Saturday, March 4, 2017

जीवन के हर रंग का आनंद लें केरल में

दक्षिण का खूबसूरत राज्य केरल के बारे में खास बात है कि यह सालों भर सैलानियों से गुलजार रहता है। यहां जीवन का हर रंग मौजूद है। धर्म, आध्यात्म, आयुर्वेद, वन, लंबा समुद्र तट सब कुछ। वैसे तो आप कभी भी केरल जा सकते हैं, पर मानसून में केरल घूमने का आनंद कुछ और है। इसलिए इस बार केरल टूरिज्म ने सैलानियों के लिए चेजिंग मानसून का नारा दिया है। केरल टूरिज्म के डिप्टी डाइरेक्टर केपी नंदकुमार कहते हैं कि साल 2016 की बात करें तो केरल में 10.38 लाख विदेशी सैलानी आए तो 1.32 लाख देशी पर्यटक यहां पहुंचे। साल 2015 में केरल में 1.24 लाख भारतीय राज्यों के सैलानी पहुंचे थे। इस बार देशी सैलानियों की संख्या में 6 फीसदी की वृद्धि हुई है।
KP NANDA KUMAR
पर हर साल बड़ी संख्या में विदेशी सैलानियों का स्वागत करने वाले केरल की नजर अपने देश से आने वाले सैलानियों की ओर है। इसलिए केरल टूरिज्म देश के अलग अलग हिस्सों में जाकर ट्रैवल मार्ट और रोडशो का आयोजन कर रहा है। इस सिलसिले में न सिर्फ दिल्ली बल्कि पटना, धनबाद, रांची गुवाहाटी जैसे शहरों में केरल की ओर सैलानियों को आकर्षित करने के लिए आयोजन किए जा रहे हैं। इन नए राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग केरल घूमने को लेकर उत्साहित हो रहे हैं। 
ईश्वर का अपना देश (गाड्स ओन कंट्री) की टैगलाइन के साथ केरल में आने वाले सैलानियों की संख्या पिछले दो दशक में तेजी से बढ़ी है।


ताजमहल से ज्यादा केरल का गूगल सर्च  -  हाल के सालों में केरल दुनिया के टॉप टीयर मस्ट विजिट वाले स्थानों में शुमार हो गया है। इतना ही नहीं गूगल सर्च में भारत में अब ताजमहल से ज्यादा केरल को सर्च किया गया है। लगातार प्रयासों के कारण केरल की पर्यटन से होने वाली आमदनी मे भी इजाफा हुआ है। साल 2015 में केरल की पर्यटन से आय 26,689 करोड़ रुपये थी जो इसके पिछले साल से 7.25 फीसदी अधिक थी। केरल टूरिज्म द्वारा चलाए जा रहे नए अभियानों के कारण यहां आने वाले सैलानियों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है।

इस मानसून में चलिए केरल
जैसा कि आपको पता है कि देश में मानसून सबसे पहले केरल में आता है। हर साल 5 जून के आसपास यहां बारिश शुरू हो जाती है जो अगले छह महीने तक होती रहती है। मानूसन में केरल घूमने का मजा ही कुछ और है। बारिश में यहां के समुद्र तट वन क्षेत्र और मुन्नार जैसे हिल स्टेशन और भी खूबसूरत हो जाते हैं। भले ही कई बार बारिश में कुछ घंटे आप बाहर नहीं निकलने में परेशानी आ सकती है, पर बड़ी संख्या में सैलानी केरल में बारिश के दिनों में पहुंचते हैं।   
केरल में हाल के सालों में सैलानियों की संख्या में इजाफा का बड़ा कारण यहां मेडिकल टूरिज्म भी रहा है। आयुर्वेदिक मसाज थेरेपी, पंचकर्म और स्पा थेरेपी के लिए बड़ी संख्या में सैलानी यहां पहुंचते हैं। इसके अलावा खूबसूरत समुद्र तट और आथिरापल्ली जैसे सुंदर झरने और मुन्नार जैसा हिल स्टेशन सैलानियों की खास पसंद है। देशी पर्यटकों के लिए पद्मनाभ स्वामी मंदिर समेत कई मंदिर भी खास आकर्षण है।

अगर आप मानचित्र मेंदेखें तो सुदूर दक्षिण में केरल के लंबा सा राज्य है। पर पर्यटन के नजरिए से इसे तीन हिस्सों बांट कर देखा जा सकता है। नार्थ केरल में मालापुरम, कोझिकोड (कालीकट) वायानाड, कन्नूर, कासरगोड जैसे जिले आते हैं।

वहीं सेंट्रल केरल में इडुकी, एर्नाकुलम (कोचीन), त्रिशूर और पालघाट जिले आते हैं। दक्षिण केरल में तिरुवनंतपुरम,कोल्लम, पथानमथिता, अलपुझा जैसे जिले आते हैं। यानी केरल का हर जिला अदभुत सौंदर्य और ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत समेटे हुए है। यहां आने वाले सैलानियों को कथककली, मोहिनीअट्टम जैसे नृत्य शैलियां लुभाती हैं। वहीं केरल कई किस्म के मसालों के लिए ऐतिहासिक तौर पर प्रसिद्ध है। इसलिए केरल से लौटते हुए आप अपनी पसंद के मसाले जरूर खरीदें।
 - vidyutp@gmail.com

(KERALA, MUNNAR, KATHAKALI, MOHINIATTAM, TOURISM ) 

   

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