Sunday, March 19, 2017

मंडोर - यहां की रहने वाली थी मंदोदरी

जोधपुर मे घूम रहा हूं। अब मंडोर गार्डन जाना है। उम्मेद भवन से मंडोर की दूरी कोई नौ किलोमीटर बताई जा रही है। उम्मेद भवन से आधा किलोमीटर पैदल चलते हुए नीचे उतरने पर मुझे एक आटो वाला खाली नजर आता है। उससे मैं मंडोर चलने की बात करता हूं। तय होता  है कि मंडोर घूमाने के बाद वह मुझे वापस शहर में छोड़ देगा, जहां मुझे आगे जाना है। यह सब 300 रुपये में तय होता है। आटो वाले का नाम जवाहर है। जवाहर बताते हैं कि अगर दिन भऱ जोधपुर घूमना हो तो 700 रुपये में आटो बुक कर सकते हैं। यह वाजिब दर है। जवाहर का मोबाइल नंबर 8890724798 है। आप कभी जोधपुर जाएं तो उन्हें याद कर सकते हैं। वैसे जोधपुर के ज्यादातर आटो वाले अच्छे हैं। मंडोर पहुंचने पर उद्यान के प्रवेश द्वार पर काफी चहल पहल नजर आ रही है।विशाल उद्यान में प्रवेश के लिए कोई टिकट नहीं है। मैं नींबू पानी पीने के बाद अंदर की ओर चल पड़ता हूं।

मंडोर उद्यान में मुख्य द्वार के प्रवेश करने के बाद रावण हत्था (वाद्य यंत्र) पर लोक गीतों की धुनें बजाकर पर्यटकों का मनोरंजन करते लोक कलाकार नजर आते हैं। तो सड़क के किनारे महिलाएं राजस्थानी चूड़ियां और दूसरे हस्तशिल्प उत्पाद बेचती नजर आती हैं। अगर आपको सलमान की फिल्म तेरे नाम का गीत ओढ़नी ओढ़ के नाचूं आज याद आता हो तो उसे देखिए एक बार फिर...इस गाने की शूटिंग मंडोर के किले और मंडोर की छतरियों के बीच हुई है। सलमान खान के साथ इस गीत में भूमिका चावला हैं। गीत के कुछ दृश्य मेहरान गढ़ फोर्ट में भी फिल्माए गए हैं।

मण्डोर का प्राचीन नाम 'माण्डवपुर' था। यह पुराने समय में मारवाड़ राज्य की राजधानी हुआ करती थी। राव जोधा ने मंडोरको असुरक्षित मानकर सुरक्षा के लिहाज से चिड़िया कूट पर्वत पर मेहरानगढ़ का निर्माण कर अपने नाम से जोधपुर को बसाया था।

राजस्थान में ऐसी लोक मान्यता है की लंकापति रावण और मंदोदरी का विवाह जोधपुर के मंडोर में हुआ था। यानी मंदोदरी मंडोर की रहने वाली है। इसलिए कुछ मान्यताओं के अनुसार रावण का ससुराल जोधपुर में मंडोर नामक स्थान पर है। कहते हैं कि यहां रावण ने यहीं पर मंदोदरी के साथ फेरे लिए थे। इसलिए मंडोर में आज भी बकायदा रावण की पूजा होती है। इसलिए यहां दशहरे में रावण को हरगिज जलाया नहीं जाता।

मंडोर में एक सुन्दर बगीचा बना हुआ है और इस बगीचे में देवताओं की साल और वीरों का दालान बनी हुई है।  मंडोर गार्डन के अंदर अजीत पोल, एक थम्ब महल, जनाना बाग आदि देखे जा सकते हैं। मंडोर के ये ऐतिहासिक किले चौथी सदी और उसके बाद के बने हुए हैं। छठी से 12वीं सदी तक मंडोर गुर्जर प्रतिहार राज्य का हिस्सा रहा। इसके बाद यह पाली  के चौहान राजाओं के अधीन आ गया। इस दौरान दिल्ली सल्तनत की ओर से कई हमले हुए मंडोर पर। कभी राठौर राजाओं को दहेज मिला मंडोर, इसके बाद शेरशाह सूरी के हाथों से होता हुआ बाद में यह मारवाड़ राजाओं के कब्जे में आ गया।


मंडोर कभी राजस्थान के कला संस्कृति का भी बड़ा केंद्र रहा है। अजीत पोल के आगे मंडोर का पुराना किला है। यहां एक सरकारी संग्रहालय भी है, जो दिन के समय खुलता है।

अदभुत गणेश जी का मंदिर
मंडोर के किले के सामने एक गणेश जी का सुंदर मंदिर है। मंदिर में हर रोज स्थानीय लोग बड़ी संख्या में पूजा करने आते है। गणेश जी का फूलों से अदभुत श्रंगार किया जाता है। गणेश जी के तरफ काला गौरा और दूसरी तरफ भैरव नाथ की प्रतिमा है। मंदिर के सामने लोग हवन कुंड में समिधा डालने के बाद मन्नत लेकर प्रदक्षिणा करते हैं। मंदिर में प्रसाद चढ़ाकर लोग गणेश जी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस मंदिर को लेकर स्थानीय लोगों में काफी आस्था है।

-        - विद्युत प्रकाश मौर्य
 (MANDORE, RAJSTHAN, JODHPUR, MANDODARI, RAVAN, TERE NAM FILM, GANESH TEMPLE ) 


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