Sunday, February 23, 2014

धन धान्य की देवी माता शाकुंभरी

नौ देवियों में से एक हैं मां शाकुंभरी देवी। इनका मंदिर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में है। कल कल छल छल बहती नदी की जल धारा ऊंचे पहाड़ और जंगलों के बीच विराजती हैं माता शाकुंभरी। माता का मंदिर यूपी और उत्तराखंड की सीमा पर राजाजी नेशनल पार्क से लगते हुए वन क्षेत्र में है। इलाका अत्यंत मनोरम है। कहा जाता है शाकंभरी देवी लोगों को धन धान्य का आशीर्वाद देती हैं। इनकी अराधना करने वालों का घर हमेशा शाक यानी अन्न के भंडार से भरा रहता है।

शाकुंभरी देवी के गर्भ गृह में मां शाकुंभरी के बगल में भीमा देवी और शताक्षी देवी विराजमान हैं। वहीं दरबार में भ्रामरी देवी और गणेशजी भी विराजमान हैं। मां को शाक यानी हरी सब्जियां जो धन धान्य का प्रतीक है इसकी देवी माना गया है। इसलिए मां के दरबार में आने वाले भक्त मां को प्रसाद के तौर पर हरी सब्जियां, मूली, गाजर, किस्म किस्म साग, पपीता आदि सब कुछ चढ़ाते हैं। इसके साथ यह कामना करते हैं उनका घर हमेशा धन धान्य से भरा रहे। सैनी समाज माता शाकुंभरी को अपनी कुल देवी मानता है। वरिष्ठ पत्रकार शंभुनाथ शुक्ला कहते हैं कि शाकुंभरी देवी एक लोकदेवी हैं जिसकी स्थापना सैनी समाज के लोगों ने ही की थी। अब इनकी पूजा सारे ही बिरादरी के लोग करते हैं।

जंगलों में बसती हैं मां - शाकुंभरी देवी (शाकंभरी) के बस स्टाप से मंदिर के लिए एक किलोमीटर का रास्ता पैदल तय करना पड़ता है। मंदिर नदी तट के किनारे है। अगर नदी में पानी न हो तो बसें मंदिर तक चली जाती हैं। मां का मंदिर शिवालिक पर्वतमाला के घने जंगल में नदी के किनारे है। मंदिर तक पहुंचने के लिए शाकंभरी नदी से होकर रास्ता जाता है। थोड़ा रास्ता जंगल से होकर भी है। पथरीली राहों के साथ ही बरसात के दिनों में नदी में पानी भी रहता है। पहाड़ों पर तेज बारिश होने पर नदी में पानी बढ़ जाता है। तब मंदिर जाना मुश्किल है। हांलाकि कुछ घंटों में पानी तेजी से कम भी हो जाता है। नदी में पानी नहीं होने पर लोग अपने निजी वाहनों से बाइक और बड़ी जीपों को नदी से निकालते हुए मंदिर पहुंच जाते हैं। 

शरद और चैत्र नवरात्र में मेला - शाकुंभरी देवी के मंदिर में भक्तों के आने का सिलसिला सालों भर लगा रहता है। लेकिन शरद और चैत्र नवरात्र में खासी भीड़ उमड़ती है। पौष की पूर्णिमा और बाकी पूर्णिमा के दिन भी यहां भक्त बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। मां के दरबार में न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और पंजाब से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालु निजी बसों और ट्रकों से पूरी तैयारी के साथ आते हैं।  इस दौरान मंदिर का पास मेले लग जाते हैं। अलग अलग जगहों से आए श्रद्धालु यहां भंडारा लगाते हैं। 

मां के भंडारे में कड़ी, चावल, हलवा, पूरी आदि का प्रसाद होता है। इस दौरान प्रशासन भी अपनी ओर से खास इंतजाम करता है। लेकिन बरसात के दिनों में माता शाकुंभरी के मंदिर के पास नदी में पानी आ जाता है। इसलिए बरसात में दर्शन करने वालों को थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए।

माता शाकुंभरी के मंदिर के पास प्रसाद की दुकानें और खाने पीने से स्टाल है। मंदिर पास रहने के लिए कुछ आश्रम और धर्मशालाएं भी हैं। अगर मंदिर पहुंचने में शाम हो जाए और लौटना मुश्किल हो तो वहीं रूका जा सकता है। मंदिर के पास एक संस्कृत स्कूल और जिला प्रशासन का बनवाया गया रैन बसेरा भी है। हालांकि यहां बेहतरीन इंतजाम वाले होटल या गेस्ट हाउस नहीं हैं। उसके लिए आपको साहरनपुर में रुकना होगा।

शाम को 5.45 बजे के बाद माता शाकुंभरी से वापस आने के लिए बसें नहीं मिलतीं। ऐसी हालत में आपको मंदिर के पास ही रूकना पडेगा। मंदिर के आसपास बिल्कुल प्राकृतिक वातावरण है। कई मोबाइल कंपनियों का नेटवर्क भी नहीं मिलता। सहारनपुर से शाकुंभरी देवी तक जाने का रास्ता बड़ा ही मनोरम है। मां की कृपा इलाके में प्रकृति पर खूब बरसी है। रास्ते में खूब हरियाली दिखाई देती है। आम के बड़े-बड़े बाग हैं। यहां से आप सहारनपुर के प्रसिद्ध चौसा आम खरीद सकते हैं।


कैसे पहुंचें - शाकुंभरी देवी का मंदिर यूपी में सहारनपुर शहर से 42 किलोमीटर की दूरी पर है। नजदीकी कस्बा बेहट से शाकुंभरी देवी का मंदिर 16 किलोमीटर की दूरी पर है। आप देश के किसी भी कोने से सहरानपुर रेल या बस द्वारा पहुंच सकते हैं। सहारनपुर में रेलवे स्टेशन से बेहट बस अड्डे पहुंचे। यहां शाकुंभरी देवी के लिए बसें हर थोड़ी देर पर मिलती हैं। सहारनपुर से बेहट कसबे की दूरी 23 किलोमीटर है। बेहट से मां का मंदिर 16 किलोमीटर की दूरी पर चकराता रोड पर है। यह रास्ता तकरीबन डेढ घंटे का है।अगर आप परिवार के साथ या समूह में हैं तो सहारनपुर से टैक्सी बुक करके भी शाकुंभरी देवी के मंदिर जा सकते हैं। शाकुंभरी देवी के मंदिर से हिमाचल प्रदेश का पांवटा साहिब भी निकट है। यहां पर देहरादून या हरियाणा के शहर अंबाला से भी सुगमता से पहुंचा जा सकता है। 
 -  विद्युत प्रकाश मौर्य  

( SHAKUMBHARI DEVI, NINE DEVI, TEMPLE, BEHAT, SAHRANPUR, UP ) 


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