Sunday, October 28, 2012

कोंकण रेल की रपटीली राहें

कोंकण रेल का सफर मनमोह लेता है। अदभुत नजारे हमेशा के लिए आपके जेहन में कैद हो जाते हैं। कोंकण भारतीय रेलवे का एक अलग जोन है। ये आजाद भारत में भारतीय रेलवे में इंजीनियरिंग की उत्कृष्टता का बेहतरीन नमूना है। मुंबई के पास पनवेल से आगे रोहा रेलवे स्टेशन से शुरू हो जाती है कोंकण रेल की सीमा। रास्ते में आते हैं चिपलूण, रत्नागिरी जैसे स्टेशन।
महाराष्ट्र में कणकावली कोंकण रेल का प्रमुख रेलवे स्टेशन है। यहां स्टेशनों पर कोई भीड़भाड़ नहीं दिखाई देती। महाराष्ट्र का रत्नागिरी जिला हालांकि विकास के मामले में पिछड़ा है लेकिन खूबसूरती में गोवा का मुकाबला करता है। रत्नागिरी में हमारी ट्रेन 10 मिनट रुकी। लेकिन खाने पीने को स्टेशनों पर खाने पीने को कुछ खास नहीं मिला। रत्नागिरी के बाद ट्रेन महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले से गुजरती है। हालांकि मंगला एक्सप्रेस का ठहराव इस जिले के स्टेशनों में नहीं है। सिंधुदुर्ग, कुदल और सावंतवाडी रोड जैसे स्टेशनों से ट्रेन बिना रुके गुजर जाती है। शाम गहराने के साथ ट्रेन गोवा में प्रवेश कर जााती है। कोंकण रेल मार्ग पर गोवा के दो बड़े स्टेशन आए थिविम जंक्शन और मडगांव जंक्शन।

कोंकण रेल के सफर के दौरान रेल की खिड़की से नदियां, पहाड़ और हरियाली देखते देखते आपकी आंखे थक जाएंगी लेकिन नजारे खत्म होने का नाम नहीं लेंगे। रेल एक सुरंग में घुसती है, निकलने के बाद दूसरे सुरंग में घुस जाती है। पहाड़ों को काटकर कोंकण रेल के लिए रास्ते बनाए गए हैं। एक तरफ ऊंचे पहाड़ तो दूसरी तरफ गहरी खाई। कोंकण रेल गोवा का बड़ा इलाका तय करते हुए आगे बढ़ती है। रास्ते में काफी दूर तक एक तरफ गोवा का समंदर दिखाई देता है। देश के पश्चिमी तट पर 760 किलोमीटर का सफर कराती है कोंकण रेल। गोवा में कोंकण रेल 105 किलोमीटर का सफर करती है जिसमें जुआरी नदी पर बना पुल अद्भुत है। आप अगर कोंकण रेल के सौंदर्य का पूरा नजारा लेना चाहते हैं तो मुंबई से सुबह खुलने वाली किसी ट्रेन में सफर स्लीपर क्लास से करें। इसके लिए जनशताब्दी या मंडोवी एक्सप्रेस का चयन कर सकते हैं।

गोवा में जुआरी नदी पर पुल। 
कोंकण के रेल मार्ग पर 2000 पुल और 91 सुरंगे हैं। कोंकण रेल मार्ग पर कारबुडे सुरंग सबसे लंबी है। ये 6.5 किलोमीटर लंबाई की है। ट्रेन को 30 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से इस सुरंग को पार करने में 12 मिनट से ज्यादा वक्त लग जाता है। कर्नाटक में कारवार भटकल उडुपी जैसे शहरों से गुजरती हुई कोंकण रेल मार्ग पर ट्रेन सुहाने सफर को तय करती हुई ट्रेन पहुंच जाती है कर्नाटक के मंगलोर। मंगलोर यानी ऐश्वर्या राय बच्चन के बचपन का शहर।


कोंकण रेल का पहला रेलवे स्टेशन  - रोहा (महाराष्ट्र)
आखिरी रेलवे स्टेशन – ठोकुर (कर्नाटक) 

कुल रेलवे स्टेशन – 59 
कुल दूरी 760 किलोमीटर
बड़े पुल 179 छोटे पुल 1819
कुल तीखे मोड 320 
कुल सुरंगे -91

प्रमुख स्टेशन – वीर, खेड, चिपलूण, संगमेश्वर, रतनागिरी, राजापुर, वैभववाडी रोड, कनकावली, सिंधुदुर्ग, कुदल, सावंतवाडी रोड। 

गोवा में आने वाले प्रमुख स्टेशन - पेरनेम (गोवा) थिविम (गोवा) वेरना, करमाली, मडगांव (गोवा), केनकोना, 

कर्नाटक में आने वाले प्रमुख स्टेशन - कारवार, अंकोला, होनावार, भटकल, कुंदापुरा, उडुपी, ठोकुर।


रोरो सेवा -  रोरो मतलब रोल ऑन रोल ऑफ। इसमें माल से लदे ट्रक सीधे रेलवे वैगन पर लोड कर दिए जाते हैं। उनका पड़ाव आने पर उन्हें फिर रेलवे से सीधे सड़क पर उतार दिया जाता है।यह अनूठी सुविधा कोंकण रेलवे में उपलब्ध है। 26 जनवरी 2014 को कोंकण रेल सेवा ने सफल 16 साल पूरे कर लिए हैं।

कोंकण रेलवे की अधिकृत वेबसाइट - http://konkanrailway.com/english/

-    - विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com

( KONKAN RAIL, GOA, RATNAGIRI, CHIPLUN) 
  

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