Monday, October 22, 2012

पुष्कर- जगतपिता का एक मात्र मंदिर है यहां


भगवान शिव के मंदिर हर गांव शहर में होते हैं। भगवान विष्णु के भी मंदिर होते हैं। लेकिन जगत पिता ब्रह्मा का एक मात्र मंदिर है धरती पर। वह है रास्थान के पुष्कर में। 
कहा जाता है देवता अमृत का सेवन कर रहे थे। इस दौरान अमृत का एक टुकड़ा पुष्कर में गिरा और यहां बनाया ब्रह्मा जी ने अपना खुद का मंदिर। वर्तमान में जो मंदिर बना है उसका निर्माण 14वीं सदी में हुआ था। मंदिर मुख्य रूप से संगमरमर के पत्थरों से बना हुआ है। कार्तिक पूर्णिमा के समय यहां विशाल मेला लगता है। कहा जाता है यह एकमात्र मंदिर है जिसे औरंगंजेब ने नष्ट नहीं किया। 


मंदिर की कथा - मंदिर की एक और कथा है। कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने जगत भलाई के लिए यज्ञ करना चाहा। इसके लिए जब वो शुभ मूर्हत आया तो उनकी पत्नी मां सरस्वती ने उन्हें इन्तजार करने को कहा। इससे यज्ञ में विलंब होने लगा। क्रोध में आ कर ब्रह्मा जी ने गायत्री नाम की स्त्री से विवाह कर लिया और उन्हें अपने साथ यज्ञ में बैठाया ताकि समय रहते शुभ मूहर्त में यज्ञ का कार्य पूर्ण हो सके। सरस्वती जी ने जब अपने स्थान पर दूसरी स्त्री को बैठे देखा तो वे क्रोध में आ गईं और ब्रह्मा जी को श्राप देते हुए कहा कि आपकी धरती पर कहीं भी और कभी भी  पूजा नहीं होगी। जब उनका क्रोध थोड़ा शांत हुआ तो देवी-देवताओं ने मां सरस्वती को विनय की कि ब्रह्मा जी को इतना कठोर दण्ड न दें।  देवी-देवताओं की बात का मान रखते हुए मां सरस्वती ने कहा कि ब्रह्मा जी का केवल एक ही मंदिर होगा जो पुष्कर में स्थित होगा और वो केवल यहीं पर पूजे जाएंगे। 

पुष्कर मिट्टी में खालिश राजस्थान की खुशबू है। चारों तरफ पहाड़ियों से घिरा पुष्कर दुनिया से कुछ अलग सा लगता है। पुष्कर बस स्टैंड से पैदल आगे बढ़ते जाइए। आ जाएगा ब्रह्मा जी का मंदिर। मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद पुष्कर सरोवर में जाना न भूलें। लोग पुष्कर सरोवर में भी पूजा करके अपने परिवार के लिए उन्नति की कामना करते हैं। यहां पूजा कराने के लिए पंडे सदैव मौजूद रहते हैं। 

जगतपिता के मंदिर के अलावा पुष्कर में कई और मंदिर भी हैं। यहां ऊंट की सवारी का भी आनंद लिया जा सकता है। साल में एक बार पुष्कर में मेले का आयोजन होता है। तब पुष्कर में सैलानियों की भीड़ बढ़ जाती है। लेकिन वैसे भी पुष्कर में सालों भर सैलानी पहुंचते हैं। पुष्कर की आबोहवा खास तौर पर विदेशियों को बहुत भाती है। कई विदेशी तो यहां हफ्तों ठिकाना बनाए रहते हैं। इसलिए पुष्कर की दुकानों पर अब दाल बाटी चूरमा ही नहीं बल्कि चाइनीज डिश और मोमोज भी खाने को मिल जाएंगे।
अजमेर को पड़ाव बनाकर पुष्कर के अलावा अजमेर शरीफ की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर जाया जा सकता है। महान सूफी संत की दरगाह पर चादर चढाने और मन्नत मांगने देश ही नहीं पड़ोसी मुल्क से भी बड़ी संख्या में लोग आते हैं। अजमेर में ऐतिहासिक ढाई दिन का झोपड़ा देखा जा सकता है।

कैसे पहुंचे - पुष्कर राजस्थान में जयपुर से तकरीबन 150 किलोमीटर आगे है। पुष्कर पहुंचने के लिए आप कहीं से भी अजमेर पहुंचे। अजमेर में ही आप किसी होटल में अपना ठहराव कर सकते हैं। यहां से पुष्कर महज 20 किलोमीटर है। सिर्फ बसें जाती हैं। पहाड़ी के एक तरफ अजमेर दूसरी तरफ पुष्कर। 
- माधवी रंजना 

( PUSHKAR, BARHMA TEMPLE, AJMER, RAJSTHAN ) 

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