Thursday, October 18, 2012

बच्चों को विश्वास में लेकर करें स्थान परिवर्तन

जब कभी आप स्थान परिवर्तन करें बच्चों को भी विश्वास में लें उन्हें यह समझाने की कोशिश करें की हमें क्यों यह जगह बदलनी पड़ रही है। नई जगह पर हमारे लिए जाना क्यों जरूरी है। साथ ही नई जगह पर जाने से हमें क्या क्या लाभ हो सकते हैं। 

आप यह न समझें की बच्चे कुछ नहीं समझते हैं। बच्चे काफी कुछ समझते हैं। उनके साथ दोस्ताना व्यवहार करके अपनी बातें साझा करें, आपको इसका लाभ मिलेगा। परिवर्तन का बच्चों पर जो मानसिक रूप से बुरा असर पड़ता है बच्चे उससे उबर सकेंगे। 

मैं जब अपनी भांजी से एक बार मिला तो उससे पूछा कि नई जगह में आकर कैसा महसूस कर रही हो तो उसका जवाब था कि पुराने स्कूल से नया स्कूल अच्छा जरूर है पर मैं अपने पुराने दोस्तों को काफी मिस कर रही हूं। उसे कई महीने नए स्कूल में अपने नए दोस्तों के साथ सामंजस्य बिठाने में लग गए।

बार बार स्कूल बदलने का असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। कई बार सिलेबस बदल जाता है तो बच्चों को नए सिलेबस के अनुसार पढ़ाई करनी पड़ती है। अगर सिलेबस वही है तो भी स्कूल बदलने पर टीचर बदल जाते हैं , दोस्त बदल जाते हैं वातावरण बदल जाता है। कई बच्चों को अपने पुराने टीचर बहुत अच्छे लगते हैं तो कुछ को पुराने दोस्त। ऐसे में नए जगह में सब कुछ बदल जाने पर किसी के लिए सब कुछ सामंजित कर लेना आसान नहीं होता। अक्सर हम बच्चों की  मानसिक समस्याओं की ओर ध्यान नहीं देते।

 अगर आपका बच्चा लगातार निराश रहता हो तो उससे दोस्ताना व्यवहार कर उसकी समस्या के बारे में जानना चाहिए। याद रखिए अगर आप अपने बच्चे के संग दोस्ताना व्यवहार करते हैं तो आपका बच्चा खुद को आपके करीब महसूस करता है। अगर आप उसके साथ ज्यादा बात नहीं करते हैं तो धीरे-धीरे उसके साथ दूरियां बढ़ने लगती है। इसलिए आप हमेशा थोड़ा सा समय अपने बच्चे के लिए निकालें और उसका हाल चाल जरूर पूछें। उसके उसके नए स्कूल के बारे में पूछें उसके नए दोस्तों के बारे में पूछें। इसका आपको लाभ मिलेगा।  

आप कई बार घर बदलते हैं. घर बदलने के कई कारण हो सकते हैं. कई बार नौकरी में तबादले कारण तो कई बार किसी और कारण से घर बदलना पड़ता है. घर बदलने में आपको तो परेशानी होती ही है. साथ ही बच्चों को भी काफी परेशान होना पड़ता है। ऐसे में जब आप घर बदलते हों बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत है।

 हर बदलाव का असर हर किसी पर पड़ता है. जैसे आप हिंदी भाषी क्षेत्र से किसी अहिंदी भाषी क्षेत्र में जाते हैं वहां आपको नए लोगों के साथ निभाने में दिक्कत होती है. ऐसी ही दिक्कत बच्चों के साथ भी आती है. ऐसे मामले में बच्चों पर खास तौर पर ध्यान देने की जरूरत है. क्योंकि बच्चों को भी नए माहौल में खुद को सामंजित करने में काफी परेशानी आती हैइसे बड़े ध्यान से समझने की जरूरत है।

सामंजस्य बनाने की कोशिश करें - बच्चों को अपने पुराने स्कूल को छोड़ना पड़ता है पुराने दोस्तों को छोड़ना पड़ता हैपुराने पड़ोसियों को छोड़ना पड़ता है। ऐसे में बच्चे कई बार नई जगह पर काफी उदास रहते हैंभले ही नई जगह कितनी भी अच्छी क्यों न हो पर पुरानी जगह की याद बच्चों को सताती रहती है। हम जिस तेजी नई जगह में खुद को सामंजित कर लेते हैं कई बार बच्चे खुद को इस तरह नहीं कर पाते हैं। ऐसे में बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत है। नहीं तो हो सकता है बच्चे लगातार तनाव में रहने लगें और इसका असर उनकी पढ़ाई लिखाई पर पड़ सकता है।


-         विद्युत प्रकाश मौर्य   vidyutp@gmail.com 

 ( TRAVEL, CHILD, CHANGE, TRANSFER ) 

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