Friday, April 28, 2017

गोलगुंबज का शहर बीजापुर यानी विजयपुर

 बीजापुर के बारे में बचपन से सुनते आए हैं। पर जब आप रेलवे के मानचित्र में इस शहर को तलाशेंगे तो शायद नहीं मिले क्योंकि इसका नाम मिलता है विजयपुरा। वैसे स्टेशन कोड BJP  ही है। बीजापुर या विजयपुर कर्नाटक का महाराष्ट्र से लगता हुआ आखिरी जिला है। अगर दिल्ली की तरफ से ट्रेन से जा रहे हैं तो बेंगलुरु जाने की जरूरत नहीं है, यह महाराष्ट्र के सोलापुर शहर से ज्यादा करीब है। वहीं तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद भी यहां से ज्यादा दूर नहीं है। आप बेंगलुरु की तुलना में हैदराबाद या सोलापुर से बीजापुर आसानी से पहुंच सकते हैं। सिकंदराबाद से बीजापुर 412 किलोमीटर ( वाया गुलबर्गा, सोलापुर) है। 

सोलापुर से बीजापुर कुल 110 किलोमीटर है। वहीं बेंगलुरु से बीजापुर की दूरी 717 किलोमीटर है। मुंबई से बीजापुर 550 किलोमीटर तो पुणे से 380 किलोमीटर है। बीजापुर के लिए मुंबई, पुणे, सोलापुर, हैदराबाद, बेंगलरु आदि शहरों से सीधी ट्रेन है।


बीजापुर शहर की नींव कल्याणी चालुक्य राजाओं ने दसवीं -11वीं शताब्दी के बीच रखी थी। उन्होंने इस शहर का नाम विजयपुरा यानी जीत का शहर दिया था। पर बाद में आदिलशाही राज्य में विजयपुरा में कई बड़े निर्माण हुए जिसने इस शहर के देश के पुरातात्विक महत्व वाले शहरों की सूची में शामिल कर दिया। बचपन से आप गोलगुंबज बीजापुर के बारे में पढ़ते आए होंगे।

आदिलशाह ने बीजापुर में 50 मस्जिदें 20 गुंबज और कई महल बनवाए।  आज बीजापुर, जामा मस्जिद, बारह कमान, इब्राहिम रौजा, ताज बावड़ी, मल्लिके मैदान, मेहर महल जैसे स्थापत्य कला से जुड़े इमारतों के लिए जाना जाता है।  साल 2011 के जनगणना में बीजापुर की आबादी 3 लाख 11 हजार थी। शहर में मुस्लिम आबादी ज्यादा है। आबादी में यह कर्नाटक का नौंवा बड़ा शहर है।
बीजापुर रेलवे स्टेशन पर हमलोग सुबह 10 बजे उतरे हैं। छोटे से स्टेशन से बाहर निकलते ही तांगे वाले और आटोवाले घेर लेते हैं। हम उनसे बीजापुर घूमने की इच्छा जाहिर करते हैं। ट्रेन में एक सहयात्री ने बताया था कि बीजापुर घूमने का अच्छा तरीका तांगे से घूमना भी है। इससे पहले हमने बिहार के राजगीर में और तमिलनाडु के रामेश्वरम, मैसूर आदि शहरों में तांगे की सवारी की थी। तांगा अब बीते दिनों की बात होता जा रहा है। इसलिए हमने यहां तांगे वाले से बात करना ही उचित समझा। तांगे की सवारी का अपना अंदाज है। तांगा बग्घी नुमा हो तो शाही एहसास होता है। बीजापुर का तांगा अच्छा था। उन्होंने पुरा शहर घूमाने का 500 रुपये बताया। आटोवाले भी इतने ही रुपये मांग रहे थे। तो तांगा ही बेहतर था।  

तांगे वाले के पास एक छोटी सी गाइड बुक भी थी जिसमें प्रमुख दर्शनीय स्थलों की जानकारी थी। समय का कोई बंधन नहीं था। हमें बीजापुर में रात्रि विश्राम नहीं करना था, बल्कि दिन में शहर घूमने के बाद शाम तक बादामी पहुंचना था। तांगे वाले से 350 रुपये पर समझौता हो गया। और हम बैठ गए तांगे पर। अनादि और उनकी मां आगे और मैं पीछे। तांगे पर संतुलन बनाना पड़ता है। क्योंकि आगे या पीछे वजन ज्यादा कम नहीं होना चाहिए। इसके बाद घोड़ा चल पड़ा बीजापुर की सड़कों पर। टकभक...टकभक...टकभग...

बीजापुर में गर्मियों में तापमान काफी बढ़ जाता है, इसलिए यह शहर सर्दियों में घूमने के लिए मुफीद है।  पूरे शहर को देखने के लिए दिन भर का वक्त काफी है।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य

 (VIJAYPURA, BIJAPUR, GOL GUMBAJ, TANGA RIDE ) 

 
A View of Vijaypura city from GOLGUMBAJ 

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