Thursday, September 20, 2012

रामकरण की वो बहकी बहकी बातें (21)

( चंबल 21)
गांव का सबसे रोमांटिक चरित्र है रामकरण। लेकिन कोई उसे असली नाम से नहीं बुलाता। गांव लोग उसे करना कहकर बुलाते हैं। गांव का सबसे मस्त आदमी। जबभी हमसे मिलता है बहकी बहकी बातें करता है। नारी सौंदर्य की और उनके साहचर्य की बातें सुनाता है। अपनी लुगाई के साथ बीते नीशीथ वेला में हुए काम केलि के प्रसंगों को स्थानीय भाषा में रस लेकर हमें सुनाता है। इसके बाद हमें सलाह देता है। क्यों पढ़ाने लिखाने में लगे हो तुम भी शादी कर लो और मौज करो।

हम भोलेपन से कहते हैं तुम्ही करा दो हमारी शादी। तब वह कहता है हमारी जात नहीं है तुम्हारी उमर की कोई कुआंरी लड़की। तुम्हारे लिए तो मीणाओं में या बनजारों की बस्ती से कोई लड़की ढूंढनी पड़ेगी। वहीं कोई सुघर लड़की देखी जाएगी।

करना अक्सर कहेगा। हमारे साथ चलो बनजारों की बस्ती में। वहां तुम्हें देशी दारू पिलाएंगे। हम पूछते हैं तुम दारू क्यों पीते हो। वह बोलता है साब दारू पीने के बाद खूब आनंद आवे है। उसके बाद हम घर जाकर अपनी लुगाई को खूब पीटे हैं...करना तुम दारू पीकर अपनी लुगाई को पीटते हो...हम किसको पीटेंगे...तब करना कहता है देखो मास्टर अगली बार गांव आना तो अपनी लुगाई को भी अपने साथ लेकर ही आना।

खट्टा पाणी मतलब क्या... गांव के लोग दारू को खट्टा पाणी कहते हैं। एक बार गांव के एक बुजुर्ग ने मुझसे पूछ दिया खट्टो पाणी पीते हो...हमने समझा इसका मतलब होता होगा नींबू पानी। मैंने ना समझी में हां कर दी। बाद में जब हमें और दिग्विजय भाई को इसका मतलब समझ में आया तब हमने अपनी गलती सुधारी। हमने कहां नहीं हम तो इसके खिलाफ लोगों को समझाने की कोशिश में लगे हैं कि शराब बुरी चीज होती है। यह पूरा घर बरबाद कर देती है। लेकिन गांव के लोगों को इतने कम समय में हम शराब के खिलाफ कम ही समझा सके।

-    ----  विद्युत प्रकाश मौर्य  - vidyutp@gmail.com
(( CHAMBAL, RAMKARAN, WINE, DIGVIJAY SINGH )

-     चंबल संस्मरण को शुरुआत से पढ़ने के लिए यहां पहुंचे। 

No comments:

Post a Comment