Saturday, May 27, 2017

कर्नाटक में अंजता एलोरा- बादामी की गुफाएं

अगर आपने अजंता एलोरा की यात्रा की है तो कुछ इसी तरह की गुफाएं कर्नाटक के बादामी में देख सकते हैं। बादामी की गुफाएं शैव, वैष्णव और जैन मतों की प्रतिमाओं को प्रदर्शित करती हैं। इन सबको एक ही परिसर में देखा जा सकता है। अजंता की तरह यहां भी विशाल पहाड़ को काट कर गुफाओं का निर्माण किया गया है।

पट्टडकल, एहोल, महाकूटा, बनशंकरी घूमने के बाद हमलोग पहुंच गए हैं बादामी शहर में। आटो वाले हमें लेकर पहुंचे हैं बादामी की गुफाओं के पास। वे पार्किंग में आटो लगा देते हैं। हमलोग स्मारक देखने के लिए टिकट खरीदते हैं।
बादामी में पहाड़ों को काट कर कुल चार गुफाएं बनाई गई हैं। इन गुफाओं से होकर सीढ़ियां चढ़ने पर अगस्त्य सरोवर का सुंदर नजारा दिखाई देता है।


गुफा तक तक जाने के लिए कुछ सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। बादामी तक आने वाले सैलानियों को बलुआ पत्थर से बने इन गुफा मंदिरों अवश्य देखने पहुंचना चाहिए। ये मंदिर अपनी सुंदर नक्काशियों के लिए जाने जाते हैं। इन नक्काशियों में पौराणिक तथा धार्मिक घटनाएं का सुंदर चित्रण देखा जा सकता है।

भगवान शिव को समर्पित है पहली गुफा - 
पहली गुफा भगवान शिव को समर्पित है। यह 550ई में निर्मित है। बादामी की पहली गुफा मंदिर सबसे प्राचीन है। इस मंदिर में भगवान शिव के अर्धनारीश्वर और हरिहर अवतार की नक्काशियां देखी जा सकती हैं। साथ ही साथ भगवान शिव का तांडव नृत्य करते हुए नटराज का अवतार देखा जा सकता है। एक ओर भगवान शिव का हरिहर अवतार देखा जा सकता है तो बाईं ओर भगवान विष्णु का अवतार देखा जा सकता है। प्रवेश द्वार पर द्वारपाल की सुंदर आकृति बनी है। वहीं नंदी पर सवारी करते शिव को देखा जा सकता है। पहली गुफा में महिषासुर मर्दिनी तथा गणपतिशिवलिंगम और शन्मुख की मूर्तियां भी देख सकते हैं। महिषासुर मर्दिनी को आठ हाथ दिखाए गए हैं। गुफा में गर्भ गृह में शिवलिंगम स्थापित है। गुफा की बनावट ऐसी है कि यहां तक प्राकृतिक रोशनी पहुंचती रहती है। तकरीबन 1500 साल बाद भी इसका सौंदर्य मोहित करता है। पर चलिए आगे भी चलना है।

विष्णु को समर्पित है दूसरी गुफा
कोई 50 से ज्यादा सीढ़ियां चढ़कर हम आ पहुंचे हैं गुफा नंबर दो में। यह छठी शताब्दी का बना हुआ है। शांत मुद्रा में खड़े दो द्वारपाल आपका यहां पर स्वागत करते हैं।
गुफा मंदिर नंबर दो भगवान विष्णु को समर्पित है। यहां दायीं ओर वामन तथा त्रिविक्रम अवतार को देखा जा सकता है। दायीं ओर नजर डालेंगे तो वराह और गण की प्रतिमाएं देखी जा सकती हैं। इस मंदिर की छत पर पुराणों के दृश्य दिखाए गए हैं जिनमें भगवान विष्णु का गरुड़ अवतार दिखाया गया है। यहां कृष्ण लीला का भी सुंदर चित्रण है।

गुफा नंबर तीन में भी विष्णु

इस गुफा का निर्माण चालुक्य राजा मंगलेश ने अपने सौतेले भाई कीर्तिवर्मन प्रथम के शासन काल में कराया। इसमें बाकी गुफाओं की तरह एक खुला बरामदा, स्तंभ वाला सभा मंडप बना हुआ है। यहां एक अभिलेख भी उत्कीर्ण कराया गया है जिसमें गुफा के निर्माण संबंधी जानकारी दी गई है। सौ फीट गहरे गुफा मंदिर संख्या तीन में भगवान विष्णु त्रिविक्रम और नरसिंह के अवतार दिखाए गए हैं। इसके अलावा पर्यटक यहां के भित्ति चित्रों में भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह समारोह के सुंदर नजारे भी देख सकते हैं। बरामदे के सामने वाले स्तंभ पर यहां मिथुन युग्म देखे जा सकते हैं। इंद्र, वरुण, ब्रह्मा, यम, काम रति की प्रतिमाएं भी देखी जा सकती हैं।

जैन धर्म की समर्पित है गुफा नंबर चार

कोई 150 सीढ़ियां चढ़कर सबसे ऊपर पहुंचने पर आप जैन गुफा में पहुंच जाते हैं। गुफा मंदिर 4 जैन धर्म को समर्पित है। इसका निर्माण सातवीं सदी में हुआ। जहां भगवान महावीर का बैठी अवस्था में एक चित्र है तथा साथ ही साथ तीर्थंकर पार्श्वनाथ का चित्र भी हैं। मंडप में कई और तीर्थंकरों की छोटी और बड़ी प्रतिमाएं बनाई गई हैं। यहां गुफा के निर्माण करने वाले कोलीमांची नामक शिल्पी का नाम भी उत्कीर्ण है। 

हालांकि इस गुफा का प्रवेश द्वार पूरब की तरफ से था। गुफा नंबर 3 और 4 के बीच एक दीवार हुआ करती थी। पर अब एक क्रम से सभी गुफाओं तक पहुंजा जा सकता है।
सबसे ऊपर की गुफा पर पहुंचने के बाद यहां से आप बादामी शहर का नयनाभिराम नजारा देख सकते हैं। यहां आप कुछ घंटे बैठकर शहर के सौंदर्य को निहार सकते हैं।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
-        (BADAMI CAVE, SHIVA, JAIN, VISHNU TEMPLE )

  
बादामी के गुफा नंबर चार में जैन तीर्थंकरों की मूर्तियां। 

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