Monday, March 13, 2017

ब्लू सिटी के तौर पर पहचान है जोधपुर की...

जैसे जयपुर पिंक सिटी, जैसलमेर गोल्डेन सिटी के तौर पर जाना जाता है जोधपुर की पहचान ब्लू सिटी के तौर पर है। पुराने जोधपुर शहर के तमाम मकानों की बाहरी दीवारें नीलें रंग से रंगी गई हैं। जसवंत थड़ा के पास से ऊंचाई से शहर को निहारने पर इसका नीला अक्स उभर कर सामने आता है। इस नीले शहर की गलियां विदेशी सैलानियों को खूब भाती हैं। वे महंगे होटलों के बजाय इन गलियों में ठिकाना बनाना पसंद करते हैं। यहां वे भारतीयता की खुशबू को निकटता से महसूस करते हैं। हर शहर का अपना एक संस्कार होता है। जीने का एक अंदाज होता है। जोधपुर भी अपने अनूठे अंदाज में जीने वाला शहर है।
   
इस शहर में घरों व महलों में छितर (नीलें रंग के) के पत्थर लगे हुए हुए इसलिए इसे ब्लू सिटी के नाम से जाना जाता है।  इस शहर को 1459 में राव जोधा ने बसाया था। जोधा, राठौड़ समाज के मुखिया और जोधपुर के 15वें राजा थे। उनके नाम से ही इस शहर का नाम जोधपुर पड़ा, इससे पहले इस शहर का नाम मारवाड़ था। यह शहर रेगिस्तान के बीचो-बीच बसा हुआ है। यहां के सभी घरों के एक समय में नीले रंग से रंगा गया। इसके पीछे भी एक कारण था। ऐसा गरमी से बचने के लिए किया गया है। क्योंकि नीला रंग धूप को अवशोषक है। इस शहर में सूर्य देवता ज्यादा देर तक ठहरते हैं इसी वजह से इसे सूर्य नगरी के नाम से जाना जाता है।

जसवंत थड़ा से निकलने के बाद मैं धीरे धीरे पैदल चलता हुआ इस नीले शहर का अवलोकन करता हुआ आगे बढ़ रहा हूं। हमारी अगली मंजिल उम्मेद भवन पैलेस है। यहांसे दूरी कोई 5 किलोमीटर होगी। मैं किसी सवारी की तलाश में हूं। एक व्यक्ति से रास्ता पूछता हूं, पैलेस का। वे बताते हैं कि सीधे आगे चलते जाइए नीचे जाने पर शहर की मुख्य सड़क आएगी तो कोई सवारी मिल जाएगी। मैं थोड़ी दूर पैदल चलकर जाता हूं तो पीछे से एक बाइक आकर रुकती है। पता बताने वाले सज्जन हैं कहते हैं आइए बाइक पर बैठ जाइए नीचे तक छोड़ दूंगा। बाइक पर उनसे बातें होने लगती है वे नीचे तक छोड़ने के बजाए अब मुझे उम्मेदभवन तक ले जाने को तैयार हो जाते हैं।

जोधपुर के ऐतिहासिक घंटा घर के साथ 
रास्ते में वह मुझे जोधपुर हाईकोर्ट, किसान नेता बलदेव राम मिर्धा की प्रतिमा, राई का बाग रेलवे स्टेशन दिखाते हुए उम्मेद भवन पैलेस ले जाकर छोड़ते हैं। उम्मेद भवन के गेट पर पहुंचने पर पता चला की अब यह रास्ता बंद है दूसरे गेट से जाना होगा। वे हमें और 4 किलोमीटर ले जाकर दूसरे गेट पर छोड़ते हैं। रास्ते में रतनादा गणेश मंदिर दिखाई देता है। हमें उम्मेद भवन तक छोड़ने वाले साथी का नाम बलदेव सिंह सियाग है। वे जोधपुर में एक स्कूल चलाते हैं। जब अलग होने की बारी आई तो मैंने कहा, आपके साथ एक सेल्फी तो बनती है।

जोधपुर राजस्थान का लगातार बढ़ता हुआ शहर है। यहां हाईकोर्ट के अलावा नेशनल लॉ यूनीवर्सिटी की स्थापना हो चुकी है। साल 2011 की जनगणना में जोधपुर की आबादी 10 लाख को पार कर चुकी है। तो चलिए अब चलेंगे उम्मेद भवन पैलेस के अंदर। (अगली कड़ी में )

-        विद्युत प्रकाश मौर्य 
( JODHPUR CITY, RAJSTHAN, GHANTA GHAR, BALDEV RAM MIRDHA, BLUE CITY ) 

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