Thursday, June 1, 2017

बादामी से हंपी वाया गदग, कोपल, होसपेटे

बादामी मे सेट डोसा का स्वाद 
बादामी से हमलोग निकल पड़े हैं हंपी के लिए। सुबह सुबह नास्ते के बाद हमने होटल राज संगम से चेकआउट किया। नास्ते में मैंने अपना पसंदीदा  राइस भात लिया। यह मिनी लंच की तरह है। तो माधवी वंश ने लिया इडली और बड़ा। होटल राज संगम की बात। यहां हमने गो आईबीबीडाट काम से बुक किया था स्टैंडर्ड डिलक्स रुम, उन्होंने हमें दिया एसी रुम। कई बार होटल वाले कमरा अपग्रेड कर देते हैं। ऐसा मेरे साथ पहले भी हो चुका है। पोर्ट ब्लेयर में सिंगल बेडरुम बुक किया था होटल ड्रीम पैलेस हैडो में। पर उन्होंने ट्रिपल बेड रुम दे दिया था। बादामी के राजसंगम के मैनेजर चेक इन के 24 घंटे बाद हमसे पूछते हैं कि आपने नॉन एसी रुम बुक किया था, हमने आपको एसी दे दिया। अब बताएं ये अंतर कौन भुगतान करेगा। हमने कहा, जाहिर तौर पर मैं नहीं करूंगा। कमरा आपने ऑफर किया था। इसके बाद उन्होंने हमारे कमरे की एसी बंद करवा दी। हमें उनका ये व्यवहार अच्छा नहीं लगा।

खैर चेक आउट के बाद हमलोग बाहर आए। सामने बादामी का बस स्टैंड है। कर्नाटक रोडवेज की सरकारी बस ली हमने गदग के लिए। बस के मार्ग को लेकर पहले से ही पर्याप्त शोध कर लिया था। गदग कर्नाटक का एक जिला है। हांलाकि हमलोग ट्रेन से भी हंपी जा सकते थे, पर उसमें सारा दिन लग जाना था। हमारी बस सुबह 9.30 बजे बादामी से खुली। यहां से गदग 70 किलोमीटर है। हमें मनचाही सीटें मिल गई। बस रास्ते में हर छोटे कस्बे में रुक रही है, पर तुरंत चल देती है। रास्ते में बेलूर, रोन जैसे कस्बे आए। रोन गदग जिले की तहसील है। स्थानीय लोग चढ़ उतर रहे हैं। रास्ते में हमें पवन ऊर्जा उत्पादन करते विंड मिल दिखाई दिए। वैसे ही जैसे गुजरात में दिखे थे।

गदग शहर में पहले बेटागिरी इलाका आता है। फिर हम गदग ओल्ड बस स्टैंड पहुंचते है। यहां हमें बस बदलनी है। पर होसपेटे जाने वाली बस न्यू बस स्टैंड से मिलती है। लोग बताते हैं मुंडारगी जाने वाली बस में बैठें वह न्यू बस स्टैंड पहुंचा देगी। इस बस में  7 रुपये प्रति व्यक्ति टिकट लगता है। हम न्यू बस स्टैंड में हैं। यहां से बेल्लारी जाने वाली बस होसपेटे होकर जाएगी। हम बेल्लारी वाले प्लेटफार्म पर इंतजार करने लगते हैं। गर्मी बढ़ गई है तो एक बार फिर नंदिनी का छाछ, अमूल का लॉलीपाप का सेवन करते हैं। तभी होसपेटे जाने वाली हरे रंग की बस आ गई।
गदग में अगली बस का इंतजार

गदग के बारे में – 1997 में धारवाड़ से कट कर गदग नया जिला बना। गदग में भी 11वीं और 12वीं सदी के कई स्मारक हैं। शहर की आबादी 2 लाख से ज्यादा है। हम बस में बैठकर आगे के सफर पर चल पड़े हैं। 12 किलोमीटर आगे चलने पर लाकुंडी (LAKKUNDI) नामक जगह आता है। यह कभी कल्याणी चालुक्यों का निवास हुआ करता था। यह जगह 101 बावड़ियों के लिए जानी जाती है। यह भी एएसआई की ओर से संरक्षित स्मारक है। पर हम यहां उतर कर इन्हें देखने नहीं जा सके।

गदग जिले में लाक्कुंडी का मंदिर। 
गदग से होसपेटे की दूरी 94 किलोमीटर है। बस एनएच 67 ( पुराना एनएच 63) पर सरपट भाग रही है। सड़क काफी अच्छी है। कोई 60 किलोमीटर चलने के बाद कोप्पल शहर आता है। कोप्पल भी जिला है। सरकारी बस स्टैंड बड़ा ही शानदार है। हमने रास्ते में देखा कि जितने भी कस्बाई बस स्टैंड हैं वे भी काफी शानदार बने हैं। एक रंग योजना और वास्तु के भवन। यात्रियों के बैठने का बेहतरीन इंतजाम और बस के लिए प्लेटफार्म हर छोटे कस्बे में भी बने हैं। 

कोप्पल में बस पांच मिनट रुकने के बाद फिर एनएच 67 पर ही आगे बढ़ जाती है। कोप्पल रायचूर जिले से कटकर नया जिला बना है। कोप्पल जिले की सीमा विश्व विरासत स्थल हंपी को भी छूती है। कोप्पल से होसपेटे 34 किलोमीटर रह जाता है। होसपेटे से पहले चार लेन वाला एनएच 50 का मिलन एनएच 67 के साथ होता है।  यहां एक टोल नाका आता है। हमारा सफर अभी जारी है...और हम रामायण काल के एक अनूठे प्रसंग में प्रवेश करने वाले हैं।

तो बने रहिए दानापानी के साथ...अगली पोस्ट पर मिलते हैं ना... ( आगे पढ़िए - यहीं खाए थे राम ने शबरी के जूठे बेर ) 

-        विद्युत प्रकाश मौर्य
(BADAMI, GADAG, KOPPAL, HOSAPETE, BUS  ) 
गदग जिला मुख्यालय का नया बस स्टैंड। 

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