Thursday, June 15, 2017

अनूठी जल प्रणाली से लैस हंपी का शाही अहाता

हंपी में हम अब महानवमी टिब्बा पहुंच गए हैं। यह वास्तव में विशाल राज प्रांगण है। इसके प्लेटफार्म की ऊंचाई 8 मीटर है। राजकीय प्रयोग में लाया जाना वाले ग्रेनाइट पत्थरों से बना यह विशाल ढांचा है। इसमें जाने के लिए पूर्व –पश्चिम और दक्षिण दिशा से से सीढ़ियां बनी हैं। यहां पर नवमी और विजयादशमी के दिन बड़े राजकीय आयोजन हुआ करते थे। इसके अंदर एक सुंरग भी है। इससे लगा हुआ एक शाही अहाता भी है। इसका क्षेत्रफल 59,000 वर्ग मीटर है। ऊंची और दोहरी दीवारों के अंदर इस अहाते में कुल 43 इमारतें हुआ करती थीं। अहाते में जाने के लिए तीन प्रवेश द्वार बने हैं। इसी अहाते में राजा का निवास भी हुआ करता था। इस अहाते में पानी पहुंचाने के लिए सुंदर जल प्रणाली निर्मित की गई थी। इसमें कुल 23 छोटे बड़े हौज थे जिन्हें भरा जाता था।था। संभवतः इसमें तुंगभद्रा नदी से जल लाने का इंतजाम किया गया था। अहाते में एक कुआं भी है। शाही अहाता विजयनगर साम्राज्य की वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। 

तो यहां नहाती थी रानी - आगे चलने पर हमें रानी स्नान कुंड दिखाई देता है, इसे क्वीन्स बाथ के नाम से जाना जाता है। जो 15 वर्ग मीटर में बना हुआ है। रानी के स्नान कुंड के बाहर विशाल उद्यान बना हुआ  है। कुंड के चारों ओर सुसज्जित बरामदे और बालकोनी बनी हुई है। इन बरामदों की नक्काशियां भी शानदार हैं। हालांकि हमें देश के अलग अलग हिस्सों में शाही बावड़ियां देखने को मिलती हैं। क्वीन्स बाथ कुछ उसी तरह का है, पर यह खास तौर पर रानी के लिए बनाया गया था। रानियां यहां रथ में सवार होकर जल क्रीड़ा करने के लिए आती थीं।

हंपी का अनूठा हजार राम मंदिर

देश भर में रामचंद्र जी के मंदिर बहुत कम ही हैं। पर हंपी का हजार राम मंदिर द्रविड़ शैली में 15वीं सदी का बना हुआ भव्य मंदिर है। जनाना प्रांगण से आगे बढ़ने के बाद हम रुकते हैं हजार राम मंदिर के सामने। इस मंदिर के उल्टी तरफ पान सुपारी बाजार हुआ करता था।

हजार राम का मंदिर विजयनगर के राजसी अंचल में स्थित है। इसे राज परिवार के अनुष्ठान के लिहाज से बनवाया गया था। मंदिर की योजना में गर्भ गृह अंतराल, मुख मंडप और उत्तर और दक्षिण में अर्ध मंडप बनाए गए हैं। महामंडप का रुख पूरब दिशा की ओर है। मुख्य मंदिर के चारों ओर तीन श्रेणियों में रामायण की कथा को मूर्तियों में उकेरा गया है। इसमें लव कुश के चित्र भी बनाए गए हैं। मंदिर में सुंदर काले पत्थरों के पालिश किए हुए स्तंभ हैं जिनकी सुंदरता देखते ही बनती है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु इस मंदिर की सुंदरता में खो जाते हैं। यह एक ऐसा मंदिर है जिसका सौंदर्य निहारने के लिए आपके पास एक घंटे से ज्यादा का वक्त होना चाहिए।

