से ज्यादा दूर है। पर अब मुंबई शहर का विस्तार पनवेल तक हो गया है। 

पनवेल रेलवे स्टेशन विशाल और काफी साफ सुथरा नजर आ रहा है। यहां से ट्रेन कोंकण रेलवे के मार्ग पर चलने वाली है। हम सबके अंदर इसको लेकर रोमांच है। 
पनवेल रेलवे स्टेशन पर संतरे का बड़ा सा गट्ठर लेकर रेल में चढ़े कुशीनगर के अनुराग। कोच में आते ही आवाज लगाकर संतरे बेचना शुरू कर दिया। हमने भी उनसे संतरे खरीदे। उनसे थोड़ी बातचीत हुई। वे रोज कोंकण रेल मार्ग पर संतरा बेचते हुए रत्नागिरी तक जाते हैं। वे बताते हैं कि तकरीबन छह घंटे के सफर में रास्ते में सारे संतरे बिक जाते हैं।

वे बताते हैं कि जो नहीं बिके वे सारे संतरे वापसी में बिक जाते हैं। युवा अनुराग संतरा बेचने के साथ साथ बीए की पढ़ाई भी कर रहे हैं। हर साल परीक्षा देने यूपी में अपने शहर कुशीनगर जाते हैं। अनुराग ने बताया कि रोज संतरा बेच कर महीने में 30 से 40 हजार रुपये तक आराम से कमा लेते हैं। उनका कहना है कि कोई सीमा नहीं है कमाई की। और मेहनत करें तो कमाई बढ़ भी सकती है।


जितनी मेहनत करो उतनी कमाई - अनुराग कहते हैं जितनी मेहनत करो उतनी कमाई है। उनकी जिंदगी का फलसफा सुनकर प्रेरणा मिलती है। पढ़े लिखे लोगों में कई बार निराशा दिखती है। लेकिन अनुराग गजब के आशावादी हैं। सरकारी नौकरी पाने की कोशिश की। पर नहीं मिली। लेकिन कोई मलाल नहीं। जिंदगी से कोई शिकायत नहीं। 
कोंकण रेल पर चिपलूण रेलवे स्टेशन। 

वे खूब मेहनत कर रोज नागपुरी संतरे बेचते हैं। तौल का कोई संकट नहीं। दस रुपये का पैकेट तैयार करते हैं। रेल में जो मांगे उसे थमाते जाते हैं। अच्छी खासी कमाई हो जाती है। उनकी जिंदगी रेल के साथ चलती रहती है। किसी से कोई शिकवा शिकायत नहीं। 

अनुराग आगे बताते हैं कि मुंबई में काम इतना बढ़ा लिया है कि छह आठ स्टाफ भी रखा है। यूपी से चलकर आने के बाद महाराष्ट्र भा गया है। परिवार के दूसरे लोग भी यहां रहते हैं। वे सब लोग अलग अलग कारोबार में जुटे हुए हैं। अब अपनी कमाई से महाराष्ट्र के पनवेल में जमीन खरीदने की भी तैयारी कर रहे हैं। तो कहो हिंदी मराठी भाई भाई।

पनवेल के बाद साढ़े तीन घंटे तक लगातार रफ्तार के साथ चलने के बाद हमारी ट्रेन चिपलूण नामक रेलवे स्टेशन पर आकर रुकी। चिपलूण रत्नागिरी जिले का रेलवे स्टेशन है। इसकी ख्याति महाराष्ट्र के एक पिकनिक स्पाट के तौर पर है। किसी जमाने में जब सैलानी मुंबई से गोवा सड़क मार्ग से जाते थे तब चिपलूण इसका प्रमुख ठहराव हुआ करता था। चिपलूण में परशुराम मंदिर है। इसके अलावा यहां वितस्ता नदी है जिसमें बोटिंग की जा सकती है।

इसके बाद अगला ठहराव आया रत्नागिरी। वही रत्नागिरी जो हापुस आम के लिए प्रसिद्ध है। कोंकण क्षेत्र शुरू हो चुका है। हरीतिमा मन मोह रही है। सफऱ का आनंद बढ़ता जा रहा है। अगला स्टेशन कणकावली है। मंगला का महाराष्ट्र में आखिरी ठहराव। 

-    -विद्युत प्रकाश मौर्य  ( ORANGE, RAIL, KONKAN, MAHARASTRA ) 

चलो अब चलते हैं कोंकण रेल के सफर पर....





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