Monday, October 8, 2012

ये पराठे वाली गली है...


चांदनी चौक की ये पराठा गली है। बाबू राम देवी दयाल पराठे वाले की छठी पीढ़ी अब यहां पराठे की दुकानें चलाती है। चांदनी चौक से गुरुद्वारा शीशगंज की ओर आगे बढ़ने पर कटरा शहंशाही के ठीक आगे है पराठे वाली गली। पंजाबी अंदाज में इसे गली पराठा कहते हैं। किसी जमाने में एक पराठे वाली दुकान हुआ करती थी अब तीन दुकाने हैं।
 मीनू सबका एक जैसा ही है। आलू पराठा 30 रुपये पनीर पराठा 40 रुपये। मेथी पराठा, गोभी पराठा, मिक्स पराठा। और न जाने कितने तरह के पराठे। यहां का खास है खुरचन पराठा। दिल्ली के कोने कोने से शापिंग करने चांदनी चौक आने वाले लोग पराठे गली में पराठे का स्वाद लेने जरूर आते हैं। तंग गली में पराठे की दुकानों पर बैठने की जगह पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।
दुकान के बाहर देसी घी की कड़ाही में तला जाता है पराठा। पराठे की थाली में पेठा की सब्जी, आलू की सूखी सब्जी, रसे वाली सब्जी, मूली का अचार और मीठी चटनी ये सब कुछ मिलता है पराठे की थाली में। हालांकि थाली में कम से कम दो पराठे लेना जरूरी है। हालांकि कहते हैं इसे पराठा हैं लेकिन ये परंपरागत पराठे की तरह तवे पर सेंका नहीं जाता है। बल्कि ये पराठा घी में तला जाता है। यानी ये है तला हुआ पराठा। ( या फिर पूड़ी )
बाबू राम पराठे वाले की दुकान में कभी पंडित जवाहर लाल नेहरु, इंदिरा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री जैसे लोग पराठे खाने आ चुके हैं। 
उनकी ब्लैक एंड ह्वाइट तस्वीरें इन पराठे की दुकानों में लगी हैं। बदलते वक्त के साथ पराठों का स्वाद नहीं बदला है। हालांकि आपको इन पराठे वाली दुकानों का क्राकरी को देखकर थोड़ी नाराजगी हो सकती है। हालांकि अब ये पराठे वाली नई पीढ़ी अपना विस्तार करते हुए दिल्ली के मॉल्स के इटिंग ज्वाएंट्स तक पहुंच गई है लेकिन गलियों का स्वाद अब भी कायम है।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य 
( ( CHANDNI CHAWK, PARATHA WALI GALI, FOOD ) 

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