विशाल और अदभुत है हंपी का विट्टलस्वामी मंदिर
अब हम लंबी यात्रा पर चल पड़े हैं। हम विट्टलस्वामी मंदिर की ओर जा रहे हैं। यह हंपी के बाकी स्मारकों से थोड़ी दूर पूर्वोत्तर में पहाड़ी पर स्थित है।रास्ते में सड़क पर एक चेकपोस्ट आता है, यह 16वीं सदी का ही बना हुआ है। ऐसे कई चेक पोस्ट विजय नगर सम्राज्य में बने हुए थे। 

विट्ठल स्वामी का यह मंदिर अपनी अदभुत वास्तुकला, गोपुरम, पत्थर के विशाल रथ और सारेगामा स्तंभों के लिए प्रसिद्ध है। विट्ठल मंदिर से एक किलोमीटर पहले आटो स्टैंड और छोटा सा बाजार है, जहां आपको खाने पीने की कुछ चीजें मिल सकती है।

नारी सशक्तिकरण का उदाहरण बैटरी कार – मंदिर से एक किलोमीटर पहले स्वामी आटो रोक कर बताते हैं मंदिर तक आटो रिक्शा या कोई भी पेट्रोल डीजल से चलने वाला वाहन नहीं जाता है। कर्नाटक टूरिज्म ने विट्ठल मंदिर जाने के लिए बैटरी कार का इंतजाम किया हुआ है। कई बैटरी कार लगातार चलती रहती हैं। 

इन सभी बैटरी कारों को महिलाएं चलाती हैं। टिकट बेचने का काम भी महिलाओं के ही हवाले है। यानी नारी सशक्तिकरण का सुंदर उदाहरण। हमलोग भी टिकट लेकर बैटरी कार में बैठ गए। जाने और आने का टिकट 20 रुपये का है। बच्चों का टिकट नहीं लगता। हंप में बैटरी कार की शुरुआत दिसंबर 2010 में हुई। कुल 20 बैटरी कारों का संचालन सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होता है। हर बैटरी कार की लागात 7 लाख आई है। इसमें 14 लोग एक साथ बैठकर सफर करते हैं। 

विट्ठल मंदिर तक जाने के लिए कच्चा इको फ्रेंडली रास्ता है। मंदिर ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। रास्ते में पुराने बाजार की संरचना और कुछ हौज दिखाई देते हैं। मंदिर के बाहर एक विशाल रथ दिखाई देता है।

विट्ठल मंदिर का निर्माण देवराय द्वितीय के काल में 1422 से 1446 के मध्य हुआ। राजा कृष्णदेव राय द्वारा 1513 के आसपास यहां 100 खंबो वाले मंडप का निर्माण कराया गया। इन स्तंभों की खास बात है कि इसको ताड़ित करने  पर संगीत की स्वर लहरियां सुनाई देती हैं। इन स्तंभों से तब की वैज्ञानिक तकनीक का पता चलता है जब पत्थरों से निकलते संगीत की रचना की गई होगी। कई लोग इसलिए इन स्तंभों को सारेगामा स्तंभ के नाम से भी जानते हैं।
हंपी के विट्ठल मंदिर का विशाल रथ। 

यहां विजयनगर की मंदिर निर्माण शैली का उत्कर्ष दिखाई देता है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर आपको गाइड मिलते हैं जो मंदिर कलात्मकता बारे में बताने की बात करते हैं। मंदिर परिसर में मुख्य गोपुरम से प्रवेश करने के बाद हमें कल्याण मंडप और उत्सव मंडप दिखाई देता है। मंदिर में प्रवेश के लिए कुल तीन गोपुरम बने हैं। मंदिर परिसर में पत्थरों का बना एक विशाल रथ भी आपको चकित करता है। किसी समय में इस रथ के पहियों को घुमाया भी जा सकता था, पर अब इसे संरक्षित रखने के लिए सीमेंट से जाम कर दिया गया है। मंदिर के पास विशाल पुष्करिणी (तालाब) भी निर्मित किया गया है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य  

(HAMPI, MAHNAVMI TIBBA, QUEENS BATH, HAJARRAM MANDIR, VITHHAL SWAMI TEMPLE) 

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