Thursday, July 5, 2012

शिमला का जाखू मंदिर- यहां हनुमान जी ने किया था विश्राम


साल 2012 के जून महीने में शिमला जाना हुआ। परिवार के साथ। हमने कालका से शिमला का सफर शिवालिक डिलक्स एक्सप्रेस से तय किया। इस बार लक्कड़ बाजार में होटल सत्कार में रुके। वैसे तो शिमला पहले भी आ चुका था। पर कभी जाखू मंदिर नहीं गया था। इस बार हमने जाखू तक चढ़ाई की और हनुमान जी के दर्शन किए।  
जब आप शिमला घूमने जाएं तो जाखू मंदिर जरूर जाएं। जाखू मंदिर शिमला की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित है। शिमला के सबसे लोकप्रिय स्पॉट मॉल से जाखू मंदिर के लिए रास्ता जाता है। आप जाखू पैदल भी जा सकते हैं।

यहां हनुमान जी ने किया था  विश्राम-  हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में घने देवदार के पेड़ों के बीच जाखू मंदिर हनुमान जी का ऐतिहासिक मंदिर है। कहा जाता है कि हनुमान जी जब राम रावण युद्ध के दौरान घायल लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी लेने जा रहे थे तब उन्होंने जाखू मंदिर के पास विश्राम किया था। कहा जाता कि मंदिर में हनुमान जी के पद चिन्ह आज भी देखे जा सकते हैं। जाखू मंदिर में 1837 की खींची गई मंदिर की एक श्वेत श्याम तस्वीर लगी है। जाखू मंदिर में अब हनुमान जी की विशाल प्रतिमा भी लगी है। ये प्रतिमा 2010 में लगाई गई है।

मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां मांगी हुई मुरादें पूरी होती हैं। इसलिए काफी लोग बड़े 
श्रद्धा भाव से यहां आते हैं।
जाखू मंदिर 2100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर के आसपास सुंदर पार्क बना हुआ है।जहां आप थोड़ी देर बैठकर कुदरत के नजारों का आनंद ले सकते हैं। शिमला शहर में कहीं से भी आपको जाखू मंदिर के हनुमान जी के दर्शन होते हैं।
बंदरों से सावधान रहें - जाखू मंदिर जब आप जाएं तो यहां बंदरों ( हनुमान जी माफ करें ) से सावधान रहें। मंदिर के गेट पर इनसे बचने के लिए छड़ी भी मिलती है। लेकिन आप बंदरों से कोई छेड़छाड़ नहीं करें। ये बंदर कई बार आपकी तलाशी भी लेते हैं बिल्कुल पुलिस वाले की तरह। अगर कोई आपके पास खाने पीने की चीज है तो तुरंत इनके हवाले कर दें वर्ना खैर नहीं। बताया जाता है कि जाखू मंदिर परिसर में सदियों से बंदरों की टोलियां रहती हैं। ये हालांकि श्रद्धालुओं का कुछ बुरा नहीं करते लेकिन उनकी अपेक्षा रहती है कि आप उनके लिए कुछ दाना पानी जरूर लेकर आएं।
ऊंचाई से विहंगम नजारा -  जाखू मंदिर की चोटी से शिमला शहर का विहंगम नजारा देखने का मजा ही कुछ और है। आप 2100 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई पर हैं और यहां से कई किलोमीटर दूर तक परम पिता की अभिनव चित्रकारी का आनंद उठा सकते हैं। यहां से पूरे शहर का नजारा काफी हरा भरा और अदभुत दिखाई देता है।


   बजरंगबली की विशाल प्रतिमा-

    प्राचीन जाखू मंदिर के पास अब एक और नई पहचान बन गई है विशाल हनुमान जी की प्रतिमा। जाखू मंदिर के बगल में ही  बनाए गए हैं ये 108 फीट के हनुमान जी। ये हनुमान जी साल 2010 में यहां विराजमान किए गए हैं।
    सिंदूरी रंग के हनुमान जी पूरे शिमला शहर में हर जगह से दिखाई देते हैं। इस मुद्रा में हैं मानो वे भक्तों को आशीर्वाद दे रहे हों। अब शिमला आने वाले श्रद्धालुओं और सैलानियों के लिए हनुमान जी की ये विशालकाय मूर्ति भी आकर्षण का बड़ा केंद्र बन गई है।
कैसे पहुंचे जाखू तक - अगर आप सेहतमंद हैं तो जाखू की चढ़ाई आधे घंटे की है। थोड़े कमजोर हैं तो 45 मिनट। आराम आराम से जाना चाहते हैं तो एक घंटे। लेकिन पैदल नहीं जाना चाहते तो टैक्सी बुक करें। टैक्सी वाले तीन किलोमीटर के सफर का ढाई से 300 रुपये लेते हैं। आप किसी के साथ शेयर भी कर सकते हैं। या फिर शिमला शहर में नई शुरू हुई शेयरिंग टैक्सी सेवा से 10 रुपये में भी जा सकते हैं। जाखू मंदिर के लिए ऐसी टैक्सी सेवा चर्च के पास से चलती है।
और हो गई जोरदार बारिश - जाखू मंदिर में हमारी मुलाकात अंबाला के एक प्रेमी युगल से हुई। उनके साथ बातें करते हुए हमलोग नीचे तक उतर तो आए। पर मॉल पहुंचने से पहले जून में महीने में जोरदार बारिश हो गई। ऐसी तेज बारिश की हम बुरी तरह एक घंटे भींगे। इसके बाद जैसे तैसे लक्कड़ बाजार में अपने सत्कार होटल पहुंचे और बदले हुए कपड़ों में आगे के सफर पर निकले।
जाखू मंदिर रोपवे - साल 2017 में जाखू मंदिर तक जाने के लिए रोपवे का निर्माण कराया गया है। अब पैदल, टैक्सी के अलावा सैलानी रोपवे से भी जाखू मंदिर तक जा सकेंगे। 
मुझे लिखें - vidyutp@gmail.com  ( सभी फोटो - विद्युत प्रकाश मौर्य )

( SHIMLA, JAKHU, HANUMAN TEMPLE, STATUE, ROPE WAY )  

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