Tuesday, September 18, 2012

मांगीलाल की पांच गज की पगड़ी (19)

( चंबल 19) 
एक दिन मांगीलाल से मैंने पूछा इतनी गर्मी में आप लोग सिर पर पांच गज की पगड़ी कैसे बांधे रहते हो। उसने तुरंत सवाल किया तुम कुरता क्यों पहनते हो। बाद में हमे एहसास हुआ पगड़ी उनकी प्रतिष्ठा का सूचक है। चिलचिलाती गर्मी हो, भले ही बदन पर कोई कपड़ा न हो...पांव में कोई चप्पल या जूते न हो...लेकिन सिर पर पांच गज की रंग-बिरंगी पगड़ी जरूर होती है। ये पगड़ी न सिर्फ आचार व्यवहार संस्कारों से जुड़ी है बल्कि ये गर्मी से बचाती भी है। संकट में कई और काम भी आ सकती है। भले ही ये इलाका मध्य प्रदेश में पड़ता है पर कीर के झोपड़ा में रहने वालों पर प्रभाव है राजस्थानी संस्कृति का।

गांव के सारे बुजुर्ग लोग पगड़ी जरुर पहनते हैं। बच्चे थोड़े बड़े होते ही धोती बांधने लग जाते हैं। महिलाएं साडी पहनती हैं। वे गांव में घूंघट नहीं काढ़तीं। लड़कियां ज्यादा तरह लहंगा, कब्जा ( चोली) और चुनरी।

दांतों में लगाते हैं सोना 
महिलाओं को सोने से लगाव है। सोने से लगाव पुरूषों को भी है। लेकिन गांव के लोग सोने के गहने कम ही बनवाते हैं। सरसों बेचने के बाद नकदी मिलती है। इस नकदी से सोना लगवाते हैं दांतों में। जी हां दांतों में सोना। सुनार खास किस्म के सोने के तार तैयार करता है और उन्हें दांतों में टांक देता है। 

गांव के लोगों को तर्क है कि दांत में सोना लगवाने से कोई उन्हे चुरा नहीं सकता। ये सोना हमेशा हमारे साथ रहता है। गांव की तमाम महिलाओं के अलावा कई पुरूष भी सोना लगवाए दिखाई दिए दांतो में। क्या दांतों में सोना लगवाने से दांतों की सफाई में कोई परेशानी नहीं होती। गांव वालों का तर्क था कोई परेशानी नहीं होती। जब किसी का देहांत होता है तब क्या करते हैं। क्या दांतों में लगा हुआ सोना निकाल लेते हैं। हां इतना महंगा सोना निकाल ही लेते होंगे।
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---- विद्युत प्रकाश मौर्य   
(( CHAMBAL, MANGILAL, TURBAN, GOLD ) 

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