Saturday, October 20, 2012

दुनिया भर का अनूठा संग्रह है सलारजंग म्यूजियम में


एक लड़की को देखने के लिए लड़के वाले उसके घर आए हैं। लड़की साजो श्रंगार कर तैयार होती है। वह अपने भाइयों के बीच अपने भावी दुल्हे को देखने के लिए पहुंचती है। इस दौरान वह कैसी शरमाई और सकुचाई सी होती है। इसका खूबसूरत चित्रण एक कलाकार ने किया। सफेद संगमरम पर बनी ये नायाब मूर्ति एक ही पत्थर से बनी है। मूर्ति इतनी सुंदर है कि आप एक बार देखें तो काफी देर तक नजर नहीं हटती। नवाब ने अपनी विदेश यात्रा के दौरान ये मूर्ति पसंद आ गई। नवाब ने महंगी कीमत देकर ये मूर्ति खरीदी और इसे मंगाने में भी काफी राशि खर्च की। इस नयनाभिराम मूर्ति को हैदराबाद के सलारजंग म्यूजियम में देखा जा सकता है।

हैदराबाद शहर के बीचों बीच मूसी नदी के किनारे स्थित है सलारजंग म्यूजियम। ये देश का सबसे बडा संग्रहालय है जहां निजी संग्रह संकलित है। वैसे ये देश का तीसरा बड़ा संग्रहालय है। यहां हैदराबाद के निजामके निजी संग्रह का बहुत बड़ा संग्रह देखा जा सकता है। संग्रहालय देखने के लिए आपको पूरा एक दिन का समय निकालना पड़ेगा। संग्रहालय के साथ यहां समृद्ध पुस्तकालय भी है।

सलारजंग 3 का संग्रह -  हैदराबाद के सातवें निजाम मीर यूसुफ अली खान बहादुर या ( सलारजंग तीन ) ने दुनिया भर के देशों से अनूठी कलाकृतियों का संग्रह मंगाने में काफी राशि खर्च की। 2 मार्च 1949 को अपने निधन तक वे अपने संग्रहालय को समृद्ध करने में लगे रहे। उनके द्वारा किए गए 48 हजार वस्तुओं के नायाब संग्रह को इस म्यूजियम में देखा जा सकता है। किसी निजी व्यक्ति द्वारा किया गया इतना बड़ा संग्रह और कहीं भी नहीं मिलता।
 संग्रहालय में निजाम परिवार के हीरे जवाहरात के ज्वेलरी का बड़ा कलेक्शन देखा जा सकता है। अरबों रुपये के इस कलेक्शन को 1995 में संग्रहालय में शामिल किया गया। संग्रहालय में नायब पेंटिंग और मूर्तियों का कलेक्शन तो है ही एक गैलरी में किस्म किस्म की घड़ियां एक ही जगह देखी जा सकती हैं। संग्रहालय में भारतीय कला का नहीं बल्कि दुनिया के अलग अलग देशों के की मूर्ति कला और पेंटिंग का नमूना एक ही जगह देख सकते हैं।


कुल 38 दीर्घाएं हैं सलारजंग म्युजियम में। जिनमें हाथी-दांत की बने सामानों की दीर्घा, सजावट के सामान, अलग अलग तरह के हथियार और संगीतमय घड़ियां लोगों का मनमोह लेती हैं। यहां अंदर कैमरा ले जाने पर रोक है। अब सलारजंग म्यूजियम में 50,000 से ज्यादा पुरातात्विक वस्तुओं का डिजिटाइजेशन हो गया है। 

16 दिसंबर 1951 को सलारजंग म्यूजियम को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु ने इस संग्रहालय को राष्ट्र को समर्पित किया।  मूसी नदी के किनारे स्थित संग्रहालय की भव्य इमारत 1968 में बनी है। सन 2000 में इसमें दो और इमारतें जोड़ी गई हैं। संग्रहालय समय समय पर वर्कशाप का भी आयोजन करता रहता है।

- विद्युत प्रकाश मौर्य

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