Wednesday, March 1, 2017

आम आदमी का शाही महल – पटवा हवेली

संकरे रास्ते जिसमें एक मोटा आदमी फंस जाए से चलते हुए हम पटवा हवेली में दाखिल होते हैं। यह हवेली क्या पुराने जोधपुर शहर का एक पुराना पारंपरिक घर है, जिसकी दरो दीवार और खिड़कियां दरवाजे सब कुछ पुरातन हाल में हैं। यह एक आम आदमी की हवेली है। वैसे जोधपुर उदयपुर या राजस्थान के दूसरे शहरों में आने वाले अमीर लोग वैसे महलों में रहने का सुख उठाते हैं जो अब होटल में बदल डाले गए हैं। पर इनमें रहने के लिए आपको मोटी राशि चुकानी पड़ती है। पर आम मध्यमवर्गीय होटलों की ही दर पर आप पटवा हवेली में किसी पुश्तैनी राजस्थानी घर में रहने का आनंद उठा सकते हैं।

यह एक आंगन नुमा घर है। इसके आधार तल पर स्वागत काउंटर बना है। नेपाली भाई रजिस्टर में मेरा परिचय दर्ज कराते हैं। इस पटवा हवेली में कोई भी आगंतुक सीधा रहने नहीं आता, न ही यह हवेली एजेंट के माध्यम में रहने वालों को ढूंढती है। यह एक होम स्टे के तौर पर काम करता है। इसमें सिर्फ आनलाइन बुकिंग से आए मेहमान ही ठहरते हैं। पर यह छोटी सी हवेली हमेशा देशी विदेशी मेहमानों से गुलजार रहती है। नीचे ही एक छोटा सा रसोई घर भी है। यहां रहने वाले मेहमानों से पूछकर उनके मन मुताबिक खाना भी पेश किया जाता है। एक नेपाली केयर टेकर इस होम स्टे को चलाते हैं। वैसे इसके मालिक एक वकील हैं, जो कभी कभी अपनी इस प्रोपर्टी को देखने आते हैं। मेरे समान के साथ नेपाली भाई मुझे दूसरी मंजिल पर मेरे कमरे में ले जाते हैं। पुराने घर की तरह लकड़ी के काले दरवाजे पर सांकल लगी है। 

मैं ताला खोलकर अंदर जाता हूं। कमरा बिल्कुल वैसा ही है जैसा सौ साल पहले का घर हो सकता है। दीवार में छोटी छोटी अलमारियां बनी हैं। छत पर लकड़ी के शहतीर लगे हैं। एक छोटे से दरवाजे के साथ एक नन्ही सी बालकोनी भी है। कमरे में नया ये है कि इसमें एयरकंडीशनर लगा है। पर बिजली के स्विच पुराने काले रंग वाले हैं। अब कमरे में आधुनिक टायलेट बना दिया गया है। वाश बेशिन, गीजर आदि की सुविधाएं भी उपलब्ध है। बिस्तर भी लकड़ी का पुराना पलंग है, जो किसी पुराने जमींदार के घर में हो सकता है।

मैं संकरी सीढ़ियां चढ़कर छत पर चढ़ जाता हूं। छोटी सी छत से पूरा पुराना जोधपुर शहर दिखाई देता है। पर यहां मेहरानगढ़ किले का अदभुत नजारा नजर आता है। रात को रंगीन रोशनी में डूबा हुआ किला भी यहां से देखा जा सकता है। इस हवेली के निर्माता ने जैसलमेर के पटवा हवेली की छोटी सी नकल बनाने की कोशिश की थी। इसमें मेहमानों के लिए कुल 10 कमरे उपलब्ध है। पहली मंजिल पर बड़े कमरे हैं। साथ ही आंगन में राजस्थानी स्टाइल में गद्दे और तकिए लगाए गए हैं। मुझे वहां दो चीनी बालाएं मिलती हैं जो आकर इस हवेली में ठहरी हुई हैं।

हवेली की सीढ़ियों पर कुछ पेंटिंग भी लगाई गई हैं। आप परिवार के साथ गए हों या फिर दोस्तों के साथ आपको यहां रहते हुए आनंद आएगा। यहां परंपरा और आधुनिकता का संगम नजर आता है।
vidyutp@gmail.com
Mobile: +91-9829024666 • Email: patwahaweli@gmail.com

 
दस्तरख्वान सजा है... पटवा हवेली जोधपुर। 

2 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’झूठ के लिए सच को दबाने का शोर - ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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