Tuesday, August 14, 2012

दार्जिलिंग टॉय ट्रेन की पटरियों पर बर्फी ((07))


साल 2012 की बेहतरीन फिल्मों में है बर्फी। रणबीर कपूर ने बर्फी में बिना बोले शानदार अभिनय किया है। कभी वे दादा राजकपूर की याद दिलाते हैं तो कभी शम्मी कपूर की। सबसे बड़ी बात कि बर्फी के ज्यादातर हिस्सों की शूटिंग दार्जिलिंग में हुई है। एक बार फिर हिंदी फिल्मों में दार्जिलिंग।

 इससे पहले आपने अराधना ( मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू ), परीणिता ( ये हवाएं गीत ) ,  झूमरू ( किशोर कुमार) में दार्जिलिंग देखा होगा। राजकपूर ने अपनी फिल्म मेरा नाम जोकर के पहले हिस्से में दार्जिलिंग हिमालयन रेल को दिखाया था। याद करें गीत...ऋषि कपूर के स्कूल के बंद होने और खुलने का हिस्सा। लेकिन दार्जिलिंग का सबसे खूबसूरत चित्रण श्वेत श्याम फिल्म हरियाली और रास्ता और हमराज में देखने को मिलता है। हरियाली और रास्ता में मनोज कुमार माला सिन्हा के बचपन का प्यार दार्जिलिंग की हरी भरी वादियों में पनपता है। तो हमराज में नीले गगन के तले धरती का प्यार पले...और भी तमाम खूबसूरत नजारे को समेटने की कोशिश हुई है। अब बर्फी के साथ आप दार्जिलिंग के हिमालयन ट्रेन के खूबसूरत नजारे देख सकते हैं। बर्फी में 1972 कहानी बताने के लिए खास तौर पर डीएचआर में स्टीम इंजन लगाया गया है।

फिल्म बर्फी में लोहे की पटरियों पर बर्फी की अपनी पहिए वाली ठेला गाड़ी दौड़ती नजर आती है। न सिर्फ रेलगाड़ी बल्कि दार्जिलिंग शहर की गलियां, होटल, घंटाघर सब कुछ है बर्फी में। कहानी दार्जिलिंग से कोलकाता जाती है फिर दार्जिलिंग लौटती है।

टॉय ट्रेन, चाय के बगानों की हरियाली के बीच एक मूक प्रेम की इतनी सुंदर कहानी को अनुराग बासु ने जिस खूबसूरती से कहने की कोशिश की है बर्फी एक सालों याद रखने लायक फिल्म बन गई है। एक ऐसी फिल्म जिसे न सिर्फ कुदरत के खूबसूरत नजारे बल्कि कहानी के लिहाज से भी आप दुबारा-तीबारा भी देख सकते हैं। साथ ही अपने बचपन के मरफी रेडियो के मुन्ना को भी याद कर सकते हैं।

-   ---- विद्युत प्रकाश मौर्य  
 ( DHR, DARJEELING HIMALAYAN RAILWAY )   
( डीएचआर 7) पहली कड़ी के लिए यहां जाएं 

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