Thursday, May 4, 2017

सबसे बड़ा गुंबज - गोल गुंबज बीजापुर

दिन भर बीजापुर घूमते हुए सबसे अंत में हमलोग आ पहुंचे हैं गोल गुंबज। वही गोल गुंबज जिससे बीजापुर की पहचान है। यह बीजापुर का सबसे विशाल ऐतिहासिक स्मारक भी है। रेलवे स्टेशन से गोलगुंबज की दूरी महज दो किलोमीटर है। यह रेलवे स्टेशन से दिखाई भी देता है। आटो रिक्शा से 10 रुपये देकर आप यहां तक पहुंच सकते हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित इस इमारत में प्रवेश का टिकट 15 रुपये का है। कैमरा या वीडियो कैमरे का शुल्क अलग से है। टिकट घर के पास एक क्लाक रूम भी जहां आप अपने बैग आदि जमा करवा सकते हैं। क्लाक रुम का शुल्क 10 रुपये प्रति नग है। यहां पेयजल और कैंटीन आदि का भी बेहतर इंतजाम है। थके हैं तो गोलगुंबज के विशाल लॉन में हरी हरी घास पर आराम भी फरमा सकते हैं।  

सवाल यह कि गोलगुंबज क्या है... यह बीजापुर के सुल्तान मुहम्मद आदिल शाह  द्वितीय का मकबरा है। आदिलशाह ने 1626 से 1656 तक शासन किया। इसका निर्माण फ़ारसी वास्तुकार दाबुल के याकूत ने 1656 ई० में करवाया था।कहते हैं कि गोलगुंबज का निर्माण 1626 में ही आरंभ हो गया था। इसके निर्माण में 30 साल का समय लगा। यह 1656 में पूरी तरह से तैयार हुआ। 

देश का सबसे बड़ा गुंबद  - गोल गुंबज की सबसे खास बात यह है कि विश्व का दूसरा सबसे बड़ा गुम्बद है। वहीं भारत का सबसे बड़ा गुंबज है। दुनिया में सबसे बड़ा गुंबज सेंट पीटर्स बेसिलिका वेटिकन सिटी का माना जाता है।

गुंबज मतलब क्या...  गुंबद ऊंची और आकार में गोलार्ध या उससे भी न्यूनाधिक गोल छत को कहते हैं। गोलगुंबज में 44 मीटर (140 फुट) बाहरी व्यास वाला एक विशाल गुम्बद है।  18,000 वर्ग फीट में बना यह विश्व का सबसे बड़ा एकल कक्ष वाला मकबरा है। इसके निर्माण में किसी मध्य आधार का इस्तेमाल नहीं हुआ है।

गोल गुंबज में चतुर्भुज बनने वाले एक-दूसरे को काटते हुए आठ मेहराब हैं। इनसे लगा हुआ गुम्बद त्रिकोण बनता है। इसके चारों कोणों पर गुम्बदनुमा छतरी है। गुंबज का निर्माण अष्टकोणीय है। इसके चारों तरफ छोटी छोटी मीनारे बनीं हैं। इनके अन्दर उपर जाने के लिए सीढ़ियां भी बनाई गई हैं। हर मीनार के ऊपरी तल बड़े गुम्बद को घेरते हुए एक गलियारा बना हुआ है।


फुसफुसाने वाला गलियारा - आपने वो गीत - धीरे धीरे बोल कोई सुन न ले तो सुना ही होगा.... जी हां दीवारों के भी कान होते हैं। यह गोलगुंबज आकर पता चलता है। मुख्य गुंबद यानी गोल गुंबद के ऊपर अंदर की तरफ विशाल गलियारा बना हुआ है। इस गलियारा को हिवसपरिंग गैलरी यानी फुसफुसाने वाला गलियारा भी कहते हैं। यहां आप धीमी आवाज में भी बात करेंगे तो उसकी प्रतिध्वनि दूसरी तरफ जाकर देर तक सुनाई देती है। यह गलियारा ध्वनि विज्ञान के हिसाब से बना है। एक ओर से आप जो शब्द बोलते हैं वह दूसरी ओर जाकर बिल्कुल स्पष्ट सुनाई देता है। गोल गुम्बद के ऊपर से बीजापुर शहर का पूरा नजारा बडा ही सुंदर दिखाई पड़ता है।

गोल गुंबज के मुख्य हॉल के भीतर चारों ओर सीढ़ियों से घिरा हुआ एक चौकोर चबूतरा बना हुआ है। इस चबूतरे के मध्य एक कब्र का पत्थर है, जिसके नीचे कब्र बनाई गई है। गोल गुंबज पर चढ़ने के बाद ऊपर से भी बने गलियारे से इस कब्र को देखा जा सकता है।


हमलोग टिकट लेने के बाद गोल गुंबज देखने के लिए आगे बढ़े। लंबे हरे भरे लॉन से गुजरने के बाद प्रवेश द्वार आता है। यहां पर कुछ तोपें प्रदर्शन के लिए रखी हैं। मकबरे में जाने से पहले जूते उतारने पड़ते हैं। सबसे पहले आप मुख्य हॉल में प्रवेश करते हैं, उसके बाद ऊपर की चढ़ाई। चढ़ने के लिए संकरी सीढ़ियां हैं। कुल 100 से ज्यादा सीढ़ियां चढ़नी हैं, पर हर कुछ सीढ़ियों के बाद विश्राम के लिए सुंदर गैलरी है। यह कोई सात मंजिल की चढ़ाई है। पर रास्ते में विश्राम स्थल और झरोखों के कारण चढ़ाई रूचिकर बन जाती है। हालांकि सीढ़ियों की चढ़ाई को थोड़ी सावधानी से चढ़ें, अन्यथा परेशानी हो सकती है।
गोल गुंबज के ऊपर पहुंच जाने के बार हर कोने से बीजापुर शहर को अलग अलग अंदाज में देखा जा सकता है। आप अगर गोल गुंबज देखने पहुंचे हैं तो कम से कम एक घंटे का समय रखें। यहां दो घंटे भी लग सकते हैं।

गोल गुंबज के अंदर कैंटीन है, बाहर भी खाने पीने के लिए कुछ अच्छे भोजनालय हैं। पर हमने रेलवे स्टेशन जाकर ही खाना बेहतर समझा। स्टेशन पर एक दक्षिण भारतीय भोजनालय मिला। वहां मसाला डोसा 35 रुपये, इडली बड़ा  35 रुपये लेमन राइस 30 रुपये। सभी खाने का स्वाद बेहतरीन इतना की हमने वड़ा पैक भी करा लिया। बादामी जाने वाले पैसेंजर ट्रेन हमारा इंतजार कर रही थी।
- vidyutp@gmail.com

(GOL GUMBAJ, BIJAPUR, ADILSHAH TOMB, LARGEST IN INDIA, WHISPERING GALLERY ) 


5 comments:

  1. गोलगुंबज के बारे में बहुत अच्छी जानकारी

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  2. बेहतरीन जानकारी, रोचक तरीके से। पढ़कर मजा आ गया

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद जी

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  3. बेहतरीन जानकारी, रोचक तरीके से। पढ़कर मजा आ गया

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