Tuesday, October 2, 2012

मेरी पहली जेल यात्रा - WENT TIHAR JAIL

फरवरी 1999 का समय। उल्टा पुल्टा वाले जसपाल भाटी ने एक फिल्म बनाई माहौल ठीक है। पंजाबी की कॉमेडी फिल्म एक भ्रष्ट पुलिस वाले की रोचक कहानी थी। जसपाल भाटी ने इस फिल्म का प्रेस प्रिव्यू व प्रिमियर शो रखा दिल्ली के तिहाड़ जेल में। तब मैं कुबेर टाइम्स दिल्ली में फिल्म टीवी बीट पर रिपोर्टिंग करता था। सो मैं भी इस फिल्म के शो के लिए आमंत्रित था। हमें आईटीओ से एक बस से तिहाड़ जेल ले जाया गया। तकरीबन 46 पत्रकारों की टीम तिहाड़ जेल के छह नंबर जेल के दरवाजे पर पहुंची। वहां हमसे पहले से मौजूद थी फिल्म की पूरी टीम।


 जेल में अंदर जाने से पहले सारी औपचारिकताएं पूरी हुईं। हम सबके नाम लिखे गए जेल के रजिस्टर में। जैसा की सुना था कि जेल जाने वालों के हाथ पर मुहर लगाई जाती है। हमारे हाथ पर भी मुहर लगी। तभी जसपाल भाटी मेरे पास आए। बोले - भाई साहब आप जेल के अंदर जरा सावधान रहना। मैंने पूछा क्यों- देखना कहीं आप जेल के अंदर ही न रह जाओ और बाहर निकलते समय कोई आपसे मिलते जुलते चेहरे वाला कैदी बाहर आ जाए।
तो ये था उनके ह्यूमर का एक नमूना। दोपहर में हम पहुंचे जेल के अंदर। तैयारी चल रही थी 600 कैदियों को फिल्म दिखाई जाने वाली थी। ज्यादातर कैदी हत्या और उम्र कैद वाले थे। मेरी इस दौरान कुछ कैदियों से बात हुई। एक युवा ने कहा हत्या किसी और ने की थी मेरा नाम आ गया। एक इलाहाबाद के निहायत पढ़े लिखे कैदी मिले। बोले जेल में भी शिक्षक हूं। पढ़ाता हूं।
खैर प्रेस कान्फ्रेंस शुरू हुई। फिल्म की अभिनेत्री चांदनी तूर ( जालंधर के पास मदार गांव की ) भी थीं। वही चांदनी जिन्होंने बाद में सहारा समूह के सीमांतो राय से विवाह किया। 
इस फिल्म में राज बब्बर, कुलभूषण खरबंदा के अलावा क्रिकेटर युवराज के पिता योगराज सिंह ने भी अभिनय किया था। जेल  में ही हुई प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान मैंने भी एक सवाल दागा। 
मेरा सवाल – जसपाल भाटी से नहीं सविता भाटी से है..अक्सर आप लोग उल्टा पुल्टा करते हो। हर शो में साथ रहते हो। ये बताओ आ दोनों में जब लड़ाई होती है तब कौन भारी पड़ता है। 

जसपाल भाटी ने माइक छीन लिया। सविता भाटी को जवाब नहीं देने दिया। बोले देखो ...ये पत्रकार हमलोगों में लड़ाई कराकर ही मानेंगे। ( फिर ह्यूमर)  इसके बाद अगले तीन घंटे हमने देखी फिल्म माहौल ठीक है। छह सौ कैदियों के साथ। सबने खूब मजा किया। 

हमने खाई जेल की रोटी - और जैसा कि आमंत्रण पत्र में लिखा था। रात आठ बजे हमें न्योता था। जेल की रोटी खाने का। कैदियों ने ही बनाई थी रसोई। लेकिन खाने में रोटी, दाल, सब्जी, चावल, मिठाइयां सब कुछ थी। ये थी हमारी एक दिन की जेल यात्रा। बाद में मेरे एक पत्रकार मित्र पुष्कर पांडे ने बताया कि जेल की रोटी की बड़ी महिमा है।

कई लोगों को ज्योतिषी बता देते हैं...तुम्हारा जेल जाने का योग है। फिर लोग जेल से चोरी चुपके रिश्वत देकर जेल की रोटी मंगाकर घर में ही खाते है, जिससे जेल जाने का पाप कट जाए। खैर मुझसे कभी कोई पूछ बैठता है कि कभी जेल गए हो तो मेरा जवाब होता है, हां जा चुका हूं। तो जेल की रोटी नसीब हुई जसपाल भट्टी की बदौलत।
25 अक्तूबर 2012 को जसपाल भट्टी नहीं रहे। इस बहुमुखी प्रतिभा वाले फिल्मकार का एक सड़क हादसे में 57 साल की आयु में ही निधन हो गया। एक बार फिर उनके साथ जेल में बिताए वक्त खूब याद आए। 
--- विद्युत प्रकाश मौर्य

(TIHAR JAIL, DELHI, JASPAL BHATI, CHANDNI TOOR, MAHAUL THEEK HAI ) 

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