Saturday, August 4, 2012

महापंडित राहुल सांकृत्यायन और दार्जिलिंग

देश के खूबसूरत हिल स्टेशनों में से एक दार्जिंलिंग से दो महान लोगों का एक जैसा संबंध है। महान लेखक, सैलानी और विद्वान राहुल सांकृत्यायन ने अपनी आखिरी सांस दार्जिंलिंग में ली। वहीं बंगाल के स्वतंत्रता आंदोलन के एक और बड़े नेता देश बंधु चितरंजन दास ने भी अंतिम सांसे दार्जिलिंग में ही लीं। सीआर दास की याद में दार्जिलिंग शहर में चौरस्ता पास एक सड़क का नाम रखा गया है सीआरदास रोड। इसी रोड पर आगे चलने पर सीआरदास के याद में एक म्यूजिम बना है। उसी घर में इस म्यूजिम को बनाया गया है जहां सीआरदास ने आखिरी वक्त गुजारा। 16 जून 1925 को सीआर दास ने यहां आखिरी सांस ली। अगर आपकी आजादी के आंदोलन का इतिहास और उससे जुडे मील के पत्थरों को देखने में रूचि है तो सीआरदास रोड और म्यूजियम की जरूर जाएं। ये म्यूजिम रोज दस से चार बजे तक खुला रहता है।



दार्जिलिंग के राजभवन रोड पर महापंडित राहुल सांकृत्यायन की याद में उनकी प्रतिमा लगाई गई है। इस प्रतिमा के साथ लगे संगरमरमर पट पर राहुल सांकृत्यायन के दार्जिंलिंग के आखिरी दिनों के बारे में लिखा गया है। ये महज संयोग ही था कि हिमालय के बारे में सबसे ज्यादा शोध करने वाले राहुल सांकृत्यायन ने हिमालय की गोद में ही आखिरी सांसे लीं। राहुल जी ने अपने जीवन में दुनिया के कई देशों की यात्राएं कीं। काफी साहित्य लिखा। लंबे यात्रा वृंतात लिखे। पर अपने आखिरी समय गुजारने के लिए उन्होंने दार्जिलिंग को खास तौर पर चुना था। यहां की आबोहवा उन्हे काफी पसंद थी। सत्तर साल की अवस्था में 14 अप्रैल 1963 को उच्च रक्त चाप से पीड़ित होने के बाद उन्होंने प्रकृति की गोद में अंतिम सांसें ली। आखिरी वक्त में उन्हें मधुमेह की भी बीमारी थी। राहुल जी ने दार्जिलिंग परिचय नामक पुस्तक भी लिखी है। राहुल जी का जन्म उत्तर प्रदेश आजमगढ़ जिले में 9 अप्रैल 1893 को हुआ था। उनका पहला नाम केदारनाथ पांडे था।
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वैसे दार्जिलिंग से कई और महान लोगो को संबंध रहा है। गांधी जी एक बार 1925 में दार्जिलिंग पहुंचे थे, लेकिन उन्होंने सिलिगुड़ी से दार्जिलिंग की लगभग 84 किलोमीटर की पैदल यात्रा की थी। कवि गुरु रविंद्रनाथ टैगोर को तो दार्जिंलिंग काफी पसंद था। वे अपने जीवन में तीन बार दार्जिलिंग पहुंचे थे। आखिरी बार वे अपने बेटे के साथ दार्जिलिंग आए तो अंगरेजी के महान लेखक मार्क ट्वेन को भी दार्जिलिंग शहर बहुत पसंद था। सत्यजीत राय तो अपनी फिल्मों में दार्जिलिंग को जगह देना नहीं भूलते थे।

- विद्युत प्रकाश मौर्य  - vidyutp@gmail.com
 ( RAHUL SANKRITYAN, DARJEELING, BENGAL , GANDHI, TAGORE )

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