Wednesday, October 10, 2012

मुगल सल्तनत की कहानी सुनाता लालकिला

लालकिला यानी सदियों से इतिहास के पन्नों में कई तरह के उतार चढाव का साक्षी। यमुना नदी के किनारे बना ये किला तभी दिखाई देता है जब आपकी ट्रेन पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन में प्रवेश करने वाली होती है। अगर कोई दिल्ली घूमने आता है तो वह लाल किला जरूर जाता है। दिल्ली का मतलब ही लाल किला है। हमारी आजादी का प्रतीक। तभी तो देश आजाद होने पर लाल किले पर तिरंगा फहराया गया था। आज भी हर 15 अगस्त को लालकिले के प्राचीर से प्रधानमंत्री तिरंगा फहराते हैं। साल 2003 तक लालकिला भारतीय थल सेना के अधीन था पर अब यह संस्कृति मंत्रालय के अधीन है। लालकिला अब यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर दर्जा प्राप्त साइट है।  

शाहजहां की अनुपम कृति - 1638 में शाहजहां ने आगरा से दिल्ली राजधानी स्थानांतरित की थी, उससे पहले लालकिला का निर्माण कराया गया था। 1639 में लालकिला का निर्माण शुरू हुआ और अगले नौ साल में बनकर तैयार हुआ। निर्माण में धौलपुर के पास बारी से लाए लाल पत्थरों का इस्तेमाल किया गया। महलों के अंदर संगमरमर का बहुत प्रयोग किया गया है। लालकिला 2.4 किलोमीटर की चारदीवारी में बना हुआ है। किले का निर्माण 254.67 एकड़ क्षेत्रफल में हुआ है। 
  
लालकिला परिसर में स्थित खास महल 
लालकिला के दो प्रवेश द्वार हैं एक दिल्ली गेट और दूसरा लाहौर गेट पर आप प्रवेश लाहौर गेट से करते हैं। अंदर जाने पर आपको मुगल बादशाहों की शाही जीवन शैली के बारे में पता चलता है। लालकिला घूमने के लिए आपको किसी गाइड की जरूरत नहीं है। यहां पर आडियो में नैरोकास्टिंग गाइड किराये पर मिलती है। यह हिंदी, अंग्रेजी और कोरियन भाषा में उपलब्ध है। ऐसा प्रतीत होता है कि यहां कोरियाई सैलानी बड़ी संख्या में आते हैं।  


लालकिले के अंदर प्रवेश करने पर मेहराबदार तोरणपथ, जिसे छाता चौक कहते हैं,  से होकर गुजरने के बाद पश्‍चिमी द्वार से नौबत-या नक्कार खाना पहुंच जाते है। यहां दिन में पांच बार संगीत बजता था और जो दीवाने-ए-आम में प्रवेश के लिए प्रवेश द्वार था। इसकी ऊपरी मंजिल में आजकल इंडियन वार मेमोरियल म्यूजियम है।  सामने विशाल दीवने-ए-आम (आम जनता के लिए हाल) एक आयताकार हॉल है जिसके तीन लंबे गलियारे हैं।
लालकिला के हयातबख्श बाग में स्थित जफर महल। 


लालकिला के अंदर आप दीवाने-ए-खास (खास लोगों के लिए), तस्‍बीह खाना, (व्यक्तिगत प्रार्थनाओं के लिए कक्ष) ,  हमाम (स्नानघर)  देख सकते हैं। हमाम के पश्चिम में मोती मस्जिद है जिसे बाद में औरंगजेब (1658-1707 ) द्वारा बनवाया गया था। मस्जिद के उत्तर में स्थित है हयात बख्श बाग (जीवन देने वाला बाग) हयात-बख्श-बाग के मध्य में स्थित तालाब के मध्य भाग में लाल पत्थर का मंडप है जिसे जफर महल कहते हैं और इसे 1842 में बहादुरशाह -2 ने बनवाया गया था। 

मीना बाजार - आप पूरा देश घूम कर लौटे हैं तो भी लालकिले को देखना पूरे देश को देखने जैसा है। लाल किला के अंदर एक छोटा सा मीनाबाजार है। यहां देश के कोने कोने की बनी चीजें मिलती हैं। कीमतें वाजिब हैं, यहां से आप यादगारी के तौर पर खरीददारी कर सकते हैं।   

लालकिले के बगल में सलीमगढ़ का किला भी है जिसे शेरशाह के बेटे शहजादा सलीम ने बनवाया था। लालकिला और किला सलीमगढ़ कभी आजादी के दीवानों के लिए जेल खाना भी बने थे। पर अब ये हमारी आजादी के प्रतीक चिन्ह हैं।  



लालकिला में टी हाउस – पूरा लालकिला घूमते हुए जब आप मोती मसजिद हयातबख्श बाग को पार करके अंत में पहुंचते हैं तो आता है टी हाउस। इसका निर्माण लालकिला के बहुत बाद में हुआ है। वास्तव में ये टी हाउस ब्रिटिश कालीन है। ब्रिटिश सरकार के उच्चाधिकारी यहां बैठकर चाय की चुस्की लिया करते थे।
लालकिला परिसर स्थित टी हाउस 
 मौलवी जफर हुसैन अपनी पुस्तक मोनुमेंट्स ऑफ दिल्ली में इस टी हाउस की चर्चा करते हैं। टी हाउस से पहले यहां राजपरिवार के खास लोगों का निवास हुआ करता था। हालांकि आजकल यहां आपको चाय नहीं मिलेगी। पर यहां पहुंचकर आप लालकिले के हयातबक्श बाग की हरियाली का नजारा कर सकते हैं।

लाइट एंड साउंड शो - हर शाम को सात बजे के बाद से लालकिला में लाइट एंड साउंड शो होता है जिसमें इतिहास को ध्वनि एवं प्रकाश के माध्यम से सुनाया जाता है। इसमें शामिल होना एक अलग किस्म की अनुभूति है। यह शो हिंदी और अंगरेजी में होता है। यहां अंगरेजी और हिंदी में अलग अलग शो होते हैं जिनका समय अलग अलग है। अंगरेजी शो का समय रात 9 से 10 बजे का है। जबकि हिंदी शो शाम को 730 बजे आरंभ होता है। ये शो भारत सरकार के पर्यटन विकास निगम की ओर से संचालित किया जाता है। शो का टिकट 80 रुपये का है। 



प्रवेश टिकट -  सालों भर हर रोज लाल किले में सैलानियों की भीड़ देखने को मिलती है। लाल किले में प्रवेश के लिए आजकल 15 रुपये का टिकट है। प्रवेश टिकट के पास लगेज जमा करने के लिए क्लाक रूम की सुविधा भी है जिसके लिए 2 रुपये का टिकट है। प्रवेश टिकट में किले के अंदर स्थित दो संग्रहालयों का भी टिकट शामिल है।  


कैसे पहुंचे - लाल किला के ठीक सामने चांदनी चौक के एक कोने पर है अति प्राचीन गौरी शंकर मंदिर। तो लाल किले के बाहर से आपके दिल्ली से दूर कहीं भी जाने के लिए टूरिस्ट बसें मिल जाएंगी। निकटम मेट्रो स्टेशन चांदनी चौक है। पूरी दिल्ली भले ही बदल रही हो लेकिन लाल किले के आसपास अभी पुरानी दिल्ली खूशबू आती है।  

-   - विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com ( IT IS WORLD HERITAGE SITE, listed in 2007 ) 

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