Friday, May 30, 2014

103 सुरंगों से होकर गुजरती है कालका शिमला रेल (( 04 ))

बड़ोग सुरंग के सामने ( सन 2000 की तसवीर ) 

कालका शिमला के 94 किलोमीटर के सफर के बीच कुल 103 सुरंगे आती हैं। हालांकि कुछ सुरंगे काफी छोटी-छोटी हैं। पर इनमें बड़ोग की सुरंग एक किलोमीटर से ज्यादा लंबी है। यह भारतीय नैरो गेज रेलवे की सबसे लंबी सुरंग है। वहीं कोटी की सुरंग भी 700 मीटर लंबी है।

 केएसआर की सबसे लंबी सुरंग - बड़ोग
कालका शिमला मार्ग पर 33 नंबर की सुरंग है बड़ोग। ये सुरंग 1143.61 मीटर लंबी है। यानी एक किलोमीटर से ज्यादा। 25 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से ट्रेन गुजरती है तो सुंरग को पार करने में तीन मिनट से ज्यादा का समय लगता है। अपने निर्माण के समय ये दुनिया की सबसे लंबी सुरंग थी। जैसे ही सबसे लंबी सुरंग में ट्रेन घुसती है सारे डिब्बों में बैठे बच्चे समवेत स्वर में चिल्लाना शुरू कर देते हैं। चार मिनट से ज्यादा बिल्कुल अंधेरा होता है। जब ट्रेन सुरंग से गुजरती है न सिर्फ बच्चों का बल्कि बड़ों का भी रोमांच देखने लायक होता है।

पहाड़ों को चिरकर सुरंग बनाना वह भी 1893 से 1900 से बीच बहुत मुश्किल काम था। पर इसे कुछ असफलताओं के बाद सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। बड़ोग रेलवे स्टेशन पर आने वाली और जाने वाली ट्रेनें देर तक रुकती हैं। ये स्टेशन सबसे लंबे सुरंग खत्म होने के के ठीक बाद आता है। यहां आप खूब सारी तस्वीरें खिंचवा सकते हैं और चाय नास्ता भी कर सकते हैं। कालका शिमला मार्ग पर यही एक स्टेशन है जहां पर रिफ्रेंशमेंट के नाम पर कुछ उपलब्ध होता है। 
असफलता से दुखी हो बड़ोग ने की थी आत्महत्या
स्टेशन का नाम पर कालका शिमला रेल मार्ग बनवाने वाले इंजीनियर जेम्स क्लार्क बड़ोग के नाम पर रखा गया है। पहले बड़ोग इस सबसे लंबी सुरंग के निर्माण का जिम्मा सौंपा गया था। लेकिन उनकी पहली कोशिश असफल रही।
कई महीने तक सुरंग की खुदाई जारी रही। हुआ यह था कि बड़ोग सारे तकनीकी जोड़ घटाव करके पहाड़ के दोनों ओर से सुरंग के लिए खुदाई शुरू कराई। पर कई दिनों बाद दोनों छोर के रास्ते बीच में मिल नहीं पाए। इस तरह सारी मेहनत बेकार चली गई।
बड़ोग की इस असफलता से सरकार नाराज हो गई। तब बड़ोग पर सरकार ने एक रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया। इस दंड और अपनी असफलता पर बड़ोग पर बड़ी आत्मग्लानि हुई। एक दिन चुपचाप बड़ोग अपने प्यारे कुत्ते के साथ जंगल में गए और वहां खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली। इस तरह उनका दुखद अंत हुआ, लेकिन उनकी कोशिश बेकार नहीं गई।
बडोग सुरंग के सामने अनादि ( 2012 ) 


बाद में सुरंग बनाने में सफलता मिली - कहते हैं कि सफलता का रास्ता असफलताओं से होकर जाता है। बाद में इसी सुरंग के बगल में नई सुरंग बनाई गई, जिससे होकर आजकल रेल गुजरती है। अभियंता एच एस हैरिंगटन के पर्यवेक्षण में साधु बाबा भलकू की सलाह से नई सुरंग बनाई गई। साधु बाबा भलकू हिमाचल के स्थानीय व्यक्ति थे पर उनका पहाड़ों का ज्ञान अदभुत था। ब्रिटिश सरकार ने उनकी मदद प्राप्त की। पर बड़ोग की बनाई नाकामयाब सुरंग अभी भी अस्तित्व में है। जो वर्तमान सुरंग के एक किलोमीटर बगल में है।
बाद में बड़ोग के कामकाज को सरकार ने पहचाना और 33 नंबर की इस सुरंग का नाम बड़ोग सुरंग रखा गया। साथ ही रेलवे स्टेशन का नाम भी बड़ोग रखा गया। बड़ोग की मजार भी यहीं पर बनाई गई है। रेलवे स्टेशन से तीन किलोमीटर चलकर बड़ोग की मजार तक पहुंचा जा सकता है। 


बड़ोग में होता था शाही ठहराव -   ब्रिटिश काल में जब कालका से शिमला के लिए इस टॉय ट्रेन से ब्रिटिश अफसर और उनकी मेम साहब चलती थीं, तो ट्रेन बड़ोग में एक घंटे रुकती थी। यहां पर साहब लोगों का शाही भोजन का पड़ाव होता था। 1800 मीटर की ऊंचाई पर बड़ोग की दूरी सोलन से 7 किलोमीटर है। बड़ोग  में कालका शिमला रेलवे का म्यूजियम भी बनाया गया है। यहां पर आप इस रेल सिस्टम के बारे में अपने ज्ञान में इजाफा कर सकते हैं। साथ ही सैलानियों के रहने के लिए एक विश्राम गृह भी बना हुआ है। अगर आप कालका शिमला रेलवे को और गहराई से समझना चाहते हैं तो बड़ोग में विश्राम भी कर सकते हैं। ठहरने के लिए यहां पर हिमाचल टूरिज्म का होटल पाइनवुड और होटल बड़ोग हाइट्स भी विकल्प के तौर पर उपलब्ध है।

बाबा भलकू रेल संग्रहालय- कालका शिमला रेलवे के निर्माण में बड़ी भूमिका निभाने वाले स्थानीय साधु की याद में शिमला में साल 2011 में बाबा भलकू रेल म्युजियम की स्थापना की गई। ओल्ड बस स्टैंड के पास स्थित ये संग्रहालय 7 जुलाई 2011 को उत्तर रेलवे के अंबाला डिविजन की ओर से खोला गया। कालका शिमला रेलवे से जुड़े तमाम पहलुओं से लोगों का साक्षात्कार कराता है। इसका प्रवेश टिकट 20 रुपये का है। इस संग्रहालय में कालका शिमला रेल में इस्तेमाल हुई क्राकरी से लेकर नायब तस्वीरों का संग्रह देख सकते हैं।

कालका शिमला रेल रेल - एक नजर
कुल दूरी 94 किलोमीटर, गेज 2 फीट , 6 ईंच
शुरुआत वर्ष 1903, कुल स्टेशन - 19
कहां से कहां तक कालका ( हरियाणा) से शिमला ( हिमाचल प्रदेश)
यूनेस्को से विश्व धरोहर का दर्जा 2008 में


- विद्युत प्रकाश मौर्य
(  KSR, KALKA SHIMLA RAIL, NARROW GAUGE  ) 
REF.
1. http://www.nr.indianrailways.gov.in/KSR/11.pdf 

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