Saturday, October 13, 2012

गोलकुंडा के किले की चढ़ाई

गोलकुंडा के किले से हैदराबाद का नजारा...
आजादी से पहले देश में दो हैदराबाद हुआ करते थे। एक सिंध हैदराबाद ( अब पाकिस्तान में ) दूसरा हैदराबाद डेक्कन ( दक्खन) । हैदराबाद डेक्कन शहर के बाहरी इलाके में चारमीनार से 13 किलोमीटर दूर है गोलकुंडा का किला। आठ किलोमीटर के के दायरे में फैले इस किले पर चढ़ाई करना किसी पहाड़ पर चढ़ाई करने से कम नहीं है। गोलकुंडा का किला घूमने के लिए पूरा एक दिन का समय चाहिए। हमने एक दिन का समय निकाला। हमारे साले रवि, पत्नी माधवी और दो साल के अनादि साथ थे।

किले के शिखर तक पहुंचने के लिए 600 से ज्यादा सीधी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। किला तकरीबन 400 फीट ऊंचा है। इस बीच रास्ते में कई अलग अलग तरह के ऐतिहासिक भवन हैं। किले की सबसे ऊंचे बुर्ज पर चढ़ने के बाद यहां हमेशा ठंडी ठंडी तेज हवाएं चलती रहती हैं। वहां से पूरे हैदराबाद शहर का नजारा ऐसा लगता है मानो ईश्वर ने अपनी कूची से कोई शानदार की पेंटिंग रच डाली हो। किले की इस ऊंचाई से 30 किलोमीटर दूर तक भी नजारा देखा जा सकता है। यानी दुश्मन पर चौकस निगाहें रखने के लिए मुफीद जगह। 

किले के टॉप पर एक कैफेटेरिया भी बना है। हालांकि किले की ऊंचाई पर चढ़ने के बाद पता चला कि हमने गलत रास्ता चुन लिया था। चढ़ाई का रास्ता लंबा वाला है जिसमें कम सीढ़ियां हैं। उतरने के लिए सीढ़ियों वाला रास्ता चुनना चाहिए था।

किले के साथ कई ऐतिहासिक कथाएं जुड़ी हैं। वारांगल के काकातीय राजाओं ने इसे बनवाया था तब यह मिट्टी का किला था। मुहम्मद शाह और कुतुब शाह के जमाने में इसे विशाल चट्टानों से बनवाया गया। देश के सबसे बड़े और सुरक्षित किलों में से एक गोलकुंडा बहमनी के शासकों के भी अधीन रहा। किसी जमाने में गोलकुंडा के इलाके के हीरे के खान से कोहेनूर हीरा निकला था। बताया जाता है कि ये पूरा किला एक बड़े ग्रेनाइट के पहाड़ पर बना है। इसके बगल में मूसी नदी बहती है।
-   -  विद्युत प्रकाश मौर्य
( ( GOLKUNDA FORT, HYDRABAD, TELANGANA ) 

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