Sunday, April 16, 2017

पंचायतन शैली का सुंदर नमूना विश्वनाथ मंदिर

खजुराहो के पश्चिमी मंदिर समूह के परिसर में कंदरिया महादेव  मंदिर के बाद जगदंबी मंदिर, चित्रगुप्त ( सूर्य) मंदिर, पार्वती मंदिर, विश्वनाथ मंदिर और  नंदी मंडप देखे जा सकते हैं। मैं जब पहुंचा हूं विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य चल रहा है।

विश्वनाथ मंदिर खजुराहो के शिव मंदिरों में अत्यंत महत्वपूर्ण है। विश्वनाम मंदिर का निर्माण 1002 से 1003 के दौरान यशोवर्मन के पुत्र राजा धंग के शासनकाल में हुआ। विशाल जगती पर स्थित यह मंदिर अति सुंदरों में से एक है। मंदिर की लंबाई 89 फीट और चौड़ाई 45 फीट है। पंचायतन शैली का बना हुआ यह मंदिर शिव भगवान को समर्पित है। पर इसके उपमंदिरों में दो ही शेष बचे हैं। गर्भगृह में शिवलिंग की स्थापना की गई है। मंदिर के ठीक समाने एक नंदी मंडप मे नंदी की विशाल प्रतिमा सुशोभित है। विश्वनाथ मंदिर में भी 600 से ज्यादा छोटी छोटी प्रतिमाएं हैं। कुछ मिथुन मूर्तियों के अलावा सुंदर अप्सराएं भी यहां उकेरी गई हैं। ये अप्सराएं अदभुत सौंदर्य बिखेरती हैं। यहां मंदिर की दीवार पर चंदेल राजा धंग का अभिलेख देखा जा सकता है। इस अभिलेख में संस्कृत की 33 पंक्तियां हैं। विश्वनाथ मंदिर के बायीं तरफ पार्वती मंदिर स्थित है।

जरूर देखें खजुराहो में ध्वनि और प्रकाश कार्यक्रम

अगर खजुराहो में शाम को भी मौजूद हैं तो लाइट एंड साउंड शो जरूर देखें। यह शो पश्चिमी मंदिर समूह के परिसर में ही होता है। इसका टिकट 200 रुपये का है। हर रोज दो शो होते है। पहला शो अंगरेजी का जो शाम 6.30 बजे शुरू होता है, दूसरा शो हिंदी का है जो शाम 7.30 बजे शुरू होता है। एक घंटे के इस शो का टिकट 200 रुपये का है। ध्वनि और प्रकाश के माध्यम से एक घंटे में खजुराहो शहर, चंदेल राजवंश का इतिहास, खजुराहो के मंदिरों के कला शिल्प को समेटने की खूबसूरत कोशिश की गई है इस लाइट एंड साउंड शो में।
पश्चिमी मंदिर समूह के पहला प्रवेश द्वार टिकट घर के पास है, जहां से मंदिर देखने के लिए प्रवेश करते हैं। लाइट एंड साउंड शो इससे 200 मीटर आगे के दूसरे प्रवेश द्वार के पास होता है। इसके लिए टिकट भी शाम को ही मिलते हैं। शो का स्थल शिवसागर तालाब के समाने है। शो विश्वनाथ मंदिर और नंदी मंडप के पास हरित ग्राउंड में होता है।
चौदहवीं सदी का यात्री इब्नबतूता खजुराहो का वर्णन बड़े ही रोचक ढंग से करता है। वह इस नगर को कचराद या कजुसहा लिखता है। वह लिखता है कि एक मील में फैले सरोवर के आसपास कई मंदिर हैं। हालांकि इन मंदिरों की मूर्तियों के आंख, नाक और कान मुसलमानों ने काट दिए हैं। सरोवार के चारो कोनों पर योगी लोग तपस्या करते हैं। इन योगियों के केश पैरों तक लंबे होते हैं। इनके शरीर में भभूत लगी रहती है।

इब्नबतूता लिखता है कि तपस्या के कारण उनका रंग पीला हो गया है। इन साधुओं के पीछे काफी मुसलमान भी लगे रहते हैं। क्योंकि इन साधुओं की कृपा से कुष्ठ रोग जैसी बीमारियां ठीक हो जाती हैं। इब्नबतूता के मुताबिक इन साधुओं की सेवा से ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।

-    - विद्युत प्रकाश मौर्य  
 ( KHAJURAHO, VISHWANATH TEMPLE, LIGHT AND SOUND SHOW )  ( Remember it's a world heritage site )





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