Wednesday, May 14, 2014

सुरेश वाडेकर के गीतों की एक यादगार शाम

मालवीय जयंती पर गीत पेश करते सुरेश वाडेकर।
दिसंबर की एक सर्द शाम। कमानी आडोटिरयम। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती पर बीएचयू के पूर्व छात्रों का जमावड़ा। महामना की 150वीं जयंती के मौके पर हर साल की तरह दिल्ली में पूर्व छात्रों का जुटान हुआ। युवा और बुजुर्ग सभी एक साथ। इस शाम को सुरमई बनाया बालीवुड के जाने माने पार्श्व गायक सुरेश वाडेकर ने। सुरेश वाडेकर ने मंच पर आते ही सीने में जलन सी क्यूं है...आंखों में तूफान सा क्यूं है गाना शुरू किया तो हर उम्र के लोग संजीदा हो गए। इस सिलसिले में सुरेश वाडेकर ने अपना एक और लोकप्रिय गीत – ए जिदंगी गले लगा ले पेश किया। इस गीत में उनका साथ दिया उनकी पत्नी रत्ना ने।

सुरेश वाडेकर और उनकी पत्नी रत्ना ( 25 दिस 2011)
लेकिन राजकपूर जैसे निर्माता के विशेष पसंद सुरेश वाडेकर ने श्रोताओं की विशेष मांग पर प्रेमरोग फिल्म का गीत - मैं हूं प्रेम रोगी भी पेश किया। इस पर पर सार हॉल झूम उठा। इसके बाद राम तेरी गंगा मैली हो गई पापियों के पाप धोते धोते....हुश्न पहाड़ों का क्या कहना की बारहों महीने यहां मौसम जाड़ों का...., मैं देर करता नहीं देर हो जाती है....( फिल्म – हीना ) पेश किया। ये सभी गीत राजकपूर की फिल्मों से थे। एक बार फिर घड़ी थी संजीदा होने की...लगी आज सावन की फिर वो घड़ी है....( फिल्म- चांदनी ) के गीत के साथ। लेकिन सुरेश वाडेकर और इस दिल में क्या रखा है....बस तेरा ही प्यार छुपा रखा है...मेघा रे मेघा रे मत परदेश जा रे जैसे गीत पेश किए। युगल गीतों में सुरेश वाडेकर का साथ दिया उनकी पत्नी रत्ना ने। सुरेश वाडेकर के गीतों पर संगीत की धुन में साथ दे रहे थे दिल्ली के जाने माने सुर साधक पंडित ज्वाला प्रसाद जी को बांसुरी पर थे अजय प्रसन्ना।
कुल मिलाकर एक ऐसी शाम रही जो श्रोताओं को लंबे समय तक याद रहेगी। अपने गीतों के दौरान सुरेश वाडेकर आज के दौर में लिखे जा रहे डिंका चीका.. टाइप के गानों से काफी खफा दीखे। बकौल सुरेश वे ऐसे गीतों में खुद को फीट नहीं पाते। 
 (  25 दिसंबर 2011 )
-         विद्युत प्रकाश मौर्य 

( BHU, SURESH WADEKAR, DELHI, VARANASI, OLD STUDENT MEET ) 

1 comment:

  1. 25 दिसंबर 2011 कमानी आडिटोरियम

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