Saturday, June 3, 2017

यहीं खाए थे राम ने शबरी के जूठे बेर

होसपेटे की ओर जा रही कर्नाटक रोडवेज की हमारी बस कोप्पल से आगे बढ़ने के बाद नेशनल हाईवे से नंबर 67 से उतर कर मुनीराबाद कस्बे से होकर आगे बढ़ती है। मुनीराबाद का ऐतिहासिक महत्व है। यहां पर रामायण काल का पंपावन स्थित है। कहा जाता है कि रामायण काल में शबरी यहीं रहती थी। जी हां राम की भक्त शबरी। वही शबरी जिसे मालूम हुआ कि देवता मेरे घर आने वाले हैं, तो उनके स्वागत में वह जंगल से बेर लेकर आई। फिर उन्हे चख चख कर देखा कि कौन मीठे हैं और कौन से खट्टे। तो भगवान राम ने शबरी के जूठे बेर यहीं कहीं खाए थे। 

यहीं पंपा सरोवर के पास उन्होंने शबरी का प्रेम पूर्ण आतिथ्य स्वीकार किया था और शबरी राम कथा के साथ हमेशा के लिए अमर हो गई। यहां पर बालि का किला और ऋष्यमूक पर्वत भी है। वही ऋष्यमूक पर्वत जहां राम और हनुमान की पहली मुलाकात हुई थी। यहां पर आप हुलीगेमा देवी मंदिर, पंपा सरोवर, बालि का किला आदि देखने के लिए रुक सकते हैं।

तुंगभद्रा नदी पर डैम और मुनीराबाद डैम

मुनीराबाद तुंगभद्रा नदी पर बांध के लिए जाना जाता है। दरअसल तुंगभद्रा नदी पर बने इस डैम के दो हिस्से हैं। एक मुनीराबाद की तरफ जो कोप्पल जिले में आता है दूसरा  तुंगभद्रा डैम जो बेल्लारी जिले में आता है। डैम से लगी हुई यहां विशाल कालोनी  है। मुनीराबाद में डैम के साथ हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट बनाया गया है। विद्युत उत्पादन के साथ कई बड़े इलाके को सिंचित करने वाले डैम सैलानियों के आकर्षण का केंद्र भी बन चुका है। हमारी बस आगे बढ़ती है। तुंगभद्रा डैम की सीमा को धीरे धीरे पार करती है। यहां तुंगभद्रा डैम का रेलवे स्टेशन भी दिखाई देता है। तुंगभद्रा डैम पर सैलानी बोटिंग का भी आनंद ले सकते हैं। यहां पर पार्क, एक्वेरियम, मिनी जू बना हुआ है। सैलानी के तौर पर आप पूरा दिन यहां गुजार सकते हैं। होसपेटे शहर से तुंगभद्रा डैम 6 किलोमीटर पहले कोप्पल रोड पर है।

तुंगभद्रा डैम देश के प्राचीन बांध में से है। इसका निर्माण 1949 में आरंभ हुआ और 1953 में पूरा हुआ। बांध की ऊंचाई 49.50 मीटर है। बांध बहुद्देश्यी है। सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण के साथ विद्युत उत्पादन भी होता है। बांध से लगा हुआ विशाल जलाशय है। यहां से निकली नहरों से कर्नाटक और आंध्र के रायलसीमा क्षेत्र के खेतों को पानी मिलता है।


होसपेटे का बस स्टैंड - यहां से हंपी जाना है....
पर आजकल तुंगभद्रा जलाशय पानी की कमी से जूझ रहा है। नदी में पानी का स्तर घटने के कारण यहां से निकलने वाली नहरों को ज्यादा पानी नहीं मिल पा रहा है। एक प्रस्ताव है कि अगर कृष्णा नदी पर बने अलमाट्टि डैम से नहर निकालकर तुंगभद्रा जलाशय में पानी पहुंचाया जाए तो हालात बदल सकते हैं।

अब हम पहुंच गए हैं होसपेटे शहर। बस हमें बस स्टैंड के अंदर ले जाकर उतारती है। होसपेटे बेल्लारी जिले का कस्बा है। पर इसका बस स्टैंड विशाल और भव्य है। यहां से हमें जाना है हंपी। होसपेटे से हंपी 14 किलोमीटर है। आटो वाले 400 मांग रहे हैं। बस स्डैंड से सिटी बस भी चलती है। 18 रुपये किराया है। हमलोग सिटी बस में बैठ जाते हैं। जेएनआरयूएम की शानदार बस है। पर तभी मुझे कुछ याद आता है, मैं पास के एटीएम पैसे निकाल लाता हूं।
हंपी जाने वाली बस में ....


होसपेटे से बाहर निकलते ही ऐतिहासिक स्मारक दिखाई देने लगते हैं। कमलापुर में दाहिनी तरफ विशाल झील दिखाई देती है। पांच किलोमीटर बाद हम प्राचीन विजय नगर सम्राज्य की राजधानी हंपी में हैं। दोपहर के तीन बजे हैं। बस से उतरते ही हम तरावट के लिए नारियल पानी और छाछ फिर से लेते हैं। यहीं हमें आटो वाले स्वामी मिल जाते हैं। वे हमें लक्ष्मी हेरिटेज होम स्टे 10 रुपये में छोड़ने को कहते हैं। हमलोग आटो में बैठकर कुछ घुमावदार रास्तों से होते हुए अपने होम स्टे पहुंच जाते हैं।
अब हंपी के बारे में ढेर सारी बातें आगे पढ़िएगा।    
-        विद्युत प्रकाश मौर्य   ( आगे पढ़िए - हंपी का सनसेट प्वाइंट और विरुपाक्ष मंदिर की शाम ) 

( KOPPAL, MUNIRABAD, TUNGBHADRA DAM, SHABRI, RAM , HANUMAN ) 

हंपी के रास्ते मे कमलापुर स्थित विशाल सरोवर 
हंपी के रास्ते में कमलापुर के पास विशाल सरोवर 









5 comments:

  1. इस बार दक्षिण भारत की दूसरी यात्रा के समय यह स्थल भी देखे जायेंगे। भगवान राम और शबरी से जुडा स्थल हो या सुन्दर बाँध, दोनों ही स्थल खूबसूरत है।

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  2. आपके ब्लॉग की पोस्टें मेरी पसंदीदा यात्रा वृत्तांतों में शामिल हैं | कितनी सादगी और ख़ूबसूरती से आप पूरी यात्रा की तस्वीर उकेरते हैं ..आनंदित हो उठता है मन | एक बात बहुत ही प्रेरित करने वाली लगी वो है स्वच्छता और सफाई |लिखते रहिये हम पढ़ रहे हैं ....आपके प्रशंसक

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    1. धन्यवाद जी, आपके शब्द प्रेरणा देते हैं...

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  3. रामायण काल में घूमना-फिरना और तुंगभद्रा बांध देख इस तीक्ष्ण गर्मी में मन को बड़ी राहत पहुंची, धन्यवाद!

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