Tuesday, March 28, 2017

जौरा में 88 साल के नौजवान का जन्मदिन

कई बार जौरा जा चुका हूं। पर एक बार फिर जा रहा हूं। 7 फरवरी 2017 की सुबह है। निजामुद्दीन से ताज एक्सप्रेस में सवार हुआ। ट्रेन नियत समय पर मुरैना पहुंची। उपरिपुल से चलकर स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार से बाहर आया। यहां से बैटरी रिक्शा से मुरैना बस स्टैंड। चौराहे से सबलगढ़ की ओर जाने वाली बस में बैठ जाता हूं। कंडक्टर को गर्व से कहता हूं कि जौरा का एक टिकट। बस आधी दूरी चलने के बाद खराब हो जाती है। उसका इंजन गर्म हो गया। थोड़ी देर इंतजार के बाद दूसरी बस आई। इसमें खूब भीड़ थी। पर क्या पहुंचना है जौरा। 20 मिनट के सफर के बाद हम जौरा बाजार में थे। वहां से हास्पीटल रोड होते हुए पहुंच गया महात्मा गांधी सेवा आश्रम । देश भर से 200 से ज्यादा गांधीवादी सर्वोदयी और युवा कार्यकर्ता पहुंचे हुए थे। मंच पर विराजमान थे 88 साल के नौजवान एसएन सुब्बराव। उनका जन्मदिन है आज। वे अपना जन्मदिन मनाना पसंद नहीं करते। पर उनके हजारों चाहने वाले माने तब न।

इस बार उन्हे खास तौर पर बधाई देने पहुंचे हैं मैग्सेसे अवार्ड विजेता जल पुरुष राजेंद्र सिंह जो खुद को सुब्बराव जी का शिष्य मानते हैं। पूर्व विधायक डाक्टर सुनीलम। एकता परिषद के प्रमुख पी वी राजगोपाल जी। गुडगांव के काइट्स इंस्टीट्यूट के निदेशक डाक्टर कामरा और उनका पूरा परिवार। पूरे आयोजन का इंतजाम देख रहे हैं डाक्टर रण सिंह परमार और जौरा के स्थानीय लोग। 


पीवी राजगोपाल जी के साथ 
डाक्टर राजगोपाल कई साल तक महात्मा गांधी सेवा आश्रम जौरा में सचिव के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। पर इस आश्रम परिसर में मेरी उनसे पहली मुलाकात हो रही है। महाराष्ट्र से नरेंद्र भाई, इंदौर से महेंद्र नागर, ओडिशा से मधुसूदन दास, हरियाणा से सुरेश राठी जैसे तमाम पुराने कार्यकर्ता पधारे हैं। मंच संचालन कर रहे हैं लखनऊ से हमारे अजय पांडे भैया। बधाई  देने का सिलसिला जारी है। राज्यवार लोग मंच पर पहुंच रहे हैं। बधाई दे रहे हैं अपने प्यारे भाईजी को आशीर्वाद ले रहे हैं।

कैलाश पाराशर जी के साथ 
 मैं दिल्ली की मंडली में मंच पर पहुंचता हूं। हमारे साथ संजय राय, डीएस लमकोटी जी हैं। भाईजी बड़े प्यार से पूछते हैं – विद्युत भाई आप भी आ गए। मैं जो माला उनके गले में डालता हूं, वापस निकाल कर मेरे गले में डाल देते हैं। इतना स्नेह। धन्य हो गया मैं। असम से 20 लोगों का दल चल कर आया है। बेंगलुरु से सुब्बरावजी की भांजी रंजनी जायस भी आई हैं। उनसे मैं जनवरी 1992 में बेंगलुरु शिविर में मिला था। घर से निकला था उम्मीद नहीं थी कि इतने सारे पुराने दोस्तों से मुलाकात हो जाएगी।
प्रफुल्ल भाई के साथ कई साल बाद
 भाई प्रफुल्ल श्रीवास्तव तो जौरा आश्रम में ही सालों से रहने लगे हैं। उनसे भी कई साल बाद मिलना हुआ। मंतराम निषाद से 22 साल बाद तो ग्वालियर वाले राजेंद्र सिंह से 23 साल बाद मिलना हुआ। सदभावना रेल यात्रा के दौर के कई पुराने साथी मिले। वक्त ने सबको बदल दिया है पर प्रेम और स्नेह दिल में जगह पहले की तरह बनी हुई है। श्योपुर वाले जय सिंह जादोन और कैलाश पराशर जी कहते हैं कि हमारे साथ श्योपुर चलो। दोपहर के भोज में हजारों लोग शामिल हुआ। आज का खाना सबसे अच्छा कहकर खाया। एक दूसरे को खिलाया।

और मंतराम निषाद भाई 20 साल बाद मिले 
 शाम की सर्वधर्म प्रार्थना से पहले सुब्बराव जी की कुटिया में हूं। कानपुर वाली मनोरमा बहन साथ हैं। वे भाईजी को जन्मदिन पर कुछ सौ रुपये देकर कहती हैं कि इसे मेरी ओर से रखें पर इस धन को संस्था के फंड में डालें अपनी जेब खर्च के लिए रखें।
जौरा आश्रम के बीचोंबीच चंबल घाटी में 1974-1976 में हुए बागियों के सरेंडर की याद में सुंदर संग्रहालय का निर्माण कार्य जारी है। देश भर से आए युवा उसमें अपनी ओर से दान दे रहे हैं। अगली बार आने पर यहां एक सुंदर संग्रहालय देखने को मिलेगा। 
आश्रम में दोपहर का भोज भी। 


मैं सुब्बराव जी विदा लेकर निकलना चाहता हूं। तभी उनके मोबाइल पर अन्ना हजारे का फोन आता है। वे उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हैं। शाम की सर्वधर्म प्रार्थना में सुब्बराव जी तुकड़ो जी महाराज का प्रसिद्ध भजन गाते हैं - आया हूं दरबार तिहारे .... बहुत जनम का भूला भटका...लगवाले प्रभु चरण तिहारे ....  (लिंक पर क्लिक करें यूट्यूब पर सुनें ) मैं अगले सफर पर निकल पड़ता हूं। रात 12 बजे के बाद झांसी में हूं। ग्वालियर संस्करण का 8 फरवरी का अखबार देखता हूं। सुब्बराव जी के जन्मदिन पर पूरा पेज छपा है। खबरों में मेरा भी नाम है।

-- विद्युत प्रकाश मौर्य  
( SN SUBBARAO, MAHATMA GANDHI SEVA ASHRAM JOURA, MORENA, MP , PV RAJGOPAL, RAJENDRA SINGH)
   

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