Thursday, October 4, 2012

खटखड़कलां -शहीद भगत सिंह के गांव में

खटखड़ कलां। यानी भगत सिंह के परिवार का गांव। कई लोग इसे शहीद भगत सिंह का गांव कहते हैं। काफी हद तक सही भी है। क्योंकि 1947 में देश आजाद होने के बाद शहीद भगत सिंह की माता जब तक जीवित रहीं, इसी गांव में रहीं। हालांकि भगत सिंह खुद कभी इस गांव में नहीं आए। जालंधर में रहते हुए हमें भगत सिंह के इस गांव में जाने का मौका मिला। जालंधर से पहले फगवाड़ा से नवांशहर जाने के मार्ग में नवांशहर से ठीक पहले आता है खटकड़ कलां गांव। भगत सिंह के शहादत दिवस 23 मार्च और उनके जन्म दिन पर सितंबर में यहां कई आयोजन होते हैं। ऐसे ही एक 23 मार्च को मैं व हमारे पत्रकार साथी विनय राय खटखड़ कलां गांव में पहुंचे। शहीद के गांव की धुलि को वंदन करने। 

चंडीगढ़ नवांशहर हाईवे पर भगत सिंह की याद में एक म्यूजिम बना है। सड़क से थोड़ी दूर चलकर जब आप गांव में प्रवेश करेंगे तो शुरूआत में भी भगत सिंह का जवद्दी घर आता है। इस घर की अभी भी मूल स्वरुप में संजो कर रखा गया है। वह खाट जिसपर शहीद की मां सोती थी। वह चक्की जिसे वे पीसा करती थीं। घर में भगत सिंह से जुड़ी कई और स्मृतियां भी हैं। भगत सिंह के भांजे जगमोहन सिंह ( लुधियाना) के अथक प्रयास से कई चीजों का संरक्षण किया गया है। खटखड़ कलां गांव में कई बुजुर्ग लोग मिले जिन्हें पंजाब माता की याद है।

हालांकि पंजाब में कई शहरों में तमाम दर्शनीय स्थल हैं। लेकिन खटखड़कलां एक ऐसा गांव जहां जाकर उसकी मिट्टी को नमन कर एक अलग किस्म की प्रेरणा मिलती है। कुर्बानियों से बलिदानों से मिली आजादी और विरसे को बचाने की। पंजाब सरकार ने जब एक नया जिला नवांशहर बनाया तब इसका नाम ही शहीद भगत सिंह के नाम पर रख देना चाहिए था।
-    -  विद्युत प्रकाश  - vidyutp@gmail.com  
( (KHATKAD KALAN, SHAHEED BHAGAT SINGH, PUNJAB) 

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