Wednesday, July 18, 2012

चेन्नई- मरीना बीच पर मछली का स्वाद

आध्यात्मिक युवा शिविर बेंगलुरु  से लौटते हुए हमलोग एक दिन चेन्नई में रूके। हमारी ट्रेन अगले दिन थी इसलिए हमारे पास चेन्नई घूमने का अच्छा मौका था। रात को हमलोग बेंगलुरु सिटी रेलवे स्टेशन से कावेरी एक्सप्रेस से चले थे। सुबह 7 बजे चेन्नई सेंट्रल में थे। हमारी योजना थी चेन्नई शहर घूमने की। पर जनवरी में भी वहां गरमी लग रही थी। तब इस शहर का नाम मद्रास हुआ करता था। हमारे साथ बीएचयू के साथी और पटना के सुनील सेवक की पूरी टीम थी। हमलोगों ने चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन के सामने एक गली में एक दिन के लिए एक होटल में आसरा लिया। अब होटल का नाम याद नहीं आ रहा। अब हमें करनी थी पेट पूजा। छात्र जीवन में होटलों का मीनू में खाने पीने की दरें पहले देखा करते थे। अगर जेब के अनुकूल लगे तभी खाने की टेबल की ओर जाते थे। काफी खोजबीन कर एक होटल में खाने पहुंचे। नाम था मुरादी होटल भागीरथी। महज 7 रुपये में भरपेट खाना। केले के पत्ते पर। मजा आ गया।



चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन के बगल में वाल टैक्स रोड पर स्थित है मुरुदी होटल भागीरथी। ये शुद्ध शाकाहारी भोजनालय केरला लॉज के बगल में है। होटल में खाते समय एक सीतामढ़ी के सज्जन हमारे बगल वाले टेबल पर खाते हुए मिल गए। बताया स्टेशन के पास खाने की सबसे अच्छी जगह है। मैं तो रोज यहां आता हूं। यहां दक्षिण भारतीय और उत्तर भारतीय भोजन दोनों ही मिलते हैं। यहां से आप खाना पैक भी करा सकते हैं। होटल के बाहर हिंदी में लिखा है खाना तैयार है। होटल के अंदर दो तरह के डाइनिंग हाल हैं। एक समान्य दूसरा वातानुकूलित। वातानुकित में खाने की दरें थोड़ी ज्यादा हैं। ( Murudi Hotel Bhagirathi, 339, Wall Tax Rd Edapalaiyam, George Town, Chennai, Tamil Nadu 600003  TEL.  044- 25353437,  25330812,  42358577)
इसके बाद चेन्नई में सबसे पहले हम मरीना बीच पर पहुंचे। रेलवे स्टेशन से कुछ किलोमीटर दूरी पर ही है ये समुद्र तट। वहां दिनभर काफी चहल पहल रहती है।  हालांकि यहां साफ सफाई ज्यादा नहीं रहती। मरीना बीच पर समुद्र की भुनी हुई मछली का स्वाद लिया। इसके बाद हम आगे बढ़े  चेन्नई में हमलोग सी अन्ना दुर्रै की समाधि देखने भी गए। वे तमिलनाडु के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री और द्रविड मुनेत्र कडगम के संस्थाापक भी थे। इसके बाद हमारा पड़ाव था बस से चलकर गोल्डन बीच। बीच क्या यह एक रिजार्ट है। गोल्डन बीच पर रेस्टोरेंट थोड़े महंगे लगे, लेकिन यहां भी हम मसाला डोसा का जायका लेना नहीं भूले।


चेन्नई से महाबलीपुरम की ओर

चेन्नई के गोल्डेन बीच से हम बाहर निकले तो पहुंचे महाबलीपुरम। सबसे पहले हमने देखा समुद्रतटीय मंदिर जिसके बारे में अब तक इतिहास की सिर्फ किताबों में पढ़ा था।  महाबलीपुरम का समुद्र तट काफी खूबसूरत है। भीड़ भाड़ और कोलाहल से दूर। शांत। यहां घंटो गुजारो तो भी कम है। हम लहरों की अटखेलियां का मजा ले रहे थे तभी आ गई घनघोर बारिश। हमारे पास कोई छाता नहीं था। हाल में चेन्नई सफर के दौरान धूप से बचने के लिए खरीदी गई स्ट्रा हैट काम नहीं आई। 

महाबलीपुरम में संजय कुमार  (पटना), राजीव सिंह और मैं । (जनवरी 1992)
इस बारिश में हमलोग जमकर भींगे। वह भींगना कभी नहीं भूलेगा। एक बार फिर घूमते घूमते भूख भी खूब लगी थी। दौड़कर भागे और जो भी नजदीक दिखाई दे गया, एक रेस्टोरेंट में शरण ली। और टूट पड़े मसाला डोसा पर। मामल्ला होटल में महज साढ़े तीन रुपये का था एक मसाला डोसा। लेकिन स्वाद था...भाई वैसा स्वादिष्ट मसाला डोसा दुबारा कभी नहीं खाया। शाम को हमारी ट्रेन थी पटना मद्रास एक्सप्रेस। आना गंगा कावेरी से हुआ था वापसी पटना मद्रास एक्सप्रेस से हो रही है। मार्ग लगभग वही है। रेल मंत्रालय की कृपा से हमारा आरक्षण कन्फर्म था। मजे की बात यह रही है कि टीटीई ने हमसे आरक्षण शुल्क भी नहीं मांगा। कई राज्यों से गुजरते हुए लंबे सफर के बाद हमलोग मुगलसराय पहुंचे। हमें हमारा विश्वविद्यालय बुला रहा था। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com ( जनवरी 1992) 

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