Thursday, March 23, 2017

जोधपुर कचहरी और मुसाहिबे आला सर प्रताप सिंह जी

मेहरानगढ़ और उम्मेद भवन के अलावा जोधपुर में शहर के बीचों बीच जोधपुर कचहरी का भवन भी स्थापत्य कला के लिहाज से देखने लायक है। इस भवन का निर्माण  कचहरी भवन का निर्माण 1886 में ब्रिटेन की महारानी क्वीन विक्टोरिया की गोल्डेन जुबली के यादगार में कराया गया था। इसका निर्माण महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय और सरदार सिंह मारवाड़ द्वारा कराया गया।  इस भवन का निर्माण 11 सालों में यानी 18897 में पूरा हुआ।  इस भवन के निर्माण काल में जोधपुर राज्य के प्रधानमंत्री महाराज सरदार सिंह थे। उनके अभिभावक मुसाहिब आला सर प्रताप सिंह थे। भवन के बीचों बीच सर प्रताप सिंह की विशाल मूर्ति स्थापित की गई है। 


जोधपुर के लोग उनका बड़ा सम्मान करते हुए दिखाई देते हैं। मैं लोगों को आकर मूर्ति के चरण स्पर्श करते और माल्यार्पण करते हुए देखता हूं।  सर प्रतापसिंह जी जोधपुर के महाराजा तख़्तसिंह जी के छोटे पुत्र थे,वे जोधपुर के राजा तो नहीं बने पर उनका सम्मान राजाओं की तरह होता है। वे जीवन भर जोधपुर के मुसाहिबे आला ( युवराज) ही बने रहे। वे खुद तो पढ़ लिखे नहीं थे लेकिन उन्होंने मारवाड़ में शिक्षा की ज्योति जगाने के लिए बहुत काम किया। उन्होंने मारवाड़ में बहुत सारे स्कूल खुलवाए। वे बाल विवाह और मृत्यु भोज जैसी सामाजिक बुराइयों के भी खिलाफ थे। उन्होंने जोधपुर के महाराजा उम्मेद सिंह का विवाह भी साधारण घर की कन्या से करवाया। जोधपुर के प्रसिद्ध चोपसानी स्कूल की स्थापना उनके प्रयासों से हुई। सर प्रताप सिंह ने जोधपुर रिसाला नाम की एक मिलिट्री इन्फेंट्री गठन किया था। इसमे एक सिपाही से लेकर अफसर तक के लिए खादी पहनना अनिवार्य था। उनके इन महान कार्यो के वजह से ही जनता में वे आज भी पूजे जाते हैं। सर प्रताप सिंह जी के बारे में एक और रोचक बात है कि वे जोधपुर कोट के डिजाइनर थे।
इस भवन को जुबली कोट या फिर बावन कचहरियां के नाम से भी जाना जाता है। इस भवन का डिजाइन ब्रिटेन के चर्चिच वास्तुविद स्वेनस जैकब ने बनाया था। इसके निर्माण के दौरान जोधपुर रेलवे के जनरल मैनेजर  डब्लू होम इसकी निगरानी कर रहे थे। इसके निर्माण के इंजीनियर नागौर निवासी जगधर श्री इसहाक थे। इसके निर्माण में तब कुल 4 लाख 50 रुपये खर्च हुए थे। इस भवन के निर्माण काल के दौरान कई साल तक हजारों लोगों को रोजगार मिला था। यह भवन वास्तु कला की लिहाज से देश के संरक्षित स्मारकों में शामिल किया गया है। इसका संरक्षण इंटैक के जिम्मे है। भवन दो मंजिला है। विशाल लंबे भवन के दोनों तरफ सुंदर छतरियां बनी हुई हैं।
स्वतंत्रता के बाद जोधपुर कचहरी के इस भवन में जिला कलेक्टरेट और संभागीय आयुक्त का दफ्तर संचालित होता है। इसलिए दिन भर इस भवन में चहल पहल बनी रहती है। पर मारवाड़ के पुरखों के इस विरासत की देखभाल आजकल बेहतर ढंग से नहीं हो पा रही है। समाचार पत्रों में छपी खबर के मुताबिक भवन की बालकनी कई जगह टूट रही है। जालियां छतिग्रस्त हो रही हैं। पर प्रशासन इस विरासत वाले भवन के ररखाव को लेकर गंभीर नहीं है। भले आंतरिक कक्षों को बेहतर ढंग से संवारा गया हो पर बाहरी दीवारं की हालत खराब हो रही है। (राजस्थान पत्रिका 20-9-2015)
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( JODHPUR KACHAHRI, SIR PRATAP SINGH ) 








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