Saturday, April 8, 2017

खजुराहो में सबसे पुराना है 64 जोगिनी मंदिर

सुबह सुबह खजुराहो की सड़कों पर टहलने निकला हूं। शिव सागर तालाब के पीछे स्थित दक्षिण पश्चिम कोने पर 64 जोगिनी मंदिर के अवशेष देखने जा पहुंचा हूं। यह मंदिर खजुराहो के मंदिरों के पश्चिमी समूह में आता है। हालांकि देश के कई शहरों में 64 जोगिनी मंदिर हैं। इनमें मुरैना जिला का मितावली और जबलपुर और हीरापुर ओडिशा का 64 जोगिनी मंदिर प्रमुख है। पर खजुराहो का 64 जोगिनी मंदिर अब भग्वनावशेष अवस्था में पड़ा है। यह खजुराहो आने वाले सैलानियों की दर्शनीय स्थलों की सूची में नहीं रहता है। हालांकि यह भारत का सबसे पुराना योगिनी मंदिर है।
योगाभ्यास करने वाली स्त्री को योगिनी कहा जाता है।

ये 64 जोगिनियां आदि शक्ति मां काली का अवतार मानी जाती हैं। कहा जाता है कि घोर नामक दैत्य का नाश करने के लिए मां ने 64 अवतार लिए थे। यह भी कहा जाता है कि 64 जोगिनियां माता पार्वती की सहेलियां हैं। ये सभी दस महाविद्याओं और सिद्ध विद्या की जानकार हैं। सभी जोगिनियां तंत्र विद्या और योग विद्या से निकट संबंध रखती हैं। इंद्रजाल, मारण, वशीकरण, सम्मोहन, जादू आदि का ज्ञान इनकी कृपा से आता है। इसलिए तांत्रिक साधना करने वाले लोग इन मंदिरों के पास साधना करते हैं।

यह खजुराहो का अकेला ऐसा मन्दिर है जिसकी योजना आयताकार बनाई गई है। इस मंदिर का निर्माण काल साल 875-900 ई. के आसपास माना जाता है। यह मंदिर 64 योगिनी को समर्पित है जो देवी मां के स्वरूप मानी जाती हैं। 64 योगिनी का ये मंदिर कई मामलो में अनूठा है। स्थानीय ग्रेनाइट से बना यह एकमात्र मंदिर है। इस मंदिर का डिज़ाइन साधारण और बिना किसी सजावट के है। इसकी दीवारों पर खजुराहो के दूसरे मंदिरों की तरह नक्काशी की कमी है।

इस मंदिर में 64 योगिनियों का निवास बनाया गया है। इनमें से एक बड़ा मंदिर देवी महिषासुर मर्दिनी के रूप में देवी दुर्गा को समर्पित किया गया है। बाकी मंदिरों का निर्माण मैत्रिका ब्राह्मणी और महेश्वरी के लिए है। यह मंदिर खजुराहों के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। इसका विन्यास उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर है तथा यह मंदिर 18 फीट जगती पर आयताकार निर्मित है। इसमें बहुत सी कोठरियां बनी हुई हैं। प्रत्येक कोठरी 2.5 फीट चौड़ी और 4 फीट लंबी है। इनका प्रवेश द्वार ढाई फीट ऊंचा और 16 इंच चौड़ा है। मंदिर में बनी हर एक कोठरी के ऊपर छोटे-छोटे कोण स्तूपाकार शिखर है। शिखर का निचला भाग चैत्यगवाक्षों के समान त्रिभुजाकार है।

कई मूर्तियां चोरी हो गईं - खजुराहो के इस 64 जोगिनी मंदिर से कई मूर्तियां चोरी हो चुकी हैं। फिलहाल सिर्फ 35 मूर्तियां ही यहां बची हुई हैं। ये माना जाता है कि चंदेल राजाओं के समय यहां तांत्रिक अनुष्ठान कराए जाते थे। आजकल ये मंदिर सुनसान रहता है।

आइए जानते हैं 64 योगिनियों के नाम -

1.बहुरूप, 3.तारा, 3.नर्मदा 4.यमुना 5.शांति 6.वारुणी 7.क्षेमंकरी 8.ऐन्द्री  9.वाराही 10.रणवीरा 11.वानर-मुखी 12.वैष्णवी 13.कालरात्रि  14.वैद्यरूपा 15.चर्चिका 16.बेतली 17.छिन्नमस्तिका 18.वृषवाहन 19.ज्वाला कामिनी 20.घटवार  21.कराकाली 22.सरस्वती 23.बिरूपा 24.कौवेरी  25.भलुका  26.नारसिंही 27.बिरजा, 28.विकतांना, 29.महालक्ष्मी, 30.कौमारी, 31.महामाया 32.रति 33.करकरी 34.सर्पश्या  35.यक्षिणी 36.विनायकी 37.विंध्यवासिनी 38. वीर कुमारी 39. माहेश्वरी 40.अम्बिका 41.कामिनी 42.घटाबरी  43.स्तुति 44.काली 45.उमा 46.नारायणी  47.समुद्र  48.ब्रह्मिनी  49.ज्वालामुखी 50.आग्नेयी 51.अदिति  51.चन्द्रकान्ति 53.वायुवेगा, 54.चामुण्डा 55.मूरति 56.गंगा 57.धूमावती 58.गांधार 59.सर्व मंगला  60.अजिता 61.सूर्यपुत्री 62.वायु वीणा 63.अघोर  64. भद्रकाली। 

- vidyutp@gmail.com

(KHAJURAHO, 64 JOGINI TEMPLE ) 


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