Tuesday, March 21, 2017

अदभुत अनूठी मंडोर की छतरियां और देवल

जोधपुर के मंडोर की पहचान मंडोर की छतरियों और यहां बने देवल से है। ऐसी अनूठी छतरियां देश में कहीं और एक साथ देखने को नहीं मिलती हैं। मंडोर उद्यान में ये छतरियां एक पंक्ति में अदभुत सौंदर्य प्रस्तुत करती हैं। मंडोर की इन छतरियों को खाली गुम्बद के नाम से भी जाना जाता है।

मंडोर के देवलों की श्रंखला में राव चंदा से लेकर महाराजा महाराजा तख्त सिंह के देवल देखे जा सकते हैं। आप कह सकते हैं कि मंडोर एक तरह से मारवाड़ शासकों की कब्रगाह है। यानी शाही श्मसान घाट। मरने के बाद यादगारी को अजर अमर करने की एक शासकीय कोशिश। इस तरह की शाही छतरियां राजस्थान के दूसरे शहरों में भी देखी जा सकती हैं। खासतौर पर जयपुर, अलवर, भीलवाड़ा आदि शहरों में। मंडोर की इन छतरियों को आपने कई फिल्मों में भी देखा होगा।

दुनिया के मशहूर फिल्म कलाकार जैकी चैन जब यहां शूटिंग करने पहुंचे तो उन्होंने मंडोर की छतरियां देखी और इसकी खूब सराहना की। फिल्म 'कुंग फू योगा' की शूटिंग में जैकी चैन ने मंडोर की छतरियों के साथ की है। वहीं अभिनेत्री सनी लियोनी फिल्म लीला की शूटिंग के सिलसिले में जोधपुर आई थीं। जोधपुर के मंडोर पचकुंडा की छतरियों और मंदिर में इस फिल्म के कई दृश्य शूट किए गए थे। 


मंडोर की इन छतरियों में सबसे बड़ी छतरी महाराजा अजित सिंह की है। अजीत सिंह के देवल का निर्माण उनके उत्तराधिकारी महाराजा अभय सिंह ने 1724 से 1749 के बीच कराया था। पूरब रुख के इस तीन मंजिला देवल का निर्माण लालघाटू पत्थरों से किया गया है। इस देवल के अंदर पत्थरों पर बेमिशाल कलाकृतियां उकेरी गई हैं। यहां शिव पार्वती, कुबेर, लक्ष्मी नारायण, हरिहर, वायु, यम, अग्नि, गणेश आदि देवताओं की प्रतिमाएं दीवारों पर देखी जा सकती हैं। इस देवल में उत्कीर्ण प्रतिमाओं में तत्कालीन समाज के आभूषणों की झलक भी देखी जा सकती है। स्थापत्य कला के लिहाज से ये देवल इतिहास में अलग स्थान रखते हैं। इस नाते ये वंडर्स ऑफ इंडिया में जगह पाने के लायक हैं।


हॉल ऑफ हीरो ऑफ राजस्थान यानी वीरों की दालान
मंडोर उद्यान में एक हॉल ऑफ हीरो ( वीरों की दालान) बना है। इसमें चट्टान से दीवार में तराशी हुई पन्द्रह आकृतियां हैं जो हिन्दू देवी-देवताओं का प्रतिनिधित्व करती है।

वीरों की दालान में देवी चामुंडा, महिषासुरमर्दिनी, श्री गोसाई जी, श्री मल्लीनाथ जी जी की प्रतिमाएं क्रम से हैं। इसके आगे बढ़ने पर आपको श्री पाबू जी, श्री रामदेवजी, श्री हडबू जी, श्री गोगाजी और श्री मेहाजी की प्रतिमाओं के दर्शन होते हैं। ये सभी वीर पुरुष अपने घोड़े या घोड़ियों पर सवार हैं। राजस्थान की लोककथाओं में इन सभी वीरों की दास्तां गाई और सुनाई जाती है।


इसके आगे आप श्री रामचंद्र जी का दरबार , श्री कृष्ण जी और श्री महादेव जी ( शंकर) का दरबार देख सकते हैं। यहां महादेव को भी राजों की तरह प्रदर्शित किया गया है। मंडोर में इन वीरों की दालान का निर्माण महाराजा अजीत सिंह द्वारा 1707 से 1724 के दौरान कराया गया। 

वहीं देवताओं की साल का निर्माण महाराज अभय सिंह द्वारा 1224 -49 के बीच कराया गया। देवताओं की साल में जालंधर नाथ, शिव पार्वती, राम, शिव, सूर्य, पंचमुखी ब्रह्म की प्रतिमाएं हैं। मंडोर में कई सदियों से होली के दूसरे दिन राव के मेले का आयोजन भी किया जाता है। मेले में निभाई जाने वाली कई परंपराएं और रीतियां सदियों से चलती आ रही हैं।

सबसे अनूठा है इकथंबा महल

मंडोर में घूमते हुए संग्रहालय के पास एक मीनार नुमा संरचना दिखाई देती है। इसका नाम इकथंबा महल है। क्योंकि दूर से देखने में यह एक थंब ही तरह ही नजर आती है। पर नजदीक से देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि यह तीन मंजिला एक महल ही है। इसका निर्माण महाराजा अजीत सिंह के काल (1705-1723 र्इ. ) में हुआ था। 

इसके अलावा आप मंडोर में अनूठा बाल उद्यान भी देख सकते हैं। इसमें बच्चों के लिए कई प्रकार के खेल कूद के साधन यानी झूल आदि लगाए गए हैं। इनका मामूली टिकट है। ट्रैकिंग के शौकीन लोग पहाड़ी पर चढ़ने का और जंगलों में घूमने का भी आनंद ले सकते हैं। मंडोर गार्डन में सुंदर तालाब भी है, हालांकि इसमे काफी लोग गंदगी फैलाते हुए नजर आते हैं। पर इसमें सुंदर कमल के फूल खिले भी दिखाई दे जाते हैं। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य
( MANDORE, WONDERS OF INDIA, CHATRI, DEVAL, MARWAR KING ) 


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