Sunday, September 2, 2012

श्योपुर में है शेरशाह सूरी का किला (4)

श्योपुर शहर। मुरैना से 150 किलोमीटर तो ग्वालियर से 200 किलोमीटर दूर है। मानो देश से में कहीं से भी दूर एक अलग दुनिया हो। कहीं से भी पहुंचना मुश्किल है। एक तरफ सीमा राजस्थान से लगती है। सवाई माधोपुर शहर नजदीक है। लेकिन चंबल नदी पर पुल नहीं होने के कारण वहां भी पहुंचना मुश्किल। ( हालांकि अब चंबल नदी पर पुल बन चुका है।) श्योपुर मुरैना जिले की तहसील थी तब। लोगों की इसको अलग जिला बनाने की मांग पुरानी है। ( अब श्योपुर मध्य प्रदेश का स्वतंत्र जिला भी बन चुका है ) 
कैलाश पाराशर की इतिहास में गहरी रुचि है। 

श्योपुर में हमारी मुलाकात कैलाश पाराशर से हुई। कैलाश पाराशर सामाजिक कार्यकर्ता होने के साथ ही इतिहास में गहरी रुचि रखने वाले हैं। खासकर स्थानीय इतिहास और समाज में न सिर्फ रुचि रखते हैं बल्कि उसके उन्यन और संवर्धन के लिए लगातार सक्रिय रहते हैं। उनका साथ देते हैं जय सिंह जादोन और आदित्य चौहान जैसे सक्रिय लोग। श्योपुर में महात्मा गांधी सेवा आश्रम के दफ्तर में हमें रात को ठहराया गया। संपूर्ण साक्षरता एवं ग्राम स्वराज्य अभियान के बारे में जानकारी दी गई।

शाम को कैलाश भाई हमें शहर घूमाने ले गए। कस्बाई बाजार के अलावा श्योपुर में एक विशाल किला है। शहर से तकरीबन एक किलोमीटर की चढ़ाई चढ़ने के बाद हमलोग किले में पहुंचे। किला अपनी स्थापत्य कला में भव्यता लिए हुए है। इस किले के बारे में कैलाश भाई ने बताया कि इस पर शेरशाह सूरी का कभी अधिपत्य रहा था। शेरशाह का किला और श्योपुर में। मेरे लिए आश्चर्य की बात थी। क्योंकि शेरशाह यानी हमारे सासाराम के शेरशाह और उसका जीता हुआ किला श्योपुर में। 1542 में शेरशाह सूरी ने अपने विजय अभियान के तहत श्योपुर को जीत लिया था। शेरशाह सूरी द्वारा किले में बनवाई गई इदगाह देखी जा सकती है। इसके बाद शेरशाह सूरी के पुत्र इस्लाम शाह ने अपने सिपहसलार का विशाल मकबरा भी किले में बनवाया। हालांकि कुछ लोग इस किले को शेरशाह के काल से भी काफी पुराना बताते हैं। किले के अंदर जैन मंदिर है जो 11वीं सदी का है। 1809 में यह किला ग्वालियर के शासक दौलतराव सिंधिया के अधीन आ गया। इसके बाद देश की आजादी तक श्योपुर क्षेत्र सिंधिया की रियासत का हिस्सा रहा। सिंधिया राज घराने द्वारा किले में दीवाने आम, दरबार हॉल और शाही डाक बंगला आदि का निर्माण कराया गया। अब किले के अंदर दीवाने आम में श्योपुर जिले की सहरिया जन जाति पर आधारित संग्रहालय का निर्माण कराया गया है।

किले के अंदर लोगों ने बनाए घर  
श्योपुर का किला कहने को बाहर से तो ये किले जैसा दिखाई देता है, पर इस किले के अंदर काफी हद तक कब्जा हो चुका है। किले के अंदर लोगों ने कालोनियां बना ली हैं। किले के बाउंड्री के अंदर लोगों ने अवैध रूप से घर बना लिए हैं।
कैलाश भाई ने बताया कि देश में शायद ये एक मात्र विशाल किला होगा जो कब्जे का शिकार है। कैलाश भाई किले के सबसे उपर वाले हिस्से पर एक छोटा सा संग्रहालय बनवाने की कोशिश में हैं। साथ ही वे चाहते हैं कि किसी तरह इस किले के वजूद को बचाए रखा जाए। किले के अंदर एक सुंदर मंदिर भी है। 


शिवपुर बदलकर हुआ श्योपुर - कैलाश पाराशर बताते हैं, श्योपुर शिव की नगरी है। अजमेर से श्योपुर आए गौर राजा जो शिव भक्त थे उन्होंने एक मिट्टी के टीले पर किले का निर्माण करवाया। उसे शिव पहाड़ नाम दिया। अपनी रियासत को शिव पहाड़ रियासत और राजधानी का नाम शिवपुर रखा। बाद में शिव पहाड़ का अपभ्रंश नाम सिपाड़ हो गया और राजधानी श्योपुर कहलाने लगी। यहां शिव को ग्रामीण भाषा में श्यो कहा जाता है इसी से यह नाम बदल गया। श्योपुर को शिव नगरी यू ही नहीं कहा जाता श्योपुर क्षेत्र में शिव जी के अनगिनत मंदिर है। 

कैलाश पाराशर कहते हैं, श्योपुर वासियों को 12ज्योतिर्लिंगों के दर्शन की जरूरत नहीं है, क्योंकि यहां 12ज्योतिर्लिंग स्वयं विराजमान हैं। यहां नवग्रह मंदिर में 12ज्योतिर्लिंग एक ही योनि में स्थापित हैं। पारखजी के बाग में एक प्राचीन शिव मंदिर है जहां पंचमुखी शिव परिवार सहित विराजित है। सोनेश्वर मंदिर सोहन घाट पर प्राचीन पर विकसित होता मंदिर है। मानपुर मानेश्वर महादेव के नाम पर बसा नगर है यहां से 6किलोमीटर दूर त्रिवेणी संगम पर रामेश्वर है। वहीं पालीवालों का एक पुराना शिव मंदिर है। बड़ोदा में तालाब के किनारे जहाज की तरह चन्द्र सागर पर बने शिव मंदिर का निर्माण राजा विजय सिंह ने करवाया था पहाडलीमें भी पार्वती के किनारे एक मंदिर का निर्माण कराया गया है। राजा उत्तानपाद की नगरी कही जाने वाले ग्राम उतनबाड़ में ध्रुवकुंड के पास एक शिव मंदिर स्थित है। 

-    -   विद्युत प्रकाश मौर्य  ( SHEOPUR, FORT, SHERSHAH )


1 comment: