Tuesday, April 4, 2017

विरासत को संजोए खजुराहो का जैन मंदिर समूह

खजुराहो में पूर्वी मंदिर समूह में प्रमुख है जैन मंदिर। इस परिसर में कुल 15 जैन मंदिर हैं। इसमें पार्श्वनाथ और आदिनाथ मंदिर ही मूल स्वरूप में हैं। इसके साथ ही परिसर में एक जैन संग्रहालय भी है। यहां पुस्तक बिक्रय केंद्र है जहां से आप जैन साहित्य खरीद सकते हैं। खजुराहो में पश्चिमी मंदिर समूह के बाद यह दूसरी जगह है जहां पर आसपास में छोटा सा बाजार है। यहां कई दुकाने हैं। यहां पर आप कुछ खरीददारी भी कर सकते हैं। जैन अतिथि गृह में भोजनालय भी है। हालांकि हमारी यात्रा के समय वह बंद था।  
यहां बना पार्श्वनाथ मंदिर खजुराहो के सुंदरतम मंदिरों में से एक है। यहग 68 फीट लंबा 65 फीट चौड़ा है। यह मंदिर एक विशाल जगती पर निर्मित किया गया है। मूलतः इस मंदिर में आदिनाथ की प्रतिमा थी। वर्तमान में यहां पार्श्वनाथ की प्रतिमा है जो उन्नीसवीं शताब्दी की है। इस प्रकार यह मंदिर आदिनाथ  को समर्पित था। इस मंदिर का निर्माण 950 ई. से 970 ई के बीच यशोवर्मन के पुत्र धंगदेव के शासनकाल में हुआ। एक अभिलेख के मुताबिक इस मंदिर का निर्माण जैन श्रेष्ठि पहिल द्वारा करवाया गया। जैन श्रेष्ठि पहिल द्वारा मंदिर को खजुराहों में सात वाटिकाएं बनवाकर दान में दी गई थीं। इनमें से एक पहिल वाटिका को आज भी एयरपोर्ट रोड पर देखा जा सकता है। खजुराहो प्रशासन द्वारा इस वाटिका का बेहतर रखरखाव किया गया है।
मंदिर के प्रमुख भागों में मंडप, महामंडप, अंतराल और गर्भगृह है। मंदिर के चारों तरफ परिक्रमा पथ का भी निर्माण किया गया है। मंदिर के मंडप की तोरण सज्जा के अलंकरण काफी सुंदर हैं। इसमें काफी मूर्तियां भी बनी हैं। यहां शाल भंजिकाएं, अप्सराएं और पार्श्वदेवी की मूर्तियां देखी जा सकती हैं। मंदिर में विभिन्न मुद्राओं में गंधर्व और यक्ष मिथुन ढ़ोल, तुरही, मंजिरा, शंख, मृदंग तथा ततुंवाद्य बजाते हुए सरित देवियों के ऊपर तोरण तक अंकित किए गए देखे जा सकते हैं। मंदिर के गर्भगृह में दिगंबर जैन साधु तथा साध्वी वस्त्र विहीन अवस्था में दिखाए गए हैं। मंदिर में राम-सीता और हनुमान की मूर्तियां भी देखी जा सकती हैं। अप्सराओं को की प्रतिमाएं तो अलग अलग कई भाव भंगिमाओं  देखी जा सकती हैं।
जैन मंदिर परिसर में एक विशाल कुआं स्थित है। इसके चारों तरफ श्रद्धालु बैठकर ध्यान लगाते हुए दिखाई देते हैं।

खजुराहो के जैन मंदिर समूह में आदिनाथ का मंदिर प्रमुख है। यह जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ को समर्पित है।
खजुराहो में केवल पार्श्वनाथ मंदिर में ही कृष्ण लीला से संबंधित दृश्य भी उत्कीर्ण किए गए है। खजुराहो के जैन मंदिरों पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के इतिहास के प्रोफेसर रहे मारूति नंदन तिवारी ने गहन शोध किया है। उन्होंने खजुराहो के जैन मंदिरों पर एक पुस्तक भी लिखी है।
खजुराहो के जैन मंदिर के पास ही साहू शांति प्रसाद जैन कला संग्रहालय स्थित है। इस गोल इमारत में कई मूर्तियां देखी जा सकती है। संग्रहालय का प्रवेश टिकट 10 रुपये का है। 


शांति प्रसाद जैन यहां 1977 और उससे पहले 1970 में पधारे थे, तब लोगों ने उनके संग्रहालय बनवाने का आग्रह किया था। खजुराहो के जैन मंदिरों को देखकर लगता है कि चंदेल राज्य में जैन अल्पसंख्यक होते भी आर्थिक रूप से समृद्ध और मजबूत स्थित में थे। खजुराहो में कई जैन श्रेष्ठि परिवार थे। कनिंघम लिखते हैं कि 1852 में जब वे खजुराहो आए तो पूर्वी मंदिर समूह का जैन मंदिर परित्यक्त अवस्था में था। पर बाद में जैन समाज ने इसका जीर्णोद्धार कराया। चंदेल राजा विजयपाल के पुत्र कीर्तिवर्मन के काल में खजुराहो में जैनमंदिरों का प्रयाप्त निर्माण हुआ।


ठहरने के लिए अतिथिशाला -  जैन मंदिर के परिसर में श्रद्धालुओं के लिए अतिथिशाला भी बनी है। यहां पर रियायती दरों पर ठहर सकते हैं। यहां श्रद्धालों के लिए वातानुकूलित कमरे भी उपलब्ध हैं। ( फोन – 7686274148, 7686272252 

- vidyutp@gmail.com

(KHAJURAHO, JAIN TEMPLE, GUEST HOUSE, ADINATH, PARSWANATH TEMPLE ) 


3 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’सौन्दर्य और अभिनय की याद में ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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