Saturday, March 25, 2017

जोधपुर की मखनिया लस्सी मावा कचौरी शाही समोसा

जोधपुर शहर की खाने पीने को लेकर अपनी पहचान है। घंटा घर के पास मखनिया लस्सी की दुकान नजर आती है। मखनिया लस्सी मतलब लस्सी में मक्खन डाल के।  राजस्थान की तपती गर्मी में मखनिया लस्सी आपको ठंडक देने का काम करती है। यह एक ठंडा कार्बोनेटिक ड्रिंक है, जिसमें सारे पोषक तत्व हैं। यह राजस्थान की गलियों में बहुत मशहूर है। लेकिन जोधपुर में क्या सरदी क्या गरमी या बरसात लोग सालों भर मखनिया लस्सी पीते हैं। इसलिए मैंने भी दिसंबर जनवरी की ठंड में इस लस्सी का आनंद लिया। घंटाघर के पास सरदार गेट से लगे मिश्रीलाल होटल में मखनिया लस्सी का रेट है 30 रुपये का ग्लास। आप आर्डर करें और लस्सी हाजिर।

मुझे बाद में बलदेव सिंह सियाग ने पूछा कि आपने जोधपुर में मावा कचौरी खाई या नहीं, तो मैंने जवाब दिया नहीं। अगली जोधपुर यात्रा में कोशिश होगी मावा कचौरी का स्वाद लेने की। जोधपुर की मावा कचौरी का स्वाद वाकई अलग हटकर होता है। लोग कहते हैं कि किसी और जगह की मावा कचौरी उतनी स्वादिष्ट नहीं लगती। मिश्रीवाला में मावा कचौरी भी मिल रही थी। एक मावा कचौरी 40 रुपये की।

अब बात शाही समोसा की। घंटा घर केपास ही एक दुकान है शाही समोसे वाली। यहां पर एक शाही समोसा 17 रुपये का है। वह भी बिना चटनी के। मैंने एक समोसा लेकर खाया पर मुझे इसमें कुछ खास नहीं लगा। पर यह शहर की प्रसिद्ध दुकान है। यहां समोसा के अलावा और भी कई प्रकार की मिठाइयां मिलती हैं।

नीली रोशनी में नहाया घंटाघर – वास्तव में जोधपुर का घंटाघर एक सुंदर विशाल स्तम्भ है जिसमें घड़ियां लगी हैं। इसे सरदार सिंह द्वारा निर्मित किया गया था।  हालांकि आजकल घंटा घर के आसपास अतिक्रमण दिखाई देता है। इस घंटाघर के आसपास ही सदर बाजार और दूसरे लोकप्रिय बाजार हैं, जहां से आप जोधपुरी चप्पले, जूतियां और कपड़े आदि खरीद सकते हैं। यहां सैलानी राजस्थानी वस्त्रों, मिट्टी की छोटी मूर्तियों, लघु ऊंटों और हाथी आदि खरीद कर ले जाते हैं।

जोधपुरी कोट और सर प्रताप सिंह
जोधपुरी कोट सर्वकालिक तौर पर लोकप्रिय है। पर आपको पता है कि इसके डिजाइन कौन थे। जोधपुर रियासत के मुसाहिबे आला सर प्रताप सिंह जी को इसका श्रेय जाता है। तमाम फैशन आते जाते रहते हैं पर बंद गले का जोधपुरी कोट अपनी जगह अडिग है। वह 1887 का साल था जब सर प्रताप सिंह महानी विक्टोरिया के गोल्डन जुबली समारोह में हिस्सा लेने लंदन गए थे। रास्ते में जहाज में उनके सारे कपड़े गुम हो गए।
सर प्रतापसिंह विदेशी वस्त्र नहीं पहनते थे। उन्होंने एक सफेद कपडे का थान खऱीदा और उसे खुद डिजाइन किया। पर लंदन में कोई दर्जी इसकी सिलाई करने वाला नहीं मिल रहा था। बहुत खोजबीन पर एक दर्जी ने इसकी सिलाई की। सर प्रताप सिंह ने इस कोट को पहना और इस तरह जोधपुरी कोट चलन में आया। बंद गले का कोट होने के कारण यह सर्दियों में पहनने के लिए मुफीद रहता है। इसको पहनने के बाद आपको टाई बांधने की जरूरत नहीं रह जाती है।

अब जोधपुर से चला चली की वेला है। शहर का मुख्य बस स्टैंड पावटा इलाके में है। घंटाघर से कोई दो किलोमीटर आगे है पावटा। 
जोधपुर के पावटा में में रात को गरमा गरम दूध। 
पावटा में एक होटल में रात के खाने के लिए रुकता हूं। मुलतान स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट में थाली 60 रुपये की। खाने के बाद सड़क पर कड़ाह में दूध उबलते देखा। काफी लोग यहां रात में दूध पीते दिखाई दिए। पूरे जोधपुर शहर में जगह जगह कच्चा दूध शाम को बिकते हुए देखता हूं। लिखा है चौहटा का दूध। आज का भाव लिख कर दरें लिखी हैं, पर दूध की दरें अलग अलग हैं। एक दुकानदार बताता है जैसी क्वालिटी वैेसे दाम।  मैंने आनलाइन बस का टिकट बनवाया है। एमआर ट्रैवल्स की बस रात को 10.45 बजे खुलने वाली है जयपुर के लिए। जोधपुर से जयपुर, उदयपुर, दिल्ली, भीलवाड़ा, सूरत, बड़ौदा मुंबई तक की निजी बसें खुलती हैं। इन सबमें ऑनलाइन आरक्षण कराया जा सकता है। बस में अपनी सीट पर आकर सो जाता हूं। रात में बस पाली जिले में किसी रेस्टोरेंट पर रुकती है। सुबह हुई तो बस जयपुर रेलवे स्टेशन पहुंचने की जानकारी दे रही थी।
-    ---- विद्युत प्रकाश मौर्य
  (MAKHANIA LASSI, MAVA KACHAORI, SHAHI SAMOSA, JODHPUR, RAJSTHAN ) 

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