Saturday, August 18, 2012

वास्तुकला का अदभुत नमूना - शेरशाह का मकबरा - सासाराम

बिहार का ऐतिहासिक शहर सासाराम। मुझे गर्व है कि इसी धरती पर मेरा जन्म हुआ। पर शहर की पहचान उस महान शासक से जुडी है जिसने देश को कई नायाब चीजें दीं और इतिहास के पन्नों पर अमर शासक बन गया। 
सासाराम शहर अपने शेरशाह के मकबरे के लिए जाना जाता है जो बिहार का प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है। ये मकबरा सासाराम रेलवे स्टेशन से महज दो किलोमीटर दूर है। अब तो शहर के बीचोंबीच ही आ चुका है। जी टी रोड पर मकबरा जाने के लिए प्रवेश द्वार भी बना है। इस द्वार से मकबरे की दूरी आधा किलोमीटर है। शहर के लोग मकबरे को रौजा भी कहते हैं। यह रौजा भारतीय पुरात्तव विभाग के संरक्षण में है। प्रवेश का टिकट 15 रुपये का है। ये सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहता है। 


शेरशाह का मकबरा एक विशाल सरोवर के बीचोंबीच बनाया गया है। मकबरे का निर्माण 16 अगस्त 1545 को पूरा हुआ।

बीच सरोवर में बने मकबरे में जाने का रास्ता बिल्कुल सामने से है जहां से इसका सौंदर्य निहारते हुए अप्रतिम आनंद आता है।  शेरशाह के मकबरे की सबसे बड़ी विशेषता इसकी वास्तु कला है। ये अष्टकोणीय बनावट का है। आमतौर पर मकानों में चार दीवारें होती हैं लेकिन इसमें आठ दीवारे हैं। इसका डिजाइन अलाइवाल खान ने तैयार किया था। मकबरा इंडो इस्लामिक वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है। मकबरे का मुख्य गुंबद 122 फीट ऊंचा है। हर रोज देशी विदेशी सैलानी इस मकबरे को देखने के लिए आते हैं। मुख्य भवन के अंदर शेरशाह और उसके परिवार के सदस्यों के मकबरे हैं।

शेरशाह के पिता का नाम हसन शाह था। वैसे तो उसके बचपन का नाम फऱीद था। उसका जन्म हरियाणा के नारनौल शहर में हुआ था। फरीद बाल्यकाल से ही अत्यंत बहादुर था। कहते हैं बचपन में ही उसने बहादुरी दिखाते हुए एक शेर के तलवार से दो टुकड़े कर डाले। तब से उसका नाम शेरशाह पड़ गया।


महान अफगान शासक शेरशाह ने महज पांच साल दिल्ली से देश पर शासन किया लेकिन देश को अदभुत चीजें दीं। आज हम जिस इनफ्रास्ट्रक्चर के विकास की बात करते हैं शेरशाह ने पूरे देश को एक करने के लिए पंजाब के पेशावार ( अब पाकिस्तान में) से लेकर कोलकाता तक देश की सबसे लंबी पक्की सड़क बनवाई। लोग कहते हैं कि ये सड़क सम्राट अशोक ने बनवाई थी लेकिन शेरशाह ने उसे पक्की कराया। अंग्रेजों ने उसकी मरम्मत कराई तो नाम दे दिया ग्रैंड ट्रंक रोड। लेकिन आजाद भारत में फिर इसका नाम रखा गया है शेरशाह सूरी पथ जिसे आप नेशनल हाईवे नंबर 2 के नाम से भी जानते हैं।
शेरशाह का नाम देश में पहली बार डाक व्यवस्था शुरु करने के लिए भी जाना जाता है। शेरशाह के जमाने के डाक पोस्ट का आज भी कई जगह अस्तित्व दिखाई देता है। उसने मुद्रा व्यवस्था भी शुरू की। आज रुपया शब्द शेरशाह के समय की देन है। शेरशाह के राज में  कानून इतना सख्त था कि चोर चोरी करने से कांपते थे। चोरी पर हाथ काटने की सजा होती थी। जिस गांव में चोरी हो वहां के लोगों पर किया जाता था सामूहिक जुर्माना।


कालांजर के किले में 13 मई 1545 को अपनी मौत से पहले शेरशाह ने अपने लिए मकबरे का इंतजाम कर लिया था जो सासाराम का बड़ा दर्शनीय स्थल बन गया। मकबरा उसके जीवन काल में बनना आरंभ हो गया था जो उसके मृत्यु के तीन महीने बाद पूरा हो गया। शेरशाह के मकबरे के सामने शेरगंज मुहल्ले में उसके पिता हसन शाह सूरी का भी मकबरा है। स्थानीय लोग इसे सूखा हुआ रौजा भी कहते हैं। 
शेरगंज स्थित हसनशाह सूरी का मकबरा। 

कहा जाता है कि दिल्ली का पुराना किला शेरशाह का बनवाया हुआ है। मध्य प्रदेश में एक जिला है श्योपुर। इस श्योपुर का किला भी शेरशाह का बनवाया हुआ है। हालांकि इस किले पर कब्जा करके लोगों ने अब आवासीय बनवा दिया है। 

कहां ठहरें - सासाराम में ठहरने के लिए बिहार पर्यटन ने होटल शेरशाह विहार बनवाया है जो फजलगंज में जीटी रोड पर ही स्थित है। आप जीटी रोड पर रोहित इंटरनेशनल समेत कई और होटलों में ठहर कर सासाराम और आसपास घूम सकते हैं। 

और क्या देखें -  शेरशाह के मकबरा के अलावा, गुरुद्वारा चाचा फग्गूमल, ताराचंडी देवी का मंदिर, रोहतासगढ़ का किला, भबुआ के पास मुंडेश्वरी देवी का मंदिर सासाराम में रहकर देखा जा सकता है। 

-    - विद्युत प्रकाश मौर्य  ( vidyutp@gmail.com )

((SASARAM, SHERSHAH TOMB, FARID, HASAN SHAH SURI, GT ROAD, ROHTAS, BIHAR )

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