Friday, October 12, 2012

रेलगाड़ियों का इतिहास देखने यहां आइए...

रेल म्युजिम - जानकारी के साथ मौज- मस्ती भी।
छुक...छुक करती आई रेल....रेलगाड़ी ने डेढ़ सौ साल के इतिहास में भारत में बहुत बड़ा बदलाव देखा है। आज भारतीय रेल का जितना बड़ा नेटवर्क है, उसके विकास की कहानी और भी रोचक है। रेलगाड़ी पर न जाने कितने गीत बने हैं और कितनी कहानियां लिखी गई हैं। पर भारतीय रेल ने रेलवे की इस विकास यात्रा को एक जगह संजोने के लिए नई दिल्ली के चाण्क्यापुरी में नेशनल रेल म्यूजियम बनाया है। कई एकड़ में फैले इस रेल म्यूजियम में आप भारतीय रेल के पूरे इतिहास को अपनी आंखों के समाने देख सकते हैं। सौ साल पुराने इंजन, महाराजाओं के सैलून,  पुरानी पटरियां देख सकते हैं। साथ ही रेलवे जुड़ी दुर्लभ तस्वीरें और मॉडल भी यहां देख सकते हैं। खास तौर पर बच्चों के लिए रेल म्यूजियम बड़ी रोचक जगह है। बच्चे यहां आकर अपना ज्ञान तो बढ़ाते ही हैं वे खुश भी होते हैं ज्वाय ट्रेन में सफर करके।
 स्टीम लोकोमोटिव आरएमआर एफ 734


रेल म्यूजियम आकर बच्चे आनंदित तो होते ही हैं साथ ही वे अपना ज्ञान भी बढ़ते हैं पर यह बड़े लोगों के लिए कम रोचक जगह नहीं है। आज हम राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में  यात्रा करते हैं पर रेलगाड़ियों का यह सुविधायुक्त सफर कैसी कैसी पटरियों से सफर करके यहां पहुंचा है। यह सब कुछ यहां जाने को मिल सकता है। जब देश गुलाम था तो भारत में अगल अलग रजवाडो ने
अपनी-अपनी रेलगाड़ियां चलाई थीं।
हसंग - ए 885 - भारतीय उपमहाद्वीप में चला सबसे छोटा स्टीम इंजन

हैदराबाद निजाम का सैलून कैसा था उसकी रेलगाड़ी का इंजन कैसा था। नागपुर, जयपुर, भावनगर के राजाओं ने कैसी अपनी रेल चलाई यह सब कुछ आप यहां देख सकते हैं। थोड़ा अतिरिक्त शुल्क देकर आप राजाओं के सैलूनों का अंदर से भी नजारा कर सकते हैं। भारतीय उप महाद्वीप में चलने वाला सबसे छोटा भाप इंजन हसंग था, जो 1897 में बना था। इसे रेल संग्रहालय में देखा जा सकता है।

रेल म्यूजियम में आकर आप यह भी जान सकते हैं पहले कभी भारतीय रेल में थर्ड क्लास का भी डिब्बा हुआ करता था। उस डिब्बे में टॉयलेट नहीं होते थे। फिर उसमें टॉयलेट कैसे लगा इसकी कहानी रोचक है। आम म्यूजियम में थर्ड क्लास का डिब्बा भी देख सकते हैं।

-  --   विद्युत प्रकाश 

( ( RAIL MUSEUM, DELHI, STEAM HISTORY ) 


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