Sunday, May 28, 2017

मनमोहक अगस्त्य तीर्थ और भूतनाथ मंदिर बादामी

बादामी की गुफाओं को देखते हुए जब आप सीढ़ियां चढ़ते हुए ऊंचाई पर पहुंचते हैं तो आपको नीचे पूरा शहर दिखाई देता है। साथ ही दिखाई देता है विशाल सरोवर। इस सरोवर का नाम है अगस्त्य तीर्थ। सरोवर का दायरा एक किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र में है। दरअसल बादामी के ज्यादातर दर्शनीय स्थल इसी अगस्त्य तीर्थ सरोवर के चारों तरफ निर्मित किए गए हैं। एक कोने पर गुफा मंदिर है तो दूसरे कोने पर भूतनाथ मंदिर दिखाई देता है।

अगस्त्य तीर्थ सरोवर की कथा अगस्त्य मुनि से जुड़ी हुई है। कभी यहां वातापि और इल्वाल नामक राक्षस रहते थे। दोनों अपने भोजन के लिए मेहमानों को यहां बुलाते थे। इल्वाल वातापि के शरीर का भोजन बनाकर मेहमानों को खिला देता था। मेहमान के भोजन कर लेने के बाद वह आवाज लगाता था वातापि बाहर निकलो। इसके बाद वातापि जिंदा होकर मेहमान का पेट फाड़कर बाहर आ जाता था। इस तरह मेहमान की मौत हो जाती थी। एक बार अगस्त्य मुनि को उन्होने भोज पर आमंत्रित किया। पर अगस्त्य मुनि के भोजन कर लेने के बाद आवाज देने पर भी वातापि बाहर नहीं निकल सका। इस तरह वातापि मृत्यु को प्राप्त हो गया। उनके नाम पर इस विशाल सरोवर का नाम अगस्त्य तीर्थ पड़ा है।

इस विशाल सरोवर में हमेशा लबालब पानी भरा रहता था। पर 2001 से 2005 तक कम बारिश के कारण पानी नहीं था। अब इसमें हमेशा पानी रहता है। सैलानियों के लिए सरोवर में नौका विहार का भी इंतजाम है। सरोवर के एक तरफ आप अनुमति प्राप्त करके पहाड़ों पर ट्रैकिंग के लिए भी जा सकते हैं। यहां सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों का रमणीक नजारा दिखाई देता है।  

बादामी की सुबह मैं अपने होटल से अकेला टहलने निकल पड़ा हूं। रास्ता पूछते हुए अगस्त्य सरोवर तक पहुंच गया हूं। मेरी मंजिल है भूतनाथ मंदिर। सरोवर के उत्तरी कोने पर भूतनाथ मंदिर स्थित है। वैसे मंदिर सुबह 8 बजे खुलता है। इस देवालय में विशाल मुख्य मंडप, सभा मंडप, अंतराल और गर्भगृह बने हैं। कहा जाता है कि मांडव्य मुनि की अभिलाषा पर शिव ने यहां भूतनाथ के रुप में रहना स्वीकार किया था।
यहां हुई अभिषेक और ऐश्वर्या की शादी 
भूतनाथ मंदिर के एक तरफ विशाल सरोवर तो दूसरी तरफ पहाड़ी की पृष्ठभूमि है। इनके बीच मंदिर का परिदृश्य बड़ा ही मोहक बन पड़ता है। इस नजारे पर नजर पड़ी दक्षिण के फिल्मकार मणिरत्नम की। उनकी 2007 में आई फिल्म गुरू के दृश्य बादामी में ही फिल्माए गए हैं। अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्य राय की यह फिल्म तमिल, तेलुगू और हिंदी में बनी थी। इस फिल्म का गीत...कोसा है बारिश का कोसा है... बादामी में फिल्माया गया। बादामी के स्थानीय लोग बताते हैं कि फिल्म में अभि और ऐश्वर्य के विवाह वाले प्रसंग की पूरी शूटिंग भूतनाथ मंदिर के परिसर में हुई थी। खैर यह तो फिल्मी शादी थी पर वास्तविक जिंदगी में भी दोनो पति पत्नी बने। 

भूतनाथ मंदिर में एएसआई की ओर तैनात चौकीदार मुझे सुबह सुबह मंदिर को दिखाने में पूरी मदद करते हैं। मंदिर के आसपास सरोवर में सीढ़ियां बनी हुई हैं। मार्च महीने में पानी का स्तर थोड़ा कम है। पर कहते हैं कि बारिश के दिनों में बादामी के भूतनाथ मंदिर के आसपास का सौंदर्य काफी बढ़ जाता है। तो कभी बारिश के दिनों में आइए ना बादामी...
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
(BHOOTNATH MANDIR, BADAMI, GURU MOVIE ) 
बादामी का भूतनाथ मंदिर (करीब से) 



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