Sunday, August 5, 2012

सबसे पुराना बौद्ध मठ- घूम मठ


दार्जिलिंग बौद्ध संस्कृति का प्रमुख केंद्र है। वैसे तो दार्जिलिंग और इसके आसपास कई बौद्ध मंदिर और मठ हैं लेकिन इनमें घूम स्थित बौद्ध मठ दार्जिलिंग इलाका का सबसे पुराना बौद्ध मठ है।

इसकी स्थापना 1850 में हुई थी। यह मठ दार्जिलिंग से आठ किलोमीटर पहले घूम में स्थित है। खिलौना ट्रेन के घूम रेलवे स्टेशन से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर घूम मठ स्थित है।
घूम बाजार से मठ तक पैदल जाया जा सकता है। यह शाक्‍या मठ शाक्‍य सम्‍प्रदाय का बहुत ही ऐतिहासिक और महत्‍वपूर्ण मठ है। इस मठ का पुनर्निर्माण 1915 ई. में किया गया। बाद यहां एक प्रार्थना कक्ष भी बनवाया गया है। इस हाल को अमेरिका की एक अमीर महिला वुडी स्ट्रांग अपने प्रिय पति की याद में बनवाया है।

 इस प्रार्थना कक्ष में एक साथ 60 बौद्ध भिक्षु प्रार्थना कर सकते हैं। घूम मठ में मैत्रेय बुद्ध की प्रतिमा है। बताया जाता है कि बौद्ध मत से जुड़े अति महत्वपूर्ण दस्तावेज यहां मौजूद है। 1993 भारत के राष्ट्रपति आर वेंकट रामन यहां आए थे। इस बौद्ध मठ में जाकर आपको एक खास तरह की शांति का एहसास होगा। घूम बाजार से मठ तक जाने का रास्ता अभिनव आनंद की अनुभूति प्रदान करता है। यह किसी गांव में जाने जैसी शांति का एहसास कराता है।

घूम के रास्ते में दो लामाओं के साथ
घूम के बौद्ध मठ में दुनिया भर में बौद्ध मठ मानने वालों की गहन आस्था है। हालांकि इस मठ में भीड़भाड़ बहुत कम देखने को मिलती है। मठ बिल्कुल गांव में है। आसपास में बाजार नहीं है। पास में रिसार्ट जरूर है। अगर आप दार्जिलिंग की यात्रा पर जा रहे हैं तो घूम बौद्ध मठ देखने जरूर जाएं। यहां धर्म चक्र चलाकर शांति का एहसास किया जा सकता है। मुख्य सड़क से घूम मठ जाने वाले रास्ते के कोने पर समोसे और मिठाइयों को दुकान मिली। दुकानदार भाई बिहार के मुजफ्फरपुर के निकले। पर तीन पीढ़ियों से यहीं दार्जिलिंग में दुकान चला रहे हैं। हल्की बारिश से बढ़ी ठंड में उनके गर्मागर्म समोसे खाकर आनंद आ गया।  
बौद्ध पीस पैगोडा ( शांति स्तूप )  या जापानी मंदिर - दार्जिलिंग शहर में फुजी गुरूजी द्वारा स्थापित बुद्धिस्ट पीस पैगोडा भी है। इस पीस पागोडा के निर्माण की शुरुआत 1972 में हुई। लंबे समय बाद एक नवंबर 1992 में यह बनकर तैयार हुआ। इसकी ऊंचाई 28.5 मीटर है जबकि चौड़ाई 23 मीटर है। यह शांति स्तूप दार्जिलिंग शहर के घंटा घर से 10 मिनट की दूरी पर स्थित है। इसे लोग यहां जापानी मंदिर के नाम से जानते हैं। इसका नाम निप्पोन माहोजी बौद्ध मंदिर भी है।

इस शांति स्तूप में फूजी गुरुजी की विशाल तस्वीर लगी है। यहां रोज सुबह 4.30 बजे, 6.00 बजे और फिर शाम 4.30 बजे और 6.00 बजे प्रार्थना होती है। इस शांति स्तूप की ऊंचाई से भी दार्जलिंग शहर विहंगम का नजारा किया जा सकता है।  यहां कंचनजंगा की चोटियां भी देखी जा सकती हैं।
 बौद्ध धर्म में अलग अलग मतों के लोगों के अलग अलग मठ दार्जिलिंग इलाके में है। कुछ मठों में खूब रौनक देखने को मिलती है तो कहीं कम लोग दिखाई देते हैं।

- vidyutp@gmail.com

( BUDDHA, DARJEELING, GHOOM MATH, PEACE PAGODA, BENGAL ) 

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