Monday, April 10, 2017

दुल्हादेव और चतुर्भुज मंदिर का सौंदर्य

चतुर्भुज मंदिर, खजुराहो...
खजुराहो के मंदिरों का दर्शन करने हम निकले तो हमारे आटो वाले भाई साहब सबसे पहले हमें चतुर्भुज मंदिर की ओर ले गए। एयरपोर्ट से आगे इकहरे रास्ते पर चलते हुए एक छोटा सा मंदिर आता है चतुर्भुज मंदिर। दक्षिणी मंदिर समूह का हिस्सा यह मंदिर त्रिरथ शैली के मंदिर का एक नूमना है। मुख्य बाजार यानी पश्चिमी मंदिर समूह से इस मंदिर की दूरी 4 किलोमीटर है।

यह मंदिर 11वीं सदी का बना हुआ है। यह मंदिर पश्चिम मुखी है। मंदिर के गर्भ गृह में भगवान शिव की 2.7 मीटर ऊंची प्रतिमा के दर्शन किए जा सकते हैं। हालांकि कुछ लोग इसे विष्णु प्रतिमा भी कहते हैं। मंदिर की बाहरी दीवारों पर खास तौर पर अर्धनारीश्वर की प्रतिमा देखी जा सकती है। इसके अलावा नरसिंह की मूर्ति और गंधर्वों और विद्याधरों की मूर्तियां भी देखी जा सकती है। मेरे अलावा मंदिर देखने कुछ विदेशी सैलानी पहुंचे हैं।
KHUDAR RIVER, KHAJURAHO

1100 शिवलिंगम है दुल्हा देव मंदिर में

चतुर्भुज मंदिर देखकर आगे बढ़ता हूं। हमलोग खूदार नदी को पार करते हैं। छोटी सी यह नदी खजुराहो शहर के पास बहती है। इस पर एक टपरा नुमा पुल है। इस नदी के तट पर ही स्थित है खजुराहो का अदभुत दुल्हादेव मंदिर। मंदिर बड़े ही खूबसूरत हरे भरे बागीचे में स्थित है। यह मंदिर खजुराहो की स्थापत्य कला का शानदार नमूना है। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर का निर्माण 1100 से 1150 के बीच हुआ।
DULHA DEV TEMPLE, KHAJURAHO


किसी समय में यह मंदिर नीलकंठेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता था। मंदिर के गर्भ गृह के द्वार पर तीन लोकों का चित्रण है। पर इस मंदिर की सबसे अदभुत विशेषता इसका शिवलिंगम है। गर्भ गृह में स्थित शिवलिंगम में कुल छोटे छोटे 1100 शिवलिंग अंकित किए गए हैं। मंदिर में मौजूद पुरातत्व विभाग के स्टाफ टार्च की रोशनी में हमें इन शिवलिंगम के दर्शन कराते हैं। समान्य दिनों में गर्भ गृह में प्रवेश वर्जित है। कहा जाता है कि इस मंदिर के शिवलिंगम के दर्शन मात्र से 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन का पुण्य मिलता है।
DULHADEV TEMPLE, KHAJURAHO

पर नीलकंठेश्वर मंदिर क नाम दुल्हा देव कैसे पड़ा। इसकी एक कहानी है। कहा जाता है कि किसी समय एक बारात मंदिर के बाहर से गुजर रही थी। पर ठीक मंदिर के समाने दुल्हा घोड़े से गिर कर परलोक सिधार गया। इसे लोगों ने शिवजी का प्रताप माना। दुल्हा बैकुंठवासी हो गया। इसके बाद से ही इस मंदिर को दुल्हा देव के नाम से स्थानीय लोग पुकारने लगे। फिर तो शिवजी इसी नाम से प्रसिद्ध हो गए। महाशिवरात्रि के समय इस मंदिर के पास बड़ा मेला लगता है। तब मंदिर को आम जनता के दर्शन के लिए खोला जाता है। स्थानीय लोगों में इस शिव मंदिर की बहुत मान्यता है।
@ Dulhadev Temple, Khajuraho
दुल्हादेव मंदिर के चारों तरफ दीवारों पर काम कला की आकर्षक मूर्तियां उकेरी गई हैं। खजुराहो का यह पहला मंदिर है जहां मैं ऐसी मूर्तियां देख रहा हूं। इन मूर्तियों की शारीरिक बनावट और मुख मुद्रा अद्भुत है। कई जगह गंधर्व और किन्नर उड़ते हुए दिखाए गए हैं।

दुल्हा देव मंदिर खजुराहो के मुख्य बाजार से दूर होने के कारण यहां कम लोग पहुंचते हैं। कोई प्रवेश टिकट नहीं है। मंदिर को देखने के अलावा आप सुंदर बागीचे में कुछ देर घूमने का लोभ नहीं छोड़ सकते हैं।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य
( (CHATURBHUJ TEMPLE, DULHADEV TEMPLE, KHUDAR RIVER, KHAJURAHO ) 

CAMPUS OF DULHA DEV TEMPLE

2 comments:

  1. कितनी बारीकी से सारी जानकारियाँ बताते चलते हैं आप के यात्रा वृतान्त... वाकई गजब की पकड़ है आप की यात्रा वृतान्त पर.

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  2. धन्यवाद, आप यूं ही हौसला बढ़ाते रहें...

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