Saturday, March 11, 2017

मारवाड़ का ताजमहल - जसवंत थड़ा

मेहरानगढ़ का किला देख लेने के बाद मैं जय पोल गेट से बाहर निकलता हूं। यह किले का मुख्य द्वार है। ज्यादातर सैलानी इसी रास्ते से प्रवेश करते हैं, पर मैं फतेह पोल से आया था। जय पोल के बाहर विशाल पार्किंग बनी है। मैं पैदल चलता हुआ बाहर निकलता हूं। यहां से तकरीबन एक किलोमीटर की दूरी पर है दूसरा प्रमुख दर्शनीय स्थल जसवंत थड़ा। मार्ग संकेतक के सहारे जसवंत थड़ा पहुंच जाता हूं। 

जसवंत थड़ा को मारवाड़ का ताजमहल कहा जाता है। जसवंत थडा का निर्माण महाराज जसवंत सिंह द्वतीय की स्मृति में उनके बेटे महाराज सरदार सिंह जी ने 1906 में कराया था।  मेहरानगढ़ किले से बाहर निकलने के बाद पैदल चलते हुए आप जसवंत थड़ा पहुंच सकते हैं। किले के प्रवेश द्वार से इसकी दूरी कोई एक किलोमीटर है।
जसवंत थडा को जोधपुर राजपरिवार के सदस्यों के दाह संस्कार के लिए खास तौर पर बनाया गया है। इससे पहले राजपरिवार के सदस्यों का दाह संस्कार मंडोर में हुआ करता था। इस विशाल स्मारक में संगमरमर की कुछ ऐसी शिलाएं भी दीवारों में लगी है जिनमे सूर्य की किरणे आर-पार हो जाती हैं। यह भवन लाल घोटू पत्थर के चबूतरे पर बनाया गया है।



स्मारक के सामने बना बगीचा और फव्वारा बहुत ही मनोरम लगता है। इस स्मारक के निर्माण के लिए जोधपुर से 250 किलोमीटर दूर मकराना से संगमरमर के पत्थर लाए गए थे। बुद्धमल और रहीमबख्श सके आर्किटेक्ट थे। इसका नक्शा मंशी सुखलाल कायस्थ ने बनाया था। 

तब इस स्मारक को बनाने में दो लाख 84 हजार 678 रुपये का खर्च आया था। ताजमहल की तरह ही जसवंत थड़ा को चांदनी रात में देखने का अपना अलग आकर्षण है। रात की रोशनी में इसका दूधिया सौंदर्य कई गुना बढ़ जाता है। जसवंत थडा में मारवाड़ के कुल 11 राजाओं की छतरियां बनी हुई हैं।

स्मारक के पास ही एक छोटी सी झील है जो स्मारक के सौंदर्य को और बढा देती है। इस झील का निर्माण महाराजा अभय सिंह के कार्यकाल 1724-1749 के दौरान हुआ था। जसवंत थड़े के पास ही महाराजा सुमेर सिह, महाराजा सरदार सिंह, महाराजा उम्मेद सिंह जी और महाराजा हनवन्त सिंह के स्मारक भी बनाए गए हैं।


पहले जसवंत थडा केवल मोक्षधाम के रूप में जाना जाता था।  लेकिन अब यहां हर रोज सैलानी बड़ी संख्या में आते हैं। दिन भर यहां चहल पहल रहती है। यहां भी राजस्थानी लोक संगीत के कलाकार धुन छेड़ते हुए नजर आते हैं। जोधपुर राज घराना सूर्यवंशी रहा है। संगमरमर से बने जसवंत थड़े में सूर्य किरणें पत्थर को चीरती हुई अंदर तक आती हैं। यह नजारा बड़ा मनमोहक होता है।

जसवंत थड़ा के अंदर जोधपुर नरेशों की वंशावलियों के आकर्षक चित्र बनाए गए हैं। अंदर का हाल दो हिस्सों में विभाजित है। एक हिस्से में जोधपुर के मारवाड़ शासकों की तस्वीरें देखी जा सकती हैं। अगले हिस्से में राजा जसवंत सिंह की समाधि बनाई गई है। जसवंत थड़ा का प्रबंधन मेहरानगढ़ फोर्ट ट्रस्ट देखता है। इसमें प्रवेश के लिए टिकट 30 रुपये का है। स्मारक के प्रवेश टिकट से प्राप्त आय को किले के रखरखाव में खर्च किया जाता है, ऐसा टिकट पर लिखा है। आजकल इस ट्रस्ट के मुख्य न्यासी गज सिंह (द्वितीय) हैं।
- vidyutp@gmail.com 

(JASWANT THADA, TAJMAHAL OF MARWAR, JODHPUR, MAHARAJA GAJ SINGH )  

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