Friday, March 17, 2017

उम्मेद भवन का अदभुत संग्रहालय – राजसी ठाठ की निशानियां

जोधपुर के उम्मेद भवन पैलेस में पहुंचने वाला हर आदमी इसके हेरिटेज होटल में रहने का आनंद तो नहीं उठा सकता। पर वह उम्मेद भवन के बीचों बीच स्थित संग्रहालय को जरूर देख सकता है। प्रवेश टिकट लेने के बाद इस संग्रहालय को इत्मीनान से देखने के लिए दो घंटे का वक्त जरूर रखिए अपने पास।

अगर घूमते हुए भूख सताए तो टिकट घर के बगल में एक कैफेटेरिया भी है। यहां आप कुछ पेट पूजा करके राजसी एहसास महसूस कर सकते हैं। जोधपुर के वर्तमान राज परिवार ने अपने तमाम विरासत का व्यवसायीकरण काफी बेहतर ढंग से किया है। जब आप संग्रहालय में प्रवेश करते हैं तो राजसी इस्तेमाल की तमाम वस्तुएं देखकर आपको अचरज हो सकता है। इस राजाओं को शाही जीवन की एक तस्वीर पेश करता है।


उम्मेद भवन के स्टाफ गाइड के तौर पर राजासी ठाठ बाट की दास्तां आपको सुनाते हैं। सुनते जाइए और आगे बढ़ते जाइए। उम्मेद भवन पैलेस संग्रहालय जोधपुर के शाही परिवार द्वारा इस्तेमाल की गई प्राचीन वस्तुओं की एक विस्तृत श्रृंखला को प्रदर्शित करता है। इस संग्रहालय में हवाई जहाज के मॉडलों, हथियारों, प्राचीन वस्तुओं, घड़ियों, बॉब घड़ियों, बर्तनों, कटलरी का शानदार संग्रह देखने को मिलता है।

एक गैलरी में मारवाड़ राजघराने के सारे राजाओं की तस्वीरें हैं। वर्तमान राज परिवार की भी तस्वीरें यहां प्रदर्शित की गई हैं।  गैलरी में जानकारी मिलती है कि उम्मेद भवन के निर्माण में तब 94 लाख 51 हजार 565 रुपये खर्च हुए थे। यह विश्व के सबसे बड़े निजी आवास में शुमार है। 1978 में इसके एक हिस्से को निजी हेरिटेज होटल में तब्दील किया गया।

लाइफ स्टाइल गैलरी में आप खास तौर पर महाराजा उम्मेद सिंह द्वारा 1940 से 1950 के बीच इस्तेमाल की हुई वस्तुओं को देख सकते हैं। सबसे शानदार है यहां पर दर्जनों की किस्म की घड़ियों से रुबरू होना। हैदराबाद के निजाम के संग्रहालय में भी सैकड़ों घड़ियां देखने को मिलती हैं।

पर उम्मेद भवन में प्रदर्शित की गई किस्म किस्म की घड़ियां देखने और देर तक निहारने लायक हैं। ये घड़ियां अलग अलग देशों की बनी हुई हैं।

कुछ घड़ियां ऐसी हैं जो तारीख महीना और साल भी बताती हैं। ये सारी घड़ियां मैकेनिकल दौर की हैं। बड़ी घड़ियों से लेकर निहायत छोटी चांदी की बनी अंगूठी घड़ी भी देख सकते हैं।


आप यहां ड्रेसिंग टेबल और अलग अलग डिजाइन के आइने देख सकते हैं। इसके साथ मर्तबान और कटलरी का भी शानदार संग्रह है। और इन सब चीजों को देखते हुए मन भर जाए तो रेलवे लोकोमोटिव का मिनिएचर आपको चौंका देता है। दो घड़ियां ऐसी भी हैं जो रेलवे लोकोमोटिव के डिजाइन की बनी हुई है। यहां मिनिएचर कारें भी देखी जा सकती हैं।

 पर जब आप संग्रहालय से बाहर निकलते हैं को एक दर्जन के करीब असली कारें प्रदर्शित की गई हैं। ये कारें अलग अलग समय में राज परिवार द्वारा इस्तेमाल की जाती थीं। कारों के शौकीन के लिए इन्हे देखना बड़ी ही बेहतरीन मौका हो सकता है। इन कारों को इस तरह संभाल कर रखा गया है मानो ये अभी भी चलने को तैयार हैं। कारों के संग्रहालय के पास से उम्मेद भवन का विहंगम नजारा दिखाई देता है। ये सब कुछ देखने के बाद अब आगे चलने की बारी थी। अरे कहां, अब मंडोर गार्डन।

 - vidyutp@gmail.com
( UMMED BHAWAN PALACE, WATCH, CAR, LOCOMOTIVE, COLLECTION ) 

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