Tuesday, April 18, 2017

और बीस रुपये में खरीदें कामसूत्र

संयोग से आज विश्व विरासत दिवस है...तो इस मौके पर पेश है विश्व विरासत स्थलों शामिल खजुराहो पर आखिरी आलेख...

दुनिया भर के आने वाले सैलानियों के लिए खजुराहो के मंदिर आकर्षण का केंद्र तो हैं ही पर उसके साथ ही ये प्रसिद्ध स्थल लोगों को मिथुन मूर्तियों के कारण भी आकर्षित करता है। हालांकि खजुराहो के मंदिरों में उकेरी गई मूर्तियों में सिर्फ 10 फीसदी ही मिथुन मूर्तियां हैं। पर खजुराहो के बाजार में आपको कामसूत्र से जुडी हुई सीडी, किताबें, पोस्टर और खिलौने बिकते हुए मिल जाएंगे। महर्षि वात्सायन के कामसूत्र की संक्षिप्त रंगीन पुस्तकें यहां दिन भर घूम घूम कर बेचते हुए लोग मिल जाते हैं। इन पुस्तकों को 30 से 40 रुपये मांगने के बाद महज 20 रुपये में बेच डालते हैं। इसके अलावा खजुराहो की तस्वीरों वाली अलबम और परिचयात्मक पुस्तकें भी दिखाई देती हैं।
जैन मंदिर के बाहर एक हाकर मुझे मिलता है। वह कहता है भाई कामसूत्र की सीडी ले लो। महज 120 रुपये में। मैंने कहा मुझे नहीं चाहिए। वह फिर सीडी 80 रुपये में देने को तैयार हो जाता है। वह मुझे आश्वस्त करता है कि जैसी तस्वीरें आपने यहां मंदिरों मे देखी है यह सीडी उससे आगे की है। पर साथ ही वह यह भी कहना नहीं भूलता कि ये कोई ब्लू फिल्म नहीं है। खैर मैं सीडी नहीं खरीदता। आगे कुछ लोग चाबी रिंग और छोटे छोटे सेक्स टॉय बेचते हुए मिल जाते हैं। इन खिलौनों में एक्शन दिखाई देता है। पर मैं इसे लेकर कहां दिखाउंगा। किसी को उपहार में भी तो नहीं दे सकता। मैं मना कर देता हूं। पर कुछ किताबें जरूर खरीद लेता हूं।


खजुराहो के सारे मंदिर देख लेने के बाद पश्चिम मंदिर समूह के सामने बाहर खजुराहो का संग्रहालय जरूर देखें। इस संग्रहालय में वे मूर्तियां देखी जा सकती हैं जो अलग अलग उन मंदिरों से लाई गई हैं जो मंदिर अब अपना अस्तित्व खो चुके हैं। छोटे से संग्रहालय का प्रवेश टिकट 10 रुपये का है। विदेशी नागरिकों के लिए टिकट 250 रुपये का है। इसके अंदर फोटोग्राफी की मनाही है।
शाम को लाइट एंड साउंड शो देखने के बाद खजुराहो के बाजार में पैदल घूमने निकल पडता हूं। इस बाजार में एक सुंदर का झोला पसंद आ जाता है 200 रुपये का। महिलाओं के लिए स्कर्ट, टॉप और पायजामा आदि यहां बड़े ही डिजाइनर और वाजिब दाम पर मिलते हैं। ये ज्यादातर खजुराहो के आसापास के बाजारों में बनते हैं। आप इनकी खरीददारी शौक से कर सकते हैं।

अगले दिन सुबह सुबह मार्निंग वाक पर निकलता हूं। एयरपोर्ट रोड पर पहिल वाटिका और शिल्प ग्राम दिखाई देता है। कुछ दिनों बाद ही यहां खजुराहो नृत्य महोत्सव होने वाला है। यह महोत्सव हर साल फरवरी महीने में होता है। इस दौरान खजुराहो के सारे होटल पूरी तरह भर जाते हैं। इस दौरान आना हो तो अग्रिम आरक्षण कराकर ही यहां पहुंचे। अगर आप एक दिन से ज्यादा खजुराहो में हैं तो पन्ना में हीरे की खान देखने जाने का कार्यक्रम बना सकते हैं। इसके अलावा खजुराहो के आसपास में स्नेह प्रपात, पांडव प्रपात, गंगल झील आदि स्थानों की सैर के लिए जा सकते हैं।

सुबह 9.30 बजे की ट्रेन है खजुराहो से वापसी की। उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस। ट्रेन पकड़ने के लिए नास्ता छोड़ देता हूं। उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में आगरा कैंट तक आरक्षण है। ट्रेन समय पर चल पड़ती है। ट्रेन में एक रेलवे कर्मचारी मिलते हैं जो मुझे बुंदेली में गीत गाकर सुनाते हैं। उनके गीत सुनते सुनते मैं महोबा पहुंच गया हूं। यहां रेलवे स्टेशन पर अच्छी कैंटीन है। कैंटीन में 35 रुपये की ( पार्सल 45 रुपये) खाने की थाली उपलब्ध है। यहां मैं एक थाली लेकर अपनी सीट पर आ जाता हूं। देश के दो प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों खजुराहो और उदयपुर को जोडने वाली ये ट्रेन अपनी गति से कुलांचे भर रही है। हरपालपुर, झांसी, ग्वालियर जैसे स्टेशन पीछे छूटते जा रहे हैं।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य  

   (KHAJURAHO, KAMSUTRA, MARKET, UDAIPUR INTERCITY EXPRESS )  Remember it's a world heritage site
खजुराहो से वापसी में लहलहाते सरसों के खेत....

